Shardiya Navratri 2025: शेर नहीं हाथी पर सवार हो आ रही हैं मां दुर्गा, जानें कैसे बदल सकती है भक्तों की किस्मत

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 22 सितंबर से हो रहा है। हर साल की तरह इस बार भी भक्तों की यही आशा है कि यह नवारात्रि उनको शुभ फल देगी। हालांकि, यह निर्भर करता है कि मां दुर्गा इस बार किस सवारी से भक्तों के मध्य पधार रही हैं। हमने इस विषय पर पंडित सौरभ त्रिपाठी से बात की। वह कहते हैं, "मां दुर्गा इस बार हाथी से पधार रही हैं।"
वैसे तो माता रानी का वाहन शेर है, मगर नवरात्रि के दौरान वह अलग-अलग वाहन पर सवार हो पधारती हैं। यह गणना देवी भागवत पुराण के आधार पर वार के हिसाब से बताई गई है। अलग-अलग वाहन से देवी के पधारने के फल भी अलग-अलग होते हैं। इस बार देवी हाथी से पधार रही हैं, इसके क्या फल देखने को मिलेंगे चलिए पंडित जी से विस्तार से जानते हैं।
Navratri में मां दुर्गा के हाथी पर आने से क्या होता है?
इस वर्ष मां दुर्गा हाथी पर सवार हो कर आ रही हैं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह बहत ही शुभ माना गया है। पंडित जी बताते हैं, " नवरात्रि सोमवार 22 सितंबर से शुरू हो रही है। जब भी नवरात्रि सोमवार से शुरू होती है, तब मां का आगमन हाथी पर सवार होकर होता है। हर दिन के अनुसार नवरात्रि में मां के आगमन की सवारी इसी तरह बदलती रहती है। इस बार मां का हाथी से आना बहुत ही शुभ होगा। "
- जब मां दुर्गा नवरात्रि में हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती हैं।
- मां दुर्गा का हाथी की सवारी करना वैभव ओर ऐश्वर्य का प्रतीक है। इसलिए माना जाता है कि यह घटना लोगों के जीवन में आर्थिक समृद्धि लेकर आती है।
- हाथी र सवार होकर मां का आना यह भी संकेत देता है कि किसी को भी अन्न की कमी नहीं होगी। किसानों के लिए यह खासतौर पर शुभ होती है।
- मां का हाथी पर सवार होकर आना यह भी संकेत देता है कि पूरे वर्ष अच्छी वर्षा होगी, जिससे खेती-बाड़ी का काम अच्छे से होगा और किसानों को धन की कमी नहीं होगी।
- Navratri 2025 में किस श्लोक का जाप करना होगा शुभ?
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मां दुर्गा इस बार हाथी से आ रही हैं, तो पंडित जी के अनुसार इस बार "शशि सूर्य गजारूढ़ा शनिभौमै तुरंगमे। गुरौ शुक्रेचा दोलायं बुधे नौकाप्रकीर्तिता।" का जाप करने से आपके जीवन में सुख-समृद्धि की वर्षा होगी। आप दिन में दो वक्त देवी जी की पूजा करें और फिर इस श्लोक का जाप करें।
नवरात्र के अन्य वाहन और उनका महत्व
- सोमवार या रविवार - हाथी पर आगमन (सुख-समृद्धि और अच्छी बारिश)
- शनिवार या मंगलवार - घोड़े पर आगमन (युद्ध और राजनीतिक उथल-पुथल
- गुरुवार या शुक्रवार - पालकी पर आगमन (सुख, शांति और समृद्धि)
- बुधवार - नाव पर आगमन (सभी मनोकामनाओं की पूर्ति)
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Navratri में मां दुर्गा के प्रस्थान की सवारी
देवी का प्रस्थान विजयदशमी के दिन होता है। ऐसे में यदि विजयादशमी रविवार या सोमवार को हो तो मां दुर्गा भैसे की सवारी करती हैं। यह बहुत ही खराब माना जाता है, इससे जीवन में शोक आता है। शनिवार और मंगलवार को विजयादशमी हो तो मां का वाहन मुर्गा होता है। तब भक्त तबाही का अनुभव करते हैं , यदि बुध और शुक्रवार को दशहरा होता है, तो मां का प्रस्थान हाथी पर होता है, जो कि शुभ माना गया है। वहीं गुरूवार को विजयादशमी हो तो माता रानी मनुष्य की सवारी करती हैं, बहुत ज्यादा शुभ होता है और इस बार दशहरा 2 अक्टूबर का है और इस दिन गुरुवार ही है। इसलिए माता के आगमन और प्रस्थान दोनों की ही सवारी भक्तों के लिए इस बार बहुत ज्यादा शुभ है।
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