महिलाएं प्रतिभाशाली होती हैं और वे अलग-अलग तरह की जिम्मेदारियां निभाने में कुशल होती हैं। महिलाएं घर अच्छी तरह से मैनेज करती हैं और ऑफिस की जिम्मेदारियों को भी बखूबी हैंडल कर लेती हैं। लेकिन महिलाओं का जीवन काफी मुश्किल होता है और उन्हें कई तरह के चैलेंजेस का सामना करना पड़ता है। अगर महिलाएं अपनी बेटियों को शुरू से ही मुश्किलों से जूझने और कामयाब होने के लिए इंस्पायर करें तो वे उनका जीवन बेहतर बना सकती हैं। लेकिन हमारे समाज में स्थितियां इसके उलट ही नजर आती हैं। अक्सर पेरेंट्स अपनी बेटियों की सुरक्षा और उनके भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं। बेटियों को सेफ रखने के लिए बहुत सी मदर्स उन्हें अकेला छोड़ने से डरती हैं, उन्हें जोखिम से भरे किसी काम को नहीं करने देना चाहती। और उनका ये डर अस्वाभाविक भी नहीं है। देश में बच्चों के साथ होने वाले अपराध जैसे कि अपहरण, यौन शोषण, बाल मजदूरी जैसी चीजों के चलते महिलाएं अपनी बेटियों को महफूज रखना चाहती हैं। अगर आप चाहती हैं कि आने वाले समय में आपकी बेटी कॉन्फिडेंट और स्ट्रॉन्ग बने तो उसके लिए पहले आपको कॉन्फिडेंट होने की जरूरत है। अगर आप अपनी बेटी को शुरू से ही लाइफ स्किल्स सिखाएं तो वह अपने सामने आने वाली मुश्किलों को खुद ही बेहतर तरीके से हैंडल करना सीख जाएगी- 

फाइनेंशियल स्किल्स

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बेटियों को बेसिक मैथ्स सीखनी बहुत जरूरी है। 9वीं-10वीं की पढ़ाई में बेटियां अक्सर टैक्स से जुड़े सवाल सॉल्व करती हैं। रियल लाइफ में भी उन्हें घर का बजट तैयार करने, कमाई के हिसाब से अपना खर्च मैनेज करने आदि में सक्षम बनाने के लिए शुरू से तैयारी करें। बेटी को उसकी जरूरत के हिसाब से पैसे दें और अपना खर्च भी मैनेज करने को कहें। साथ ही बेटी को यह भी सिखाएं कि पैसों का इन्वेस्टमेंट कहां-कहां किया जा सकता है, जिससे अच्छे रिटर्न मिल सकते हैं। अगर आपकी बेटी ने आपसे फाइनेंशियल एजुकेशन ले ली, तो आपको उसके फ्यूचर को सिक्योर करने के लिए चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, वह खुद ही अपनी यंग एज से जुड़ी जरूरतों और रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग कर लेगी।  

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घर से जुड़ी स्किल्स में कुशल होना जरूरी

बेटियों के लिए यह जरूरी नहीं कि वे घर से जुड़े हर काम में परफेक्ट हों, लेकिन इतना जरूरी है कि उन्हें अपने लिए खाना बनाना, खाने को सुरक्षित तरीके से रखने जैसी चीजें आती हों। अगर मां बेटी को यह सिखाती है कि बैलेंस्ड डाइट के लिए कौन-कौन सी चीजें आहार में शामिल होनी चाहिए तो वह हमेशा ही अपना और घर-परिवार की हेल्थ का ध्यान रखेगी। इसके साथ ही बेटियों को घर की सफाई, अपने कपड़े धोना जैसी चीजें सिखाना भी अहम है। भले ही ये काम बोरिंग और रूटीन वाले लगें, लेकिन बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू से ही उन्हें अपने से जुड़े ये छोटे-छोटे काम करने दें।  

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घर और कार से जुड़ी मेंटेनेंस स्किल्स सिखाएं

