हिंदु धर्म को मानने वालों के महाशिवरात्रि बहुत बड़ा पर्व माना जाता है। इस दिन का महत्‍व पूरे भारत में हैं। उत्‍तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक में इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूरे दिन पूजा की जाती है। वैसे तो हर बड़े पर्व की तरह इस दिन भी भक्‍त लोग सुबह से ही भगवान शिव की पूजा करने लगते हैं। मगर, उज्‍जैन के महंत पंडित मनीष शर्मा की माने तो इस दिन रात को की गई पुजा का अलग ही महत्‍व है। हिंदू धर्म में मनाएंं जाने वाले सारे पर्वों में यह एकलौता ऐसा पर्व है जिसमें पूजा सुबह की जगह रात में की जाती है।

ऐसा कहा जाता है कि महाशिवरात्री पर दिन के चारों पहर पूजा की जानी चाहिए मगर, सुबह और दोपहर की पूजा से ज्‍यादा इस दिन अगर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा रात में की जाए और सारी रात जागरण किया जाए तो देवी-देवता जल्‍दी खुश होते हैं। खासतौर पर जो भक्‍त इस दिन व्रत रखते हैंं, उन्‍हें  रात में सोना नहीं चाहिए और प्रदोष काल यानी सूर्यास्‍त होने के बाद ही पूजा करनी चाहिए। चलिए पंडित मनीष शर्मा से जानते हैं कि इस दिन भगवान शिव और पर्वति जी की पूजा कैसे करनी चाहिए। 

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Mahashivratri lord shiva mid night Pooja significance

महाशिवरात्रि की पूजा विधि

महाशिवरात्रि पर जो भक्‍त व्रत रखते हैं उन्‍हें पूरे दिन शिव मंत्र (ऊं नम: शिवाय) का जाप करते रहना चाहिए। इसके साथ ही आप चाहें तो दिन में फलाहार कर सकते हैं। अगर आप पूरे दिन केवल पानी पकर व्रत रखना चाहें तो आप वह भी कर सकते हैं। महाशिवरात्रि पर रात की पूजा का ज्‍यादा महत्‍व है इसलिए शाम को स्‍नान करके उत्‍तर दिशा में मुंह करके बैठे और पूजा संकल्‍प करें। 

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कैसे लें संकल्‍प 

संकल्‍प लेने के लिए सबसे पहले मंत्र का जाप करें, ‘ममाखिलपापक्षयपूर्वकसलाभीष्टसिद्धये शिवप्रीत्यर्थं च शिवपूजनमहं करिष्ये’ इसके बाद पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराकर जल से अभिषेक करें । भगवान शिव पर बेल पत्र, फूल, चंदन, धतूरा आदि चढ़ाएं। इसके साथ ही भगवान शिव को भांग का भोग लगाएं। 

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अगले दिन सुबह करें पूजा 

इस बार महाशिवरात्रि 21 फरवरी को है   है और इस दिन शुक्रवार है। मगर महाशिवरात्रि इसी दिन खत्‍म नहीं हो रही। 

बल्कि रात भर जागरण करने के बाद जब आप अगले दिन सुबह भगवान शिव की पूजा करेंगे तब ही आपकी पूजा पूरी होगी। व्रत करने वाले भक्‍तों का व्रत भी अगले दिन मंगलवार 22 फरवरी को ही खुलेगा।