महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने हाल ही में बॉलीवुड के 24 प्रोड्यूसर को लेटर लिखकर यौन उत्पीड़न ऐक्ट 2013 का पालन करने को कहा है। आपको मालूम ही है कि पिछले कुछ महीनों में हॉलीवुड प्रोड्यूसर और डायरेक्टर Harvey Weinstein के खिलाफ बहुत सी एक्ट्रेसेस ने शिकायत की थी। Harvey Weinstein स्कैंडल को देखते हुए ही मेनका गांधी ने इन प्रोड्यूसर्स को लेटर लिखा है। 

मेनका गांधी ने लीडिंग प्रोडक्शन हाउसेस को लेटर लिखकर याद दिलाया है कि वे इंडियन लॉ के अंदर आने वाले सभी स्टाफ को “सेफ, सेक्युर और सम्मिलित वर्क इंवायरमेंट” देने के लिए जिम्मेदार हैं। पत्र में मेनका गांधी ने साफ लिखा है कि हर तरह के कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न ऐक्ट 2013 के सभी नियमों का पालन किया जाना चाहिए। इसमें लोगों को छूना, लोगों से काम के लिए संबंध बनाने के लिए कहना, किसी भी तरह की सेक्सुअल टिप्पणी करना, किसी भी तरह का पोर्न फिल्म दिखाना और किसी भी तरह के आपत्तिजनक शब्द कहना शामिल हैं।

होनी चाहिए शिकायत कमेटी

साथ में लेटर में शिकायत कमेटी बनाने की भी सलाह दी गई है। लेटर में लिखा गया है कि “प्रोडक्शन हाउस में कम्पलेन करने के लिए एक कमेटी होनी चाहिए जहां सभी लोग कम्पलेन कर सकें। सेक्सुअल हैरसमेंट से निपटने की ऐसी योजना होनी चाहिए।” सरकार ने यह फैसला मीटू मूवमेंट के बाद लिया है।

meneka gandhi wrote letter to producer inside

शाहरुख खान और एकता कपूर भी शामिल

महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों से पता चला है कि मेनका गांधी द्वारा साइन किए गए लेटर सभी प्रोडक्शन हाउसेस को भेजे गए हैं जिसमें शाहरुख खान, एकता कपूर और अनुराग कश्यप का नाम भी शामिल हैं। इन प्रोड्यूसर के अलावा आदित्य चोपड़ा, करन जौहर, विनोद चोपड़ा, महेश भट्ट, सूरज बड़जात्या, फरहान अख्तर, अनिल अंबानी, आमिर खान, साजिद नाडियावाल, संजय लीला भंसाली और सुभाष घई को भी लेटर भेजे गए हैं। 

‘She-box’ पर की गई शिकायत 

गौरतलब है कि इस साल नवंबर की शुरुआत में मेनका गांधी ने आनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली शुरू की थी जिसका नाम यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रानिक बाक्स ‘She-box’ रखा गया है। यह एक ऑनलाइन Complaint Management System है जिसके तहत वर्किंग प्लेज़ पर किये गए यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करवाई जा सकेगी। मीटू मूवमेंट के बाद महिला सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों में ये मंत्रालय द्वारा लिया गया अब तक का सबसे बड़ा कदम है।  

यौन उत्पीड़न ऐक्ट 2013

वैसे तो महिलाओं की सुरक्षा के लिए आईपीसी में बहुत सारे कानून हैं। लेकिन इनमें सबसे प्रमुख हैं यौन उत्पीड़न ऐक्ट 2013 है। इसमें वर्कप्लेज़ पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन शोषण के बारे में बताया गया है और शिकायत निवारण तंत्र की व्यवस्था होने के बारे में कहा गया है। यह अधिनियम, महिलाओं के समानता के मौलिक अधिकारों की पुष्टि करता है। भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 19(1)(छ) तहत प्रदान किए गए नियम के अनुसार, कार्य स्‍थल का वातावरण पूरी तरह सुरक्षित और यौन शोषणरहित होना भी शामिल है।

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