बच्चा होने के बाद आमतौर पर महिलाओं को हमेशा यह कहते हुए देखा जाता है कि उनके पास खुद के लिए समय ही नहीं है, तो कुछ नया और अनोखा कैसे करें। ऐसी महिलाओं के बीच मॉम ब्लॉगर एवं इंफ्लूएंसर हरप्रीत सूरी एक मिसाल हैं। 

हरप्रीत सूरी एक मां, बेटी, बहू और पत्‍नी होने के साथ-साथ सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर हैं, जो महिलाओं को मदरहुड को एक नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करती हैं। डॉटर्स डे के अवसर पर हरजिंदगी से एक्सक्लूसिव बातचीत में हरप्रीत ने अपनी बेटी और सास के साथ खूबसूरत बॉन्डिंग और इंस्पायरिंग जर्नी के बारे में बताया- 

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मम्‍मी से मॉम ब्‍लॉगर बनने की जर्नी 

आपने यह कहावत कई बार सुनी होगी 'जहां चाह वहीं राह'। हरप्रीत ने इस बात का सार्थक रूप दिया है। जब हमने उनसे पूछा कि वह मम्मी से मॉम ब्‍लॉगर कैसे बन गई तो उन्होंने कहा, 'मेरे अंदर हमेशा से ही कुछ अलग करने की चाहत थी। तस्‍वीरें खींचना और खिंचवाना दोनों ही मुझे बहुत पसंद है। 10 साल पहले जब मेरी पहली प्रेग्‍नेंसी थी तब प्रेग्‍नेंसी शूट का चलन नहीं था, मगर मैंने उस समय पर अपना प्रेग्‍नेंसी शूट कराया था। मुझे हमेशा इस बात पर आत्‍मविश्‍वास रहा है कि, जो मैं कर रही हूं वह आज के जमाने के हिसाब से गलत नहीं है, मगर मुझे कोई फॉलो करेगा इस पर मुझे विश्वास नहीं था।'

देखा जाए तो वाकई कुछ अलग करने के लिए आत्‍मविश्‍वास सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। बड़ी बात तो यह है कि मां बनने के बाद महिलाओं में यह आत्‍मविश्‍वास और भी बढ़ जाता है। हरप्रीत के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वह खुद ही कहती हैं, 'हर मां यही सोचती है कि वह परफेक्ट नहीं है, मगर मेरा मानना यह है कि परफेक्‍ट तो कोई भी नहीं होता है, इसलिए खुद को अपराधी समझने की जगह नई चीजों को सीखना चाहिए। जब मैं मां बनी तो मुझे लगा जैसे मेरे अंदर कोई सुपर पावर आ गई है। मैं पहले से ज्यादा खुद को आजाद और खुश महसूस करने लगी हूं।'

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इतना ही नहीं, अपनी जर्नी के बारे में हरप्रीत आगे बताती हैं, 'जब मेरा बेटा हुआ था तब मैं पब्लिक रिलेशन के क्षेत्र से जुड़ी थी। मुझे अपनी नौकरी से बहुत प्‍यार था। मगर जब मेरी बेटी हुई तब मैंने जॉब छोड़ दी क्योंकि मैं अपनी बेटी के साथ उसके बचपन को एंज्‍वॉय करना चाहती थी।'

बेटी के बचपन को एंज्‍वॉय करने के साथ-साथ हरप्रीत कुछ ऐसा शुरू करना चाहती थीं, जिसे देख कर हर मां प्रेरित हो और अपने मदरहुड को मॉडर्न स्टाइल में एंज्‍वॉय करे। इस बारे में हरप्रीत कहती हैं, 'बेटी मेरे लिए बहुत स्पेशल है। उसके होने पर ही मैंने अपने इंफ्लूएंसर होने की जर्नी शुरू की थी।'

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क्‍या कहता है हरप्रीत का पेज 

