हिंदू धर्म के अनुसार अलग -अलग भगवानों की पूजा पूरे विधि विधान के साथ अलग तरीकों से की जाती है और इनका अपना अलग महत्व है। ऐसा माना जाता है कि सभी भगवानों की पूजा का अलग फल मिलता है और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। सभी भगवानों की स्तुति अलग -अलग मंत्रों  के साथ की जाती है और सभी मंत्रों का अपना अलग महत्त्व है। ऐसा माना जाता है कि मंत्रों का सही ढंग से जाप करने से कई पापों से मुक्ति मिलने के साथ मोक्ष का द्वार भी खुलता है। ऐसा ही एक मंत्र है राम रक्षा स्तोत्र मंत्र।

ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति के घर में सुख समृद्धि बनी रहने के साथ धन लाभ भी मिलता है। यह मंत्र लोगों को मुक्ति के मार्ग पर ले जाता है। आइए नई दिल्ली के पंडित एस्ट्रोलॉजी और वास्तु विशेषज्ञ, प्रशांत मिश्रा जी से जानें राम रक्षा स्तोत्र का जाप करने के महत्व और इससे जुड़े लाभ के बारे में।

राम रक्षा स्तोत्र की कथा

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पौराणिक मान्यता के अनुसार स्वयं भगवान शिव ने ऋषि बुधकौशिक को स्वप्न में आकर राम रक्षा स्त्रोत का पाठ सुनाया था। इसकी कथा के अनुसार प्रात: काल ऋषि ने अक्षरश: उसे संस्कृत में लिखा था। ऐसा माना जाता है जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ भगवान राम को समर्पित इस स्तोत्र का पाठ करता है उसकी रक्षा स्वयं भगवान श्री राम करते हैं। शत्रुओं से रक्षा करने के लिए भी इस स्तोत्र का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। पंडित प्रशांत मिश्रा जी बताते हैं कि राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति की हर समस्या का समाधान होता है और इससे आपको शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में मदद भी मिलती है। मान्यता अनुसार यह स्तोत्र व्यक्ति के चारों ओर सुरक्षा कवच बनाता है जिससे कि किसी भी विपदा, परेशानी या संकट से बचा जा सकता है।

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रोगों से मुक्ति मिलती है

ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र का पाठ नियमित रूप से करने से व्यक्ति को कई तरह के रोगों और तनाव से मुक्तिमिलती है और शारीरिक कष्टों से भी यह मुक्ति दिलाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रीराम रक्षा स्तोत्र बेहद प्रभावी हैं, इसका पाठ करने से जातक को विभिन्न प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। रोगों से मुक्ति के लिए पाठ करने से पहले एक बर्तन में कुछ सरसों के दानें ले लें और साफ़ आसन बिछाकर जमीन पर बैठ जाएं फिर इस स्तोत्र का पाठ करें। सरसों के दाने सामने रखें और 11 बार पाठ करें और किसी भी काम के लिए जाएं तो उनमें से कुछ सरसों के साने लेकर जाएं। अपने धन कोष में भी कुछ सरसों के दाने रखें इससे कभी धन की कमी नहीं होती है।

ram raksha stortra by prashant mishra

मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए ऐसे करें पाठ

ऐसी मान्यता है कि यदि आप किसी मनोकामना की पूर्ति हेतु राम रक्षा स्त्रोत्र का पाठ कर रहे हैं तो इसे दिन में 11 बार करें और 41 दिनों तक नियमित रूप से इस पाठ का जाप करें। इस स्तोत्र का जाप करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसके साथ ही आपको इसके जाप से धन लाभ भी प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र के पाठ से यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है या फिर शत्रुओं पर विजय पानी है तो इसका पाठ फलदायी होता है। यही नहीं जब आप नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ करते हैं तो घर में शांति बनी रहती है और सुख समृद्धि आती है।

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भूलकर भी न करें इसका हवन

कुछ लोग अधूरी जानकारी की वजह से राम रक्षा स्तोत्र से हवन भी करते हैं लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। इस मंत्र से हवन करने से आपको नकारात्मक प्रभाव मिल सकते हैं। इसलिए इस मंत्र का जाप नियमित रूप से करें लेकिन आप भूलकर भी हवन करते समय इस मंत्र का जाप न करें।

राम रक्षा स्तोत्र के अन्य लाभ

  • अगर अचानक कोई विपत्ति आ जाए या फिर सफलता की उम्मीद न हो तब इस मंत्र का जाप करें।
  • इस स्त्रोत के नियमित पाठ करने से सभी प्रकार के कष्टों से और रोगों से मुक्ति दिलाता है।
  • धन लाभ के लिए भी श्रद्धा पूर्वक इस स्तोत्र का जाप किया जाता है।
  • संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दम्पति नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करें।
  • इस स्तोत्र के जाप से कुंडली में मंगल के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।

क्या है राम रक्षा स्त्रोत

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चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् । एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् । 1।

ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् । जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितं ।2।

सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम्। स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ।।3।।

रामरक्षां पठेत प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम्। शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ।। 4।।

कौसल्येयो दृशो पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुति। घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ।।5।।

जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः। स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ।।6।।

करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित। मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ।।7।।

सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः। उरु रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृताः ।।8।।

जानुनी सेतुकृत पातु जंघे दशमुखांतकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामअखिलं वपुः ।।9।।

एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृति पठेत। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ।।10।।

पातालभूतल व्योम चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ।।11।।

रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन। नरौ न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ।।12।।

जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ।।13।।

वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत। अव्याहताज्ञाः सर्वत्र लभते जयमंगलम् ।।14।।

आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः। तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ।।15।।

आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम्। अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान स नः प्रभुः ।।16।।

तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ। पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ।।17।।

फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ। पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ।।18।।

शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्। रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ।।19।।

आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशा वक्ष याशुगनिषङ्गसङ्गिनौ। रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम ।।20।।

सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा। गच्छन् मनोरथान नश्च रामः पातु सलक्ष्मणः ।।21।।

रामो दाशरथी शूरो लक्ष्मणानुचरो बली। काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ।।22।।

वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः। जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः।।23।।

इत्येतानि जपन नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः। अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ।।24।।

रामं दुर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम। स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नरः ।।25।।

रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम।

राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शांतमूर्तिं वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम।।26।।

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रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे। रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ।।27।।

श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम। श्रीराम राम रणकर्कश राम राम। श्रीराम राम शरणं भव राम राम ।।28।।

श्रीराम चन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि श्रीराम चंद्रचरणौ वचसा गृणामि। श्रीराम चन्द्रचरणौ शिरसा नमामि श्रीराम चन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ।।29।।

माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः । सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुर्नान्यं जाने नैव जाने न जाने ।।30।।

दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मज। पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ।।31।।

लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथं। कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ।।32।।

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये ।।33।।

कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम। आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम ।।34।।

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ।।35।।

भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम्। तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ।।36।।

रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः।

रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोस्म्यहं रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धराः।।37।।

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।38।।

इस प्रकार राम रक्षा स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से लाभदायक है इसलिए घर की सुख समृद्धि के लिए इसका पाठ नियमित रूप से और पूरी श्रद्धानुसार करें। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

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