कई लोग फैशन के चलते कछुए की अंगूठी पहनते हैं तो कई लोग इसे शुभ मानकर धारण करते हैं। या फिर यूं कहा जाए कि इस अंगूठी के आकार में इतना खिंचाव है कि लोग इसे पहनना चाहते हैं। यह अंगूठी भले ही सोने या पंच धातु की न हो फिर भी लोग इसकी तरफ आकर्षित होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फैशन के अलावा कछुए कि अंगूठी के कई प्रतीकात्मक प्रभाव भी हैं? इस लेख में जाने माने ज्योतिषी एवं वास्तु कंसल्टेंट आचार्य मनोज श्रीवास्तव जी बता रहे हैं कछुए की अंगूठी के प्रभाव और इसे पहनने में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में। 

क्यों पहनते हैं अंगूठी 

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कछुए की अंगूठी को यदि लक्ष्मी का प्रतीक कहा जाता है तो यह सही नहीं है। कछुआ शनि का प्रतीक माना गया है इसलिए इसके गुण शनि ग्रह के सामान है। कछुआ धैर्य, निरंतरता और लम्बी आयु का प्रतीक है। शनि ग्रह भी इन्ही विशेषताओं का द्योतक है इसीलिए आप कह सकते हैं शनि ग्रह की सकरात्मंक गुणवत्ता की प्रतीक है यह अंगूठी। शनि के अन्य गुण हैं जैसे जीवन का बोझ अपने ऊपर लेना। जिनका शनि अच्छा है वे जीवन का बोझ सफलता पूर्वक निभा सकते हैं। इसलिए ये अंगूठी पहनना उनके लिए शुभ होता है। 

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इसकी पौराणिक कथा 

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शास्त्रों में भगवान् विष्णु के द्वितीय अवतार को कुर्मावतार कहते हैं और उन्होंने समुद्र मंथन के दौरान कुर्म अर्थात कछुआ बनकर मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर लिया था जिससे देव और दानव मिलकर समुद्र मंथन कर सकें। इस तरह आप कह सकते हैं कि भगवान् का कुर्मावतार शनि का प्रतीक है। 

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किन लोगों को पहननी चाहिए 

  • जिन लोगों का व्यव्हार बहुत उग्र और गरम होता है उनके लिए ये अंगूठी शीतलता प्रदान करने का कार्य करती है। ज्योतिष के अनुसार, अगर आपकी जन्म राशि (चन्द्र राशि) कर्क, वृश्चिक या मीन है तो आप इस अंगूठी को न पहनें क्यूंकि ये तीनो राशियाँ जल तत्त्व की हैं और इसे धारण करने से इनमें शीत प्रकृति बढ सकती है जिस कारण स्वास्थ्य और मन पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। 
  • इसके विपरीत इसका सबसे अच्छा प्रभाव मेष, सिंह और धनु राशि के जातकों को मिलता है। अगर उनमे गुस्सा अधिक है तो इसको धारण करने से धैर्य और शीतलता में वृद्धि होती है। 

वास्तु के अनुसार महत्त्व 

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वास्तु और फेंग शुई में भी कछुए की इन्ही विशेषताओं को सराहा गया है। वास्तु में आपको पत्थर से बना कछुआ घर के पश्चिम या मध्य में रखने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से आपका परिवार दीर्घायु रहता है और आपका व्यवसाय स्थिर और निरंतर प्रगति के पथ पर रहता है। शनि का एक और गुण है एकाग्रता और कछुआ इसका भी प्रतीक है।

कछुआ मुख्य रूप से पानी में रहने वाला जीव है इसलिए इसको शीतलता का प्रतीक भी माना गया है। वैसे तो शास्त्रों में या वास्तु में कछुए की अंगूठी का कोई वर्णन नहीं है फिर भी हम उपरोक्त गुणों को अपने जीवन में विकास करने के लिए इस अंगूठी को धारण कर सकते हैं। 

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अंगूठी पहनने के नियम 

  • कछुए की अंगूठी को हमेशा चांदी में बनवाना चाहिए। जिससे वो शीतलता प्रदान कर सके। इसको पहनते समय ध्यान रखें कि कछुए का मुंह आपकी तरफ हो, आपके उंगली के पोर या नाखूनों की तरफ नहीं रखें। 
  • शनि की उंगली मध्यमा है इसलिए इस अंगूठी को दाहिने हाथ की मध्यमा यानी कि मिडिल फिंगर में पहनना चाहिए। बाएं हाथ में इस रिंग को पहनने से किसी भी तरह का लाभ प्राप्त नहीं होगा। इस अंगूठी को पहनने से पूर्व कोई विशेष पूजा की आवश्यकता नहीं है। फिर भी अगर आप चाहें तो पानी से धोकर इसे धूप दिखा कर और अपने पूजा घर में स्थापित देवी-देवताओं की तस्वीर या प्रतिमा से इसको स्पर्श करके पहन सकते हैं।

यहां दी गई बातों का ध्यान रखते हुए यदि आप इस अंगूठी को धारण करती हैं तो आपको इसका लाभ अवश्य दिखाई देगा।  

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