Paralympics 2024: पेरिस ओलंपिक खेलों के समापन के बाद अब पेरिस पैरालंपिक्स की 28 अगस्त से शुरुआत हो चुकी है, जो कि 9 सितंबर तक चलेगा। इन खेलों में इस बार कुल 167 देशों ने हिस्सा लिया है। पेरिस पैरालंपिक्स खेलों में इस साल भारतीय दल 12 खेलों में शामिल है, महिलाओं की बात करें तो भारत का प्रदर्शन करने वाली कुल 32 महिलाएं खेलं में भाग ली हैं। सभी से इस बार मेडल की उम्मीद लगाई जा रही है। आपको बता दें, भारत ने इससे पहले टोक्यो पैरालंपिक 2021 में कुल 19 पदक जीते थे, जिसमें 5 गोल्ड, 8 सिल्वर और 6 कांस्य पदक थे। ऐसे में, अब आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि ये ओलंपिक तो समझ आता है, पर ये पैरालंपिक्स क्या होता है? इन खेलों में किस तरह के खेल होते हैं? और इसमें कैसे एथलीट भाग लेते हैं? चलिए आज हम आपको इन सारे सवालों के जवाब देते हैं।
पैरालंपिक्स क्या होता है और इसकी शुरुआत कब हुई थी?
पैरालंपिक्स खासतौर पर शारीरिक रूप से अक्षम एथलीट के लिए है। इन खेलों का आयोजन हर साल ओलंपिक खेलों के तुरंत बाद ही किया जाता है। इनमें कई खेलों को शामिल किया जाता है। पैरालंपिक खेलों का मकसद शारीरिक रूप से असमर्थ एथलीटों को समान अवसर प्रदान करना और उनके अनोखे कौशल व प्रतिभा को दुनिया के सामने लाना होता है।
पैरालंपिक खेलों की शुरुआत साल 1948 में हुई थी। उस वक्त इसे स्टोक मैंडविल गेम्स के नाम से जाना जाता था। साल 1960 में इसे आधिकारिक रूप से पैरालंपिक्स कहा गया। जानकारी के लिए आपको बता दें कि पैरालंपिक्स का फ्लैग, निशान और मेडल सब कुछ ओलंपिक से अलग होते हैं।
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पैरालंपिक खेलों में क्या है एथलीट की योग्यता का पैमाना?
पैरालंपिक खेलों में शारीरिक, मानसिक, या बौद्धिक रूप से अक्षम एथलीट ही भाग ले सकते हैं। इन खेलों में वे सभी शामिल होते हैं, जिनके शरीर में निम्नलिखित विकृतियां हैं-
- मांसपेशियों की दुर्बलता
- जोड़ों की गति की निष्क्रियता
- किसी अंग में कोई कमी
- टांगों की लम्बाई में फर्क
- छोटा कद
- हाइपरटोनिया यानी मांसपेशियों में जकड़न
- शरीर के मूवमेंट पर नियंत्रण की कमी
- एथेटोसिस यानी हाथ-पैरों की उंगलियों की धीमी मंद गति
- नजर में खराबी
- सीखने की अवरुद्ध क्षमता
हालांकि, पैरा खिलाड़ियों को उनकी शारीरिक स्थिति के आधार पर उन्हें श्रेणीबद्ध किया जाता है। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि शॉटपुट खेल में भाग लेने वाले 5 खिलाड़ी हैं। उनमें से दो केवल हाथ में अक्षम हैं और 3 ऐसे हैं जिनके पूरे बाजू में ही दिक्कत है, तो उनको अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है, ताकि मुकाबला बराबरी का हो। उनकी श्रेणी को तय करने के लिए यह ध्यान रखा जाता है कि पैरा खिलड़ियों में उनकी शारीरिक स्थिति उनके खेल को किस हद तक प्रभावित कर रही है।
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Image credit- Herzindagi, Twitter
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