एक नया घर ख़रीदना हमेशा सभी के लिए एक बड़ी बात है। यह आपके द्वारा किए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण निवेशों में से एक है इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि आप जब भी घर खरीदें तब वह स्थान चुनें जो आपके और आपके परिवार के लिए उपयुक्त हो। जिस प्रकार हर चीज़ में वास्तु का होना जरूरी है वैसे ही घर की समृद्धि के लिए नया घर खरीदने में भी वास्तु के नियमों का पालन करना जरूरी है। 

जब वास्तु के हिसाब से घर खरीदा जाता है तब हर तरह से एक सकारात्मक जगह की तलाश करने की सलाह दी जाती है। वैसे इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि ऐसा घर ढूंढ़ना मुश्किल है जो 100% वास्तु प्रमाण हो। लेकिन सही सलाह के साथ, आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आप घर खरीदते समय एक सकारात्मक जगह का चयन करें जो आपको बहुतायत में खुशी दे और आप सभी वास्तु दोषों से बचें। आइए Sheetal Shaparia, Life Coach and Astrologer से जानें कि नया घर खरीदते समय आपको वास्तु के किन नियमों का पालन करना चाहिए जिससे सुख समृद्धि आ सके। 

मुख्य प्रवेश द्वार की दिशा 

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नया घर खरीदते समय ऐसा घर चुनना आदर्श होता है जिसका मुख्य प्रवेश द्वारउत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में हो और घर के उत्तर या पूर्व क्षेत्र के भाग में खुला स्थान होना चाहिए। सुबह की किरणें घर में पड़ना एक बहुत अच्छा और आवश्यक कारक है जिस पर विचार करने की आवश्यकता होती है। जब भी आप नया घर खरीद रही हैं तो उसके मुख्य द्वार की दिशा के बारे में विचार जरूर करें। वास्तव में ऐसा माना जाता है कि मुख्य द्वार से ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसलिए इसकी दिशा का ध्यान देना अति आवश्यक है। 

कैसी होनी चाहिए रसोई और कमरों की दिशा 

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जब भी आप नया घर खरीदें तब यह सुनिश्चित करें कि मुख्य रूप से घर की रसोई दक्षिण-पूर्व दिशा में होनी चाहिए। ऐसी दिशा में रसोई होने से रसोई में बनाई जाने वाली चीज़ें स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं। इसके अलावा वास्तु के हिसाब से घर का मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम में और बच्चों का कमरा उत्तर-पश्चिम में होना चाहिए। किसी भी धर्म के लोगों के लिए यह सबसे ज्यादा जरूरी बात है कि घर का प्रार्थना कक्ष घर के उत्तर से पूर्व क्षेत्र में होना चाहिए। वास्तु के अनुसार ऐसी दिशा में होने वाला पूजा कक्ष घर में आने वाली खुशियों का सबसे बड़ा कारण बनता है। दक्षिण-पश्चिम की ओर मुख वाले घरों से बचें और सीढ़ियां उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं होनी चाहिए।

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पुराने मालिक के बारे में लें जानकारी

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वास्तु के नियम के हिसाब से आप जिससे घर खरीद रही हैं उसके बारे में आपको पूरी जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए। नए घर की सुख समृद्धि के लिए घर या मालिक का इतिहास एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारक है जिसे आपको सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। सबसे पहले हमेशा एक नया घर खरीदने का ही प्रयास करें और यदि यह संभव नहीं है तो पुराने मालिक के इतिहास की जांच जरूर करें। पिछला मालिक एक सफल व्यक्ति होना चाहिए जो नकारात्मकता से दूर हो और उन्हें अपने विकास का संकेत देते हुए ही एक बड़े घर में जाना चाहिए। हमेशा सुनिश्चित करें कि आप एक घर खरीद रहे हैं न कि समस्याएं। घर कभी भी नुकसान, बीमारी, तलाक आदि का गवाह नहीं होना चाहिए। ऐसे घरों से बचना सबसे अच्छा है क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जाओं से लीन हो सकता है।

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रखें इन बातों का ध्यान 

यदि आप एक विला खरीद रहे हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि आप भूखंड, मिट्टी, नकारात्मक ऊर्जा आदि के क्षेत्र पर विचार करें। भूनिर्माण इस तरह से होना चाहिए कि उत्तर/उत्तर-पूर्व भाग नीचा हो और दक्षिण -पश्चिम ऊंचा है। प्रवेश उत्तर-पूर्व दिशा से होना चाहिए। मास्टर बेडरूम घर के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में, दक्षिण पूर्व में रसोई घर और घर के उत्तर-पूर्व, पूर्व या उत्तर में प्रार्थना कक्ष होना चाहिए। अगर आपके विला या रो हाउस में बेसमेंट है तो वह पूरे घर के नीचे होना चाहिए। यदि यह आंशिक है, तो यह उत्तर या उत्तर-पूर्व क्षेत्र में होना चाहिए।

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जब आप नया घर खरीदते समय उपर्युक्त बातों का ध्यान रखती हैं तो यह घर की सुख समृद्धि का कारण बन सकता है। वहीं इसके विपरीत खरीदा हुआ घर आपकी असफलताओं और वास्तु दोष का कारण भी बन सकता है। 

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