आज एक महिला और पुरुष बराबर स्तर पर काम करते हैं। महिलाएं भी बाहर निकलती हैं और काम कर रही हैं। ऐसे में आपसी रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए घर के काम और जिम्मेदारियां किसी एक पर नहीं बल्कि दोनों पर बराबर हैं। हालांकि, आज भी घर के काम बराबरी से दोनों में बांटें नहीं जाते हैं। भारत में आज भी घरेलू कामों को निष्पक्ष रूप से बांटना कई जोड़ों के लिए एक चुनौती बना हुआ है।
मगर ऐसा बाकी देशों में शाय नहीं है। हाल ही में, स्वीडिश इंजीनियरिंग के कुछ छात्रों ने एक ऐसा ऐप बनाया है जो घरेलू कामों को व्यवस्थित करने में मदद करता है। इस एक खबर ने कई लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।
यह ऐप आधिकारिक तौर पर सितंबर की शुरुआत में लॉन्च किया गया था। इसमें एक फीचर ऐसा है जो आपको एलाओ करेगा कि अगर कोई फैमिली मेंबर घर का काम करता है, तो आप उसकी प्रशंसा कर सकते हैं। घर में कौन क्या करता है, यह बताकर यह प्लेटफॉर्म घरेलू कामों के लिए मौजूद लैंगिक अंतर को दूर करने में भी मदद कर सकता है।
इसके साथ ही सवाल खड़ा हुआ कि अगर इस तरह का ऐपा भारत में लागू किया जाए, तो क्या इससे कोई फर्क पड़ेगा? इसी मुद्दे की चर्चा हम इस लेख में विस्तार से कर रहे हैं, आइए जानें।
भारत में क्या कोई ऐसा ऐपा काम कर सकता है?
स्वीडिश ऐप एक डिजिटल टास्क मैनेजर के रूप में कार्य करता है, जो घरेलू कामों को असाइन करके, ट्रैक करके और संतुलित करके समान जिम्मेदारी को बढ़ावा देता है। यह काम विभाजन में किसी भी तरह की डिस्क्रिपेंसी को उजागर करने में मदद करता है। स्वीडन में, जहां शेयर्ड घरेलू जिम्मेदारियां व्यापक रूप से स्वीकार की जाती हैं, ऐप सामाजिक मानदंडों के साथ सहजता से जुड़ता है।
हालांकि, भारत में इस कॉन्सेप्ट को पेश करने के लिए इसके सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक संदर्भों की गहरी समझ की आवश्यकता है। भारत में घरेलू कामों का वितरण लंबे समय से विषम रहा है। नेशनल सैंपल सर्वे के अनुसार, भारतीय महिलाएं प्रतिदिन लगभग 5 घंटे अनपेड घरेलू कामों में बिताती हैं, जबकि पुरुष केवल 30 मिनट ही ऐसा करते हैं। यह असमानता सामाजिक अपेक्षाओं में गहराई से निहित है जो घर के कामों को महिला की जिम्मेदारी मानती है, भले ही उसकी प्रोफेशनल जिम्मेदारियां कुछ भी हों।
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पिछले कुछ वर्षों में आधुनिक भारत पश्चिमी दुनिया से काफी प्रभावित हुआ है। बाहर के काम से लेकर घर के काम तक दोनों बांट लेते हैं, लेकिन अभी इसमें धीमी प्रगति है। यह नया स्वीडिश ऐप यदि भारत में आता है, तो ये आज की जनेरेशन के लिए बड़ा वरदान बन सकता है क्योंकि यह कुछ ऐसा हो सकता है जिसकी उन्हें अपने बीच काम के समान विभाजन के लिए आवश्यकता होगी।
भारतीय समाज में अक्सर महिलाओं से अपेक्षा की जाती है कि वे घर के प्रबंधन को प्राथमिकता दें, भले ही वे घर के बाहर काम करती हों। घर के कामों को साझा करने वाला ऐप इस जड़ जमाई हुई मानसिकता को चुनौती देने में मदद कर सकता है। भारत में, घरेलू कामों को अक्सर कम आंका जाता है, उन्हें सांसारिक और प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों के अयोग्य माना जाता है।
आगे की राह
भारत में इस तरह के ऐप को पेश करना अपने आप में एक चुनौती है। लेकिन यह एक ऐसा कदम है जो उठाने लायक है। यह ऐप हरी जड़ें जमाए बैठी असमानताओं को दूर करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है। अगर इसे भारतीय संवेदनाओं के हिसाब से सोच-समझकर अपनाया जाए, तो यह कपल्स के घर के कामों के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
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भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहां बदलाव अक्सर शहरी इलाकों से शुरू होकर व्यापक समाज में फैल जाता है, यह ऐप एक शांत लेकिन शक्तिशाली क्रांति की शुरुआत कर सकता है। निष्पक्षता को बढ़ावा देकर और संवाद को बढ़ावा देकर, यह एक संतुलित और सामंजस्यपूर्ण घरेलू जीवन में योगदान दे सकता है।
अगर अपने रिश्ते को मजबूत बनाना है, तो हमें इस तरह के स्मार्ट फैसले पर भी विचार करना जरूरी है। इस बारे में आपका क्या कहना है, हमें कमेंट करके बताएं। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें। ऐसे ही लेख पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ।
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