हिंदू धर्म में रक्षा बंधन के त्योहार का विशेष महत्त्व है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई में रक्षा का सूत्र बांधती है और भाई हमेशा बहन की रक्षा करने का वचन देता है। यूं कहा जाए कि भाई और बहन के असीम प्यार का ये त्योहार वास्तव में न सिर्फ बहन और भाई के लिए बल्कि सभी रिश्तों के लिए कुछ ख़ास है। रक्षा बंधन का त्योहार भारत के सभी प्रांतो में बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है। वैसे तो यह बहन-भाई के अटूट बंधन का दिवस है लेकिन अलग अलग प्रांतो में अलग तरीक़े से मनाया जाता है। 

रक्षाबंधन के त्योहार की परम्परा छह हज़ार साल पहले शुरू की गई थी। यह पर्व दक्षिण भारत में अवितम के रूप में मनाया जाता है। इस दिन दक्षिण में जनेऊ की पूजा की जाती है। गुजरात में इस दिन शिवलिंग की पूजा की जाती है। गुजरात में इसे कजरी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है, खेतों में गेहूं बिछा कर अच्छी फसल की कामना करते हैं। आज भी रक्षा बंधन को धूमधाम से मनाते हैं ताकि हमारी प्राचीन सभ्यता कहीं लुप्त न हो जाए और भाई बहन का स्नेह कहीं कमजोर ना पड़ जाए। आइए जानें साल 2021 में कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन का त्योहार, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्त्व। 

रक्षा बंधन की तिथि एवं शुभ मुहूर्त 

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सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। रक्षा बंधन का पर्व सावन मास का महत्वपूर्ण पर्व है। पंचांग के अनुसार इस साल रक्षाबंधन, 21 अगस्त 2021 शनिवार को शाम 6.10 बजे से आरंभ होगा, जो 22 अगस्त 2021 की शाम 05:01 बजे तक रहेगा। इस वजह से राखी बांधने के लिए 12 घंटे का मुहूर्त रहेगा।

  • रक्षाबंधन तिथि- रविवार 22 अगस्त 2021
  • पूर्णिमा तिथि -21 अगस्त शाम 3.45 बजे से शुरू,22 अगस्त शाम 5.58 बजे समापन।
  • शुभ मुहूर्त: सुबह 5.50 बजे से शाम 6.03 बजे तक।
  • राखी के लिए दोपहर का समय-1.44 बजे से 04.3 बजे तक 
  • अभिजीत मुहूर्त-दोपहर 12.04 बजे से 12.58 बजे तक।

भद्राकाल

इस तिथि पर भद्रा काल और राहुकाल का विशेष ध्यान रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल और राहुकाल में राखी नहीं बांधी जाती है क्योंकि इस काल में शुभ कार्य वर्जित होता है। इस साल भद्रा का साया राखी पर नहीं है। भद्रा काल 23 अगस्त, 2021 सुबह 05:34 से 06:12 तक होगा और 22 अगस्त को पूरे  दिन राखी बांधी जाएगी। 

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राखी बांधने के दिशा नियम

दिशा का मानव जीवन पर विशेष प्रभाव है इसलिए यदि राखी बंधवाते समय भाई अपना मुख पूर्व की तरफ़ रखते है तो उनके जीवन में अत्यधिक लाभ का संचार होता है। इसके साथ ही रक्षाबंधन में रंगों का बहुत महत्वपूर्ण संकेत होता है, इसलिए यदि आप राखी पर्व पर कुछ विशेष रंग धारण करें तो यह आपके जीवन के लिए लाभदायक होंगे जैसे -लाल, गुलाबी ,हरा, पीला और संतरी रंग पहनने इस दिन शुभ होंगे।

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क्या है रक्षाबंधन की ऐतिहासिक मान्यता

कहते हैं कि एक बार देवताओं और दानवों में बारह वर्ष तक भयानक युद्ध हुआ जिसमें देवता पराजित हुए। इंद्रदेव पराजित होकर अन्य देवताओं के साथ अमरावती चले गए। दैत्यराज ने जब तीनों लोकों पर कब्जा कर लिया तो उसने यज्ञों, वेदों, आहुतियों व मंत्रों पर सख्ती से पाबंदी लगा दी जिससे देवताओं की शक्ति क्षीण होने लगी। ऐसे में इंद्र ने गुरु बृहस्पति को, जो देवताओं के गुरु थे, बुलाया और उनके दानवों पर विजय पाने का उपाय पूछा। तब देवगुरु बृहस्पति जी ने उन्हें रक्षा विधान करने को कहा। ब्राह्मण शुक्ल पूर्णिमा के दिन इंद्राणी ने पूरे विधि-विधान पूर्वक मंत्रोच्चारण के साथ रक्षा सूत्र तैयार किया। अगले दिन इंद्रदेव ने गुरुदेव से रक्षा विधान बंधवाया तभी से यह रक्षा सूत्र का त्योहार प्रचलित है।

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रक्षा बंधन का महत्त्व 

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रक्षा बंधन का हिन्दुओं में विशेष महत्त्व है। इस दिन बहन का भाई को राखी बांधना उनके बीच में सौहार्द्र को बढ़ाता है। आपसी प्रेम और सौहार्द्र के साथ रिश्तों को निभाने की समझ भी भाई और बहन के बीच में जागृत होती है। इसके साथ यह त्योहार बच्चों में भी संस्कार जगाने के लिए एक अच्छा माध्यम है। 

उपर्युक्त सभी बातों को ध्यान में रखकर यदि इस दिन राखी बांधी जाएगी तो उसका विशेष लाभ प्राप्त होगा। 

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