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चाहें घर किराए का हो या फिर आप खुद उसकी मालकिन हों, घर में अक्सर ही समस्याएं आती रहती हैं, कभी नाली जाम हो जाती है तो कभी घर में कहीं सीमेंट उखड़ जाती है, कभी व्हाइट वॉश की जरूरत होती है। इन सभी कामों के लिए अक्सर बाहर से प्लंबर या मैकेनिक बुलवाएं जाते हैं। अगर मां बेटियों को इस तरह के काम करना सिखाएं तो वे निश्चित रूप से बहुत कुछ सीख सकती हैं। इससे पैसों की बचत के साथ-साथ बेटियों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है और दूसरों पर उनकी निर्भरता कम हो जाती है। अगर आप कार ड्राइव करती हैं तो बेटी को उससे जुड़ी चीजों के बारे में भी बताएं। मसलन अगर बैटरी खत्म हो जाए तो क्या किया जाए, अगर रोड साइड टायर पंक्चर हो जाए तो कैसे उसे बदला जाए। अगर आपको रोडसाइज कार का टायर बदलने में खुद ही डर लगता है तो आप बेटी को कम से कम इस बात के लिए जरूर ट्रेन करें कि वह कैसे टायर का एयर प्रेशर चेक कर सकती है या रोड पर सर्विसिंग करने वाले मैकेनिक्स से संपर्क कर सकती है।  

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अपनी सुरक्षा है सबसे अहम

बेटियों की सुरक्षा को लेकर महिलाएं जितनी फिक्रमंद होती हैं, उसे दूर करने का एक ही तरीका है और वह बेटियों को अपनी सेफ्टी के लिए स्वयं एलर्ट रहना सिखाना। अगर कभी चोट लग जाए तो फर्स्ट एड कैसे दी जाए, यह बेटी को जरूर पता होना चाहिए। बचपन से ही बेटी को तैरना सिखाएं, क्योंकि किसी भी तरह की इमरजेंसी वाली स्थिति में इसकी जरूरत पड़ सकती है। बेटी को कार चलाना भी जरूर सिखाएं। भले ही आपके पास कार ना हो, लेकिन अगर बेटी को ड्राइविंग आती है, तो वह अपनी सेफ्टी के लिए खुद कदम उठा सकती है। मसलन अगर परिवार का कोई सदस्य गाड़ी चला रहा है और उसे मेडिकल इमरजेंसी या उन्होंने बहुत ज्यादा ड्रिंक कर ली है तो हो वह उस दौरान ड्राइव कर सकती है। इसके साथ ही बाहर निकलते हुए बेटियों का एलर्ट रहना उन्हें किसी भी खतरे में पड़ने से बचा सकता है। बेटियों को इस बारे में डीटेल में बताएं और उन्हें बताएं कि किस तरह की सिचुएशन हो सकती हैं और उन्हें उसे कैसे हैंडल करना है। अगर कोई व्यक्ति उनका पीछा करने लगे तो उन्हें क्या करना चाहिए। अगर कोई उनके साथ बदतमीजी कर रहा है या उनके करीब आने की कोशिश कर रहा है तो कैसे उन्हें अपनी सेफ्टी बनाए रखते हुए कदम उठाना चाहिए। बेटियों को इस तरह की ट्रेनिंग देकर ही उन्हें किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए सही तरीके से तैयार किया जा सकता है।  

लक्ष्य निर्धारित करना सिखाएं

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चाहें जिंदगी हो या फिर प्रोफेशनल लाइफ, कामयाब होने के लिए लक्ष्य बनाना बहुत जरूरी है। बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें गाइड करने के साथ पर्याप्त स्पेस भी दें। उन्हें सपने देखने दें और उनसे पूछें कि वे भविष्य में क्या करना चाहती हैं। बेटी से उनकी पसंद पूछने के साथ ही उसे प्रायोरिटीज तय करना और उसके साथ आगे बढ़ना सिखाएं। इससे बेटियों को अपने जीवन की दिशा तय करने में आप सक्षम बना सकती हैं।  

टाइम मैनेजमेंट स्किल्स की ट्रेनिंग दें

महिलाओं को घर में एक साथ कई रोल निभाने पड़ते हैं-कभी बेटी का तो कभी मां का, कभी दोस्त का तो कभी बहन का। इसके साथ ही उन्हें ऑफिस या बिजनेस से जुड़ी जिम्मेदारियां भी हैंडल करनी होती हैं। इसके लिए महिलाओं को मल्टी टास्किंग करनी पड़ती है। साथ ही इसके लिए इस बात पर भी ध्यान देना होता है कि किस समय किस चीज को प्रायोरिटी देने की जरूरत है, अन्यथा कई तरह की मुश्किलें खड़ी हो सकती है। साथ ही आज के समय में सोशल मीडिया के कारण भी व्यवस्तता बढ़ गई है। बेटियों को शुरू से ही इस बारे में सही तरीके से गाइड किया जाना चाहिए, ताकि वे टाइम मैनेजमेंट के मामले में हमेशा अव्वल रहें। 

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