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तिह से लेकर वनवास तक, सिंधी शादियों में निभाई जाती हैं ये खास रस्में

शादियों का सीजन चल रहा है और ऐसे में आज हम आपको कुछ खास सिंधी शादियों के रस्मों के बारे में बताएंगे, जो जरूरी रूप से दूल्हे और दुल्हन द्वारा निभाए जाते हैं।  
Updated:- 2024-01-05, 11:00 IST
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भारत में सभी धर्म और जाति के लोगों की शादियों की अलग-अलग रस्मों-रिवाज और संस्कृति होती है। सभी रस्मों का अपना ही अलग मजा होता है। हिंदू शादियों के बारे में तो आप सभी बहुत कुछ जानते होंगे लेकिन क्या आपको सिंधी शादियों में होने वाले तरह-तरह के रस्म और रीति-रिवाजों के बारे में पता है? यदि नहीं तो आज हम आपको सिंधी शादियों के कुछ खास रस्म के बारे में बताएंगे, जो बेहद खास है।

तिह

तिह की यह रस्म में दुल्हन की ओर से पंडित जी दूल्हे के पास जाते हैं और दूल्हे के स्थान पर चावल, चीनी, खजूर और सूत लेकर जाते हैं। पहले गणेश पूजा करते हैं और फिर दूल्हे की गोद में कागज का टुकड़ा रख दूल्हे को आशीर्वाद देते हैं।

वनवास

sindhi wedding rituals

इस रस्म में दूल्हा और दुल्हन के घर में अलग-अलग पत्थरों की मूर्ति स्थापित की जाती है। इस रस्म में सात शादीशुदा महिलाएं नहाने जाने से पहले दूल्हा और दुल्हन के सिर पर तेल डालती हैं। शादी के इस खास रस्म में दूल्हे और दुल्हन को हल्दी (हल्दी की गांठ) लगाने से पहले बालों में अच्छे से तेल लगाया जाता है, वो भी सुहागन महिलाओं के द्वारा।

जेन्या

दूल्हे के लिए यह अनोखा रस्म है, जिसमें दूल्हे को पंडित जी जनेऊ देते हैं और मंत्र बोलते हैं। इस रस्म में दूल्हे को उसकी जिम्मेदारी भी समझाई जाती है। हिंदुओं में जनेऊ पहनाने की रस्म पहले ही हो जाती है, लेकिन सिंधी शादी से पहले इस रस्म में जनेऊ पहनाया जाता है।

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देव बिठाना 

यह लगभग सभी धर्म में होता है। दूल्हा और दुल्हन को बुरी और काली नजर और ऊर्जा से बचने के लिए होती है। इस रस्म के बाद होने वाले दूल्हा और दुल्हन शादी तक घर से बाहर नहीं जाते हैं। घर में गणपति जी के अलावा और दूसरे इष्ट देवताओं को शादी के लिए आमंत्रित किया जाता है।

खीरत सत

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इस पारंपरिक रस्म में पंडित जी देवी-देवताओं को दूध और इलायची चढ़ाते हैं और उसका उपयोग प्रसाद बनाने के लिए किया जाता है। शादी में देवी-देवता को चढ़ाने के लिए खास तरह का प्रसाद बनाया जाता है।

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दूल्हे को मापने की रस्म

शादी की इस खास रस्म में एक दूल्हे की परिवार से पीर वारी आती है और दो दुल्हन की ओर से। पीर वारी धागा लेते हैं और दूल्हे को मापते हैं। यह शादी के पहले की रस्म है, जिसमें दूल्हे को अच्छे से धागा की मदद से नापा जाता है।

 

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