शादीशुदा जिंदगी निभाना हर महिला के लिए एक बड़ा चैलेंज होता है, फिर चाहे वह कोई आम इंसान हो या सेलेब्रिटी। फर्क बस इतना है कि जो महिलाएं मैच्योरिटी के साथ रिलेशनशिप को हैंडल करना जानती हैं, उनकी मुश्किलें बहुत हद तक आसान हो जाती हैं। विद्या बालन और उनके पति सिद्धार्थ रॉय कपूर का रिश्ता बेहद खास है। दोनों ही शो-बिजनेस की दुनिया से जुड़े हैं। लेकिन घर पर किस तरह से वे एक दूसरे का साथ निभाते हैं, इस बारे में आइए विद्या से जानते हैं- 

'हम रिश्ते को लेकर हैं संजीदा'

vidya balan siddharth roy kapoor happy married life inside

मैं अपनी शादी और अपने पति सिद्धार्थ रॉय कपूर के लिए जितना कुछ कर सकती हूं, करती हूं और मेरे पति भी इसी तरह से समर्पित हैं। हम अपने रिश्ते के लिए संजीदा हैं और एक दूसरे की भूमिका समझते हैं। जिंदगी में स्थितियां हमेंशा आदर्श नहीं होतीं, फिर भी हम अपनी कोशिश करते हैं कि एक दूसरे का साथ बेहतर तरीके से निभा सकें। 

बातें सुनने का मतलब कंट्रोल में रहना नहीं होता

मैं और मेरे पति साथ के बाद की जिम्मेदारियों पर अलग सोच रखते हैं। मेरी कई दोस्त सोचती हैं, 'मेरे पति मेरी बातें सुनते हैं और मेरी इच्छाओं का सम्मान करते हैं तो मैं उन पर काबू रखती होंउगी।' मेरे पति से कई बार उनके दोस्तों ने कहा है तुम अपनी वाइफ पर कंट्रोल नहीं रखते, वो बहुत डॉमिनेटिंग होगी। 

हमारी बराबर की साझेदारी है

क्या आप दोस्ती में किसी से पूछते हैं कि उसमें कौन किसे कंट्रोल करता है। नहीं ना। फिर हम आज के बदलते समय में शादियों को इस नजरिये से क्यों देखते हैं कि कौन किस पर काबू रखता है। कंट्रोल करना एक आम समस्या है, जिससे शादीशुदा जिंदगी और बाद में बच्चों की परवरिश पर बुरा असर पड़ता है। मेरा मानना है कि इसे मजाक या हल्के में कतई नहीं लेना चाहिए। अगर यह प्रवृत्ति थोड़ी सी भी आ रही है तो इसे वहीं खत्म कर देना चाहिए। 

अपने परिवार से सीखी रिलेशनशिप की बारीकियां

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मैं रिलेशनशिप के मामले में कोई एक्सपर्ट नहीं हूं। मैं जो कुछ सीखा है, वह अपनी रिलेशनशिप से सीखा है और अपने परिवार से, जिसमें मैं पली-बढ़ी। अपने घर की बात करूं तो मेरे पिता अभी तक मां के लिए मॉर्निंग टी बनाते हैं। वह मां के साथ शॉपिंग पर जाने में भी संकोच नहीं करते। जब हमारी मेड नहीं आती थी, तब मैं और मेरा भाई, हम दोनों सफाई और खाना बनाने का काम करते थे। हमारे यहां जेंडर के आधार पर काम बंटे हुए नहीं थे। इसी तरह मेरी शादी में, हम दोनों ने फैसला किया कि हम पारंपरिक तरह से जेंडर रोल्स को फॉलो नहीं करेंगे, लेकिन हम एक होकर जरूर काम करेंगे।

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एक दूसरे को बेहतर बनाने में करते हैं मदद

मेरे घर में मेरे पति बजट और फाइनेंशियल प्लानिंग में मेरी मदद करते हैं। मैंने यह कभी नहीं सोचा कि मैं इस मामले में उनसे कमतर हूं। घर के मुखिया होने के नाते उन्होंने मुझसे कभी बहुत बड़ी अपेक्षा नहीं की। उन्होंने कभी मुझे यह उम्मीद भी नहीं की कि मैं उनकी फैमिली के साथ इस तरह से पेश आऊं कि वह सीधे स्वर्ग से उतरी है। हम एक दूसरे की फैमिली की उसी तरह से इज्जत करते हैं, जैसे कि अपने परिवार की। हम एक दूसरे को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसमें किसी तरह की नेगेटेविटी और जोर-आजमाइश नहीं है। 

 

  • Saudamini Pandey
  • Her Zindagi Editorial