आज हम दीपिका पादुकोण को उनकी फिल्म 'छपाक' के लिए बधाई दे रहे हैं। यकीनन एक एसिड अटैक सर्वाइवर की भूमिका निभाना बहुत मुश्किल है और एक ऐसी लड़की जो काफी सुंदर है अगर वो अपने चेहरे को बिगाड़ ले तो कैसी फीलिंग आती है ये तो हम दीपिका के एक्सप्रेशन से ही देख सकते हैं। फिल्म छपाक का ट्रेलर अपने साथ कई सवाल खड़े कर गया है। पहला ये कि क्या महिलाएं इस दंश के बाद खुद को आसानी से खड़ा कर पाती हैं और दूसरा से कि इस फिल्म की रियल लाइफ हीरो कौन हैं। यकीनन फिल्म में तो दीपिका का करिदार काफी मुश्किल है, लेकिन रियल लाइफ हीरो यानी लक्ष्मी अग्रवाल की जिंदगी उस किरदार से भी ज्यादा मुश्किल रही है।  

लक्ष्मी अग्रवाल की जिंदगी 2005 से ही बदल गई। वो लड़की जो हमेशा चहकती रहती थी, गुनगुनाती रहती थी और अपने सुहाने भविष्य के सपने देखती थी उसपर एसिड फेंक दिया गया। एसिड फेंकने वाला इंसान भी 32 साल का था। उस समय लक्ष्मी अग्रवाल 15 साल की थीं। लक्ष्मी अपने परिवार के लिए कुछ करना चाहती थीं। वो अपनी जिंदगी को एक मोड़ देना चाहती थीं। पर उनके सपनों को एक सिरफिरे आशिक ने तोड़ा।  

सिरफिरे आशिक ने फेंका था लक्ष्मी के चेहरे पर एसिड-  

लक्ष्मी सिर्फ 15 साल की थीं जब एक 32 साल के इंसान को उनसे प्यार हो गया। लक्ष्मी उसे अटैक से पहले से जानती थीं। उस हैवान की बहन से लक्ष्मी की दोस्ती भी थी। लक्ष्मी के भाई को उसने फोन भी दिलवाया था। यही नहीं लक्ष्मी तो उस हैवान को भईया कहकर पुकारती थीं। पर उसके दिल में तो कुछ और ही था। 

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उस आदमी ने लक्ष्मी को शादी के लिए प्रपोज किया और लक्ष्मी ने मना किया। बार-बार मना किया। अटैक से 10 महीने पहले वो आदमी लक्ष्मी का पीछा करने लगा। उसे आते-जाते थप्पड़ मार देता।  

लक्ष्मी कहती हैं कि वो इस सबके बारे में अपने माता-पिता को नहीं बता पाईं क्योंकि वो डर गई थीं। समाज में लड़कियों को बोझ समझा जाता है और इसलिए उन्हें लगा कि अगर वो ये सब कुछ बताएंगी तो उनकी पढ़ाई-लिखाई बंद हो जाएगी।  

हमेशा से सिंगर बनना चाहती थीं लक्ष्मी- 

लक्ष्मी की इच्छा हमेशा से सिंगर बनने की थी। लक्ष्मी का करियर उनके माता-पिता को पसंद नहीं था, लेकिन फिर भी उन्होंने बेटी को आगे सिंगिंग क्लास के लिए पैसा कमाने की इजाजत दे दी। लक्ष्मी ने एक बुक स्टोर पर काम शुरू किया। लक्ष्मी के पास 19 अप्रैल को उसी इंसान का मैसेज आया कि वो उनसे प्यार करता है और शादी करने की चाहत है। लक्ष्मी ने कोई जवाब नहीं दिया। लक्ष्मी के पास फिर से मैसेज आया कि उसे अभी जवाब चाहिए। लक्ष्मी ने कोई जवाब नहीं दिया।  

21 अप्रैल को फिर से लक्ष्मी के पास कॉल आया और उस आदमी ने कहा, 'लक्ष्मी तुम ऐसा कुछ करना चाहती हो न जिससे तुम्हारे माता-पिता को गर्व हो।' लक्ष्मी ने कहा हां, फिर उस आदमी ने कहा 'चलो ठीक है' और फोन कट गया। 

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22 अप्रैल 2005 का वो दिन... 

22 अप्रैल 2005 को हमेशा की तरह अपने काम पर जा रही थीं। वो सुबह 10.45 पर बस स्टॉप की तरफ जा रही थीं। तभी उन्होंने उस आदमी को, उसके छोटे भाई को और छोटे भाई की गर्लफ्रेंड को देखा। उसके हाथ में बियर बॉटल और एक ग्लास था। वो बस स्टॉप से कुछ ही दूरी पर थीं कि उन लड़कों के साथ आई लड़की ने उन्हें जमीन पर गिरा दिया और फिर उनके चेहरे पर एसिड डाल दिया। लक्ष्मी को अटैक के बाद समझ आया कि उस बॉटल में एसिड था। वो तुरंत ही बेहोश हो गईं।  