'momwearsprada' के नाम से हरप्रीत का इंस्टाग्राम पेज है। इस पेज के लगभग 116K फॉलोअर्स हैं। अपने पेज के माध्‍यम से हरप्रीत महिलाओं को अपनी हेल्थ को सुधारने, परिवार के साथ रिश्तों को मजबूत बनाने, खुद को मॉडर्न लुक देने और बच्‍चों के साथ बेस्‍ट टाइम बिताने की सलाह देती हैं। इतना ही नहीं, हरप्रीत पति और अपने सास-ससुर के साथ रिश्तों को बेहतर बनाने की बातें अपने पेज पर करती हैं, जो काफी मोटीवेटिंग होती हैं। 

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इस जर्नी में कौन था सबसे बड़ा सहारा 

सास-बहू के लड़ाई-झगड़ों के बारे में आपने कई बार सुना होगा, मगर हरप्रीत और उनकी सास का रिश्ता बेमिसाल है। इस बारे में हरप्रीत खुद ही बताती हैं, 'मेरी लव मैरिज हुई थी और शादी के लिए मैंने एक ही शर्त अपने पति के सामने रखी थी कि अगर उनके पेरेंट्स मुझे खुशी-खुशी अपनाने के लिए तैयार हो जाएंगे, तो ही मैं शादी करुंगी। दरअसल, मैं अपने सास-ससुर को अपने माता-पिता की तरह ही मानती हूं और बेस्‍ट बात तो यह है कि मुझे उनसे भी बहुत प्‍यार मिला है। सबसे ज्यादा सपोर्टिव तो मेरी सास हैं। आज मैं जो हूं, उनके सपोर्ट से ही हूं। बेटे के जन्म के वक्त जहां सब लोग मुझे काम न करने की सलाह देते थे, वहीं मेरी सास ने मुझसे कहा कि तुम वो करो, जो तुम्हे पसंद है और बच्‍चे को मैं संभाल लूंगी।' जाहिर है, ऐसी सास मिलने का सपना हर लड़की देखती है, मगर इसके लिए बहुत जरूरी है कि आप भी बहू नहीं बेटी बने। हरप्रीत ने भी ऐसा ही किया था। वह बताती हैं, 'शादी के वक्त ससुराल वालों ने यही बात रखी थी कि मुझे कोई काम नहीं करना है। मैंने भी उस वक्त उनकी बात मानी। मगर एक दिन मेरे ससुर जी मेरे पास आए और उन्होंने कहा कि तुम बहुत प्रतिभाशाली हो घर पर बैठ कर क्यों अपनी प्रतिभा को दबा रही हो। तब मुझे इस बात का एहसास हुआ कि मैंने सही डिसीजन लिया था।'

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बेटी को कैसे दे रही है परवरिश 

वैसे तो जमाना बहुत एडवांस हो गया है, मगर इसके साथ ही बहुत से नए बदलाव भी हुए हैं, जिनमें से कुछ अच्छे हैं तो कुछ बहुत बुरे हैं। इन सबके साथ बच्‍चों की परवरिश करना माता-पिता के लिए एक चुनौती है। खासतौर पर बेटियों को सही और गलत की समझ देना आज के समय में उतना आसान नहीं रहा। ऐसे में हरप्रीत कहती हैं, 'मेरे माता-पिता ने मुझे पूरी आजादी दी थी। मेरे बच्‍चों को भी मैंने पूरी आजादी दी है। वह गलती करते हैं, मगर गलती करेंगे तब ही तो सही और गलत का फर्क उन्हें समझ में आएगा।'

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आखिर में हरप्रीत यही कहती हैं, 'मैं सबसे ज्‍यादा खुद से प्‍यार करती हूं, फिर आपने पति और फिर अपने बच्‍चों से। मुझे लगता है हर महिलाओं को खुद से सबसे ज्‍यादा प्‍यार करना चाहिए।' 


उम्‍मीद है कि आपको हरप्रीत सूरी की यह इंस्‍पायरिंग स्‍टोरी पसंद आई होगी। इसी तरह और भी आर्टिक्‍लस पढ़ने के लिए आप हरजिंदगी से जुड़ी रहें।