हिंदू धर्म में प्रत्येक तीज त्यौहार का अलग महत्व है। हर एक त्योहार की अलग मान्यता है और उसे मनाने का तरीका भी अलग है। कुछ ऐसे भी त्योहार हैं जिन्हें हम भले ही पूरी श्रद्धा और विश्वास से क्यों न मनाएं लिखें उनके पीछे छिपे रहस्यों से अनजान होते हैं। ऐसे ही त्योहारों में एक एक है नाग पंचमी का पर्व। यह एक ऐसा पर्व है जो सावन के महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है और इस दिन मुख्य रूप से नाग देवता की पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार नाग पंचमी के दिन सांप की पूजा करने का विशेष महत्व है। 

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नागपंचमी के दिन नाग की पूजा क्यों की जाती है और इस त्योहार से जुड़ी मान्यताएं और इसका महत्त्व क्या है? हमने इस बात का पता लगाने के लिए नई दिल्ली के जाने माने पंडित, एस्ट्रोलॉजी, कर्मकांड,पितृदोष और वास्तु विशेषज्ञ प्रशांत मिश्रा जी से बात की उन्होंने जो कारण हमें बताए वो आपको भी जान लेने चाहिए। 

क्यों मनाया जाता है नागपंचमी का त्योहार 

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हिन्दू धर्म के अनुसार सावन के महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है। इस दिन मुख्य रूप से नाग की पूजा की जाती है और मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होता है। पुराणों के अनुसार नाग पंचमी पर की जाने वाली पूजा से राहु केतु के बुरे प्रभाव एवं कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। ऐसी मान्यता है कि नाग देवता की पूजा के साथ भगवान शिव की पूजा भी करनी चाहिए। नाग और शिव का विशेष संबंध बताया गया है। भगवान शिव हमेशा अपनी गर्दन पर वासुकि नाग को धारण किए रहते हैं इसलिए नाग की पूजा करने से भगवान शिव को प्रसन्न किया जा सकता है। 

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क्या है नाग पूजा का रहस्य 

पंडित प्रशांत मिश्रा जी बताते हैं कि पौराणिक कथा के अनुसार अर्जुन के पौत्र और राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने सांपों से बदला लेने और नागवंश के विनाश के लिए एक नाग यज्ञ किया, क्योंकि उनके पिता राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नामक सर्प के काटने से हुई थी। नागों की रक्षा के लिए इस यज्ञ को ऋषि जरत्कारु के पुत्र आस्तिक मुनि ने रोक दिया। उन्होंने सावन की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि वाले दिन ही नागों को यज्ञ में जलने से रक्षा की और उनके जलते हुए शरीर पर दूध की धार डालकर इनको शीतलता प्रदान की। उसी समय नागों ने आस्तिक मुनि से कहा कि पंचमी को जो भी मेरी पूजा करेगा उसे कभी भी नाग के काटने से मृत्यु का भय नहीं रहेगा। तभी से पंचमी तिथि के दिन नागों की पूजा की जाने लगी। ऐसी मान्यता है कि जिस दिन इस यज्ञ को रोका गया,उस दिन श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। उस दिन तक्षक नाग व उसका शेष बचा वंश विनाश से बच गया। मान्यता है कि यहीं से नाग पंचमी पर्व मनाने की परंपरा प्रचलित हुई। एक और प्रचलित कथा के अनुसार नाग पंचमी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने कालिया नाग का अहंकार तोड़ा था और नाग पूजा का महत्त्व बताया था। 

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कैसे होती है नाग पंचमी के दिन नाग की पूजा 

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पंचमी तिथि के दिन सुबह स्नान कर व्रत और पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थल पर नाग देवता का चित्र गोबर या गीली मिट्टी से बनाएं। मिट्टी के नाग बना कर उनको चौकी पर स्थापित करें। कुछ लोग मुख्य द्वार पर नाग का चित्र बनाते हैं और उस पर दूध का भोग लगाते हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर के मुख्य द्वार से सुख समृद्धि आती है। इस दिन हल्दी, रोली, चावल,कच्चा दूध और फूल चढ़ाकर नाग देवता की पूजा करें। नाग देवता से घर में सुख-शांति और सुरक्षा की प्रार्थना करें। एक पौराणिक मान्यता यह भी है कि नागदेवता की पूजा करने वाली महिलाएं नाग को अपना भाई मानती हैं और उनसे अपने परिवार की रक्षा का वचन लेती हैं और इस दिन नाग को दूध चढ़ाने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।  

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इस प्रकार नागपंचमी के दिन नाग पूजा का विशेष महत्त्व है और इस दिन पूजन करने से व्यक्ति के समस्त पापों से मुक्ति के साथ मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

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