इस बार शारदीय नवरात्र का आरंभ पितृपक्ष के समापन के अगले दिन यानी कि 7 अक्टूबर, मंगलवार से हो रहा है। इसी दिन नवरात्रि की प्रतिप्रदा तिथि होने की वजह से पूजन और कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि नवरात्रि के आरम्भ के तुरंत पहले पितृ पक्ष होता है इसलिए आप इस दौरान नयी चीन नहीं खरीद सकते हैं। लेकिन पितृ विसर्जन के तुरंत बाद यानी कि सर्वपितृ अमावस्या के दिन से ही नवरात्रि पूजन की तैयारी आरंभ हो जाती है और इस पूजन के लिए सभी सामग्रियां इकट्ठी की जाती हैं। ऐसा करने से नवरात्रि के पूरे 9 दिनों में माता के पूजन के लिए किसी तरह की कोई बाधा उत्पन्न नहीं होती है।

नवरात्रि में अलग-अलग पूजन सामग्री का अलग महत्त्व है और मान्यता है कि यदि पूजन सामग्री पूर्ण न हो तो व्रत और पूजन भी अधूरा माना जाता है। आइए विश्व के जाने माने ज्योतिर्विद पं रमेश भोजराज द्विवेदी जी से जानें नवरात्रि शुरू होने से पहले आपको किन सामग्रियों की आवश्यकता होगी। इस लिस्ट के अनुसार यदि आप नवरात्रि पूजन की तैयारी करेंगी तो आपको पूजा में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी और पूरे 9 दिन का नवरात्रि का पूजन भली-भांति संपन्न हो जाएगा। 

पूजा की मुख्य सामग्री 

mata ki tasveer

माता की तस्वीर या मूर्ति. लाल रंग की गोटेदार चुनरी, लाल रेशमी चूड़ियां, सिन्दूर, आम के पत्‍ते, लाल वस्त्र, लंबी बत्ती के लिए रुई या बत्ती, धूप बत्ती या अगरबत्ती, माचिस, चौकी, चौकी के लिए लाल कपड़ा, नारियल, दुर्गासप्‍तशती किताब, कलश, साफ चावल, कुमकुम, मौली, श्रृंगार का सामान, दीपक, घी/ तेल, फूल, फूलों की माला, लौंग, कपूर, बताशे,पान, सुपारी, इलायची, फल/मिठाई, कलावा,मेवे, हवन के लिए आम की लकड़ी,जौ, हवन कुंड। 

अखंड ज्योति के लिए आवश्यक सामग्री 

यदि आप 9 दिनों तक अखंड ज्योति को प्रज्ज्वलित रखना चाहते हैं तो इसके लिए आवश्यक सामग्रियों में से मुख्य है -

  • अखंड ज्योति का दीया
  • इसके अंदर इस्तेमाल होने वाली बत्ती
  • पूजा में इस्तेमाल होने वाला घी अथवा तिल का तेल 
  • माचिस 

कलश स्थापना के लिए सामग्री 

kalash sthapna

कलश स्थापना के लिए मुख्य रूप से पीतल, ताम्बे या मिट्टी का कलश, मिट्टी का पात्र , कलावा, आम के पत्ते, जौ , सिंदूर, नारियल, छोटी लाल चुनरी, जल, दीपक, तिल  का तेल  या घी, मिट्टी, बालू या रेत। कलश स्थापना के समय सबसे पहले मिट्टी के एक पात्र को जमीन में थोड़ी सी बालू डालकर रखें और इसमें मिट्टी डालकर जौ डालें। इस पात्र के बीचों बीच पानी भरकर कलश रखें। कलश के ऊपर आम के 5 या 7 पत्ते रखें और एक छोटी कटोरी ढककर उसके ऊपर चुनरी में नारियल लपेटकर रखें। कलश में कलावा बांधें और सिंदूर से स्वस्तिक बनाएं। 

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श्रृंगार का सामान

श्रृंगार के सामान में आप को ध्यान में रखने वाली बात यह है कि माता को पूरे सोलह श्रृंगार चढ़ाने का प्रचलन है। इसलिए पूरी सामग्री ध्यान से इकट्ठी करें। इन सामग्रियों में से मुख्य हैं मेहंदी, बिंदी, लाल चूड़ी, सिंदूर, लाल चुनरी, नेल पॉलिश, लिपस्टिक,बिछिया, दर्पण, कंघी, महावर, काजल, चोटी, पायल आदि। माता को श्रृंगार का सामान अर्पित करने के लिए सबसे पहले साफ़ चौकी में लाल या पीला कपड़ा बिछाकर माता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। उसके बाद माता को टीका लगाकर श्रृंगार का पूरा सामान अर्पित करें मान्यता के अनुसार नवरात्रि में माता रानी को श्रृंगार का सामान अर्पित करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।  

ध्यान रखें ये बातें 

ghee ka deeya

माता के पूजन में कलश के नीचे रखे पात्र में जौ बोना बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि जौ यदि हरे-भरे निकलते हैं तो घर में सुख समृद्धि आती है और यदि वह मुरझाए निकलते हैं तो यह भविष्य में होने वाले किसी अनिष्ट घटना का संकेत भी हो सकता है। इसके अलावा पूजन सामग्रियों में मुख्य रूप से बंधनवार होता है जिसे आप नवरात्रि के आरंभ में अपने मुख्य द्वार पर अथवा घर के मंदिर में सजा सकते हैं। जिससे माता के आगमन की खुशी का पता चलता है। कहा जाता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में घर में शुद्ध देसी घी का दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है यदि आप अखंड ज्योति प्रज्वलित कर रही हैं तो इसे आग्नेय कोण में प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है। 

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इस प्रकार इस लिस्ट को ध्यान में रखकर अगर आप नवरात्रि पूजन की तैयारी करेंगी तो ये आपके लिए काफी सुविधाजनक हो सकता है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

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