हमें एक छोटा सा जख्म लग जाता है या फिर कोई सीजनल बीमारी हो जाती है तो कितनी तकलीफ होती है तो जरा सोचिए लक्ष्मी का हाल क्या हुआ होगा। लक्ष्मी ने अपना होश खो दिया और उन्हें लगा कि ये सब कुछ उनके सपने में हो रहा है। जब थोड़ा होश आया तो किसी ने उनके चेहरे पर पानी डाला। भीड़ उन्हें देखने के लिए इकट्ठा हो गई थी, लेकिन उनमें से किसी ने भी मदद नहीं की। लक्ष्मी को अस्पताल पहुंचाया गया और उनपर 20 बाल्टी पानी डाला गया।  

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लक्ष्मी को याद है कि उनकी त्वचा पिघल रही थी। डॉक्टरों को लग रहा था कि वो बचेंगी नहीं, लेकिन वो बच गईं।  

पहली सर्जरी के बाद उन्हें लगा कि वो और सुंदर हो जाएंगी.. 

लक्ष्मी ने कुछ समय पहले FICCI Ladies Organisation जयपुर द्वारा आयोजित एक फेस्ट में बोला था कि वो 2005 के उस दिन की हर याद को अपने जहन में बसाए हुए हैं। उस दिन ने लक्ष्मी को बदल दिया। उस दिन के बाद से लक्ष्मी की जुबान पर एक ही गाना था, 'नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा'.. 

इसी इवेंट में लक्ष्मी ने बताया कि, 'मेरी नाक के पास इससे पहले एक दाग हुआ करता था। मैंने डॉक्टर से उस दाग को हटाने को कहा। मैंने पहली दो सर्जरी के बाद सोचा था कि मैं पहले से भी ज्यादा खूबसूरत दिखूंगी। पर जब मैंने अपना चेहरा पहली बार देखा तो मैं सहम गई और मैं रोने लगी। मेरे मन में सुसाइड का भी ख्याल आया।'

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समाज ने कहा मार दो...

लक्ष्मी ने अपनी इसी याद के बारे में बताया कि,  'समाज वाले, आस-पड़ोस वाले कहते थे कि ये लड़की है और इसे मार देना चाहिए। यही नहीं आस-पड़ोस वाले ये भी कहते थे कि लड़की है इसकी शादी कैसे होगी। शरीर के किसी और हिस्से पर एसिड डाल देता। चेहरे पर ही क्यों डाला। इसे इंजेक्शन देकर मार डालो।' हमारे समाज में लड़की की शादी को एक ऐसा बोझ अभी भी माना जाता है कि उसकी पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा उसके दहेज के बारे में सोचा जाता है। 

'एक-एक कर सारे सपने सच हो रहे हैं'..

Herzindagi से हुई बातचीत में लक्ष्मी ने कहा कि, 'देखिए एक-एक करके सपने सच हो रहे हैं बल्कि बेहतर हो रहे हैं। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं ऐसे रनवे फैशन वीक में पार्टिसिपेट करूंगी, या कभी लाइफ में फिल्म बनेगी या कभी लाइफ में अवॉर्ड मिलेंगे जो कभी स्कूल में भी नहीं मिले। तो इतने बड़े सपने नहीं थे मेरे।'

हिम्मत जुटाकर लड़ा केस-

लक्ष्मी ने 2006 में एक PIL डाली जो पब्लिकली एसिड बिकने के खिलाफ थी। लक्ष्मी ने सुप्रीम कोर्ट में ये PIL डाली थी। 2013 में इसका फैसला आया। इतने सालों की लंबी लड़ाई ने लक्ष्मी को बहुत हिम्मती बना दिया। उनके पास उनके पिता का सपोर्ट था। कोर्ट का फैसला आया कि सिर्फ लाइसेंस वाली दुकानों पर ही एसिड बिकेगा और साथ ही साथ एसिड बिकने से पहले दुकानदारों को खरीददार का फोटो आइडेंटिटि कार्ड और ऐड्रेस लेना होगा ताकि उन्हें ट्रेस किया जा सके।  

इतनी लड़ाई के बाद अभी भी एसिड बिक रहे हैं। 

कोर्ट में जब लक्ष्मी और उनका हमलावर सामने आए तो ये हुआ...

लक्ष्मी ने Tedx के एक वीडियो में बताया था कि उनका अटैकर अरेस्ट हुआ और बाहर निकल कर सबसे पहले उसने शादी की। इसके अलावा, जब उसके खिलाफ केस लड़ा गया तो उसे 10 साल की सजा मिली थी। जब कोर्ट में वो और उनका अटैकर सामने आया तो लक्ष्मी का कहना था कि उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। उस समय वो जज को कह रहा था कि वो अभी भी लक्ष्मी से शादी करने को तैयार है। 

लक्ष्मी ने कहा कि इस इंसान ने उनका चेहरा बदला है लेकिन दिल नहीं। 

लक्ष्मी खुश हैं कि दीपिका पादुकोण जैसी एक्ट्रेस उनकी कहानी पर बन रही फिल्म में काम कर रही हैं। इस फिल्म से कई लोगों को प्रेरणा मिल सकती है।