Sat Sep 12, 2026 | Updated 01:08 AM IST

घर पर शंख रखना होता है बेहद शुभ, जानें कैसे और क्‍यों

क्या आप जानती हैं शंख को रखना या शंखनाद सुनना इतना शुभ क्यों माना जाता है। तो आइए जानें इसके पीछे के कारणों के बारे में। 
Updated:- 2019-06-25, 15:43 IST
image

आरती के समय मंदिरों में शंख बजाना बहुत जरूरी होता है। घरों में भी शंख रखना बेहद आम बात है। प्राचीन काल में भी युद्ध की घोषणा या किसी शुभ काम की शुरुआत शंखनाद से ही की जाती थी। कहीं ना कहीं यह प्रथा हम आज भी देखी जा सकती हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं शंख को रखना या शंखनाद सुनना इतना शुभ क्यों माना जाता है। तो आइए जानें इसके पीछे के कारणों के बारे में।

keeping shankh at mandir inside

इसे जरूर पढ़ें: पूजा में पान के पत्तों का इस्तेमाल करते समय रखें 4 इन बातों का ध्यान

शंखनाद का महत्‍व

सनातन धर्म में शंख के कई चमत्कारी गुणों का उल्लेख किया गया है। भारतीय परंपरा में शंख को समृद्धि, विजय, यश और लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्‍यता है कि जब भी किसी शुभ कार्य की शुरुआत करनी हो तो उससे पहले किया गया शंखनाद शुभ फलदायी साबित होता है।

 

शंख की उत्पत्ति कैसे हुई 

शंख के उत्पत्ति के बारे में यह मान्‍यता है की सर्वप्रथम इसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी। समुद्र मंथन में जिन चौदह रत्नों की उत्पत्ति हुई थी उनमें से शंख भी एक था, जिसे भगवान विष्णु ने अपने कर कमलों में धारण किया। इसके अलावा विष्णु पुराण के अनुसार यह भी माना जाता है कि भगवान विष्णु की अर्धांगिनी और धन की देवी माता लक्ष्मी समुद्रराज की पुत्री हैं और शंख उनका भाई है। इसलिए यह भी मान्‍यता है की जहां शंख होता है लक्ष्मी भी वहीं वास करती हैं।

shankh at home inside

पूजाघर में शंख रखने का महत्‍व

शंख के विषय में यह मान्‍यता है की इसे घर में रखने से घर की सीमा के भीतर कोई भी अनिष्ट कार्य नहीं हो पाता और परिवार के लोगों का जीवन भी बाधाओं से दूर रहता है। इतना ही नहीं, यह भी  मान्‍यता है की ऐसा करने से सौभाग्य में भी वृद्धि होती है।

shankh for pooja inside

धार्मिक कार्य

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार तो बिना शंखनाद के कोई भी धार्मिक कार्य पूरा नहीं हो सकता। इसकी आवाज से प्रेत आत्माओं और पिशाचों से मुक्ति भी मिलती है।

शंखों के प्रकार

शंख कई प्रकार के होते हैं और सभी से जुड़े पूजा विधान भी अलग-अलग होते हैं। उच्चतम श्रेणी के शंख मालदीव, लक्षद्वीप, भारत, श्रीलंका, कैलाश मानसरोवर में पाए जाते हैं। हिन्दू पुराणों के अनुसार अगर अनुष्ठानों में शंख का इस्‍तेमाल सही तरीके से किया जाए तो यह साधक की हर मनोकामना को पूरा कर सकते हैं। पुराणों में तो यह भी लिखा है कि कोई मूक व्यक्ति नित्य प्रति शंख बजाए तो बोलने की शक्ति भी प्राप्‍त कर सकता है।

keeping shankh at home inside

 

इसे जरूर पढ़ें: पूजा में क्यों किया जाता है नारियल का इस्तेमाल, जानें इसका महत्व 

शंख और उसकी आकृति

शंख को उसकी आकृति के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया गया है, जिस शंख को दाहिने हाथ से पकड़ा जाता है उसे दक्षिणावृति शंख, जिसे बाएं हाथ से पकड़ा जाता है उसे वामावृति शंख और जिस शंख का मुख बीच में से खुला होता है उसे मध्यावृति शंख कहा जाता है। इन तीन मुख्य प्रकार के शंखों के अलावा गोमुखी शंख, लक्ष्मी शंख, गणेश शंख, विष्णु शंख, कामधेनु शंख, कामधेनु शंख, देव शंख, चक्र शंख, गरुण शंख, शनि शंख, राहु शंख आदि भी होते हैं।

Photo courtesy- (Hindi Rasayan, Religious | Spiritual Articles - My Pandit G, Divine Strings, Picdeer, YouTube)

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।