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    दहेज के बारे में क्या कहता है भारत का कानून? जानने के लिए पढ़ें

    इस आर्टिकल में जानिए कि दहेज के बारे में भारत के कानून में क्या-क्या बताया गया है।   
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    Updated at - 2022-12-01,20:06 IST
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    indian law for dowry

    शादी के दौरान दहेज लेने की प्रथा को खत्म करने के लिए भारत के कानून में कुछ प्रावधान दिए गए हैं। फिर चाहे दहेज निषेध अधिनियम हो या डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट। पर सवाल यह है कि इस बारे में कितने लोगों को जानकारी है? 

    इसी को देखते हुए हमने बात की सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल मिश्रा से। उन्होंने अलग-अलग धारा और उनके तहत दी जाने वाली सजा के बारे में बताया। चलिए जानते हैं इस विषय के बारे में विस्तार से। 

    किस सेक्शन के तहत दर्ज होता है मामला 

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    विशाल मिश्रा बताते हैं कि आजकल दहेज के लिए एफआईआर दर्ज होने पर सबसे पहले जो सेक्शन है वो है 498 A । इस केस में पति के अलावा अन्य परिवार वालों पर भी एक्शन लिया जाता है। दहेज की मांग से जुड़े मामले पर 3 साल की सजा सुनाई जा सकती है। बता दें कि यह सेक्शन दहेज नहीं बल्कि किसी भी तरह की क्रूरता के लिए बनाया गया है। इसी के तहत दहेज के मामलों पर भी एक्शन लिया जा सकता है। 

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    dowry law

    मृत्यु होने पर क्या होता है? 

    हम कई बार दहेज की वजह से मृत्यु होने तक के भी मामले सुनते हैं। इन मामलों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए आप आईपीसी की धारा 304 बी के तहत लिया जाता है। दोषी पाए जाने वालों को 7 साल से लेकर पूरे जीवन के लिए सजा सुनाई जा सकती है। 

    दहेज निषेध अधिनियम, 1961 (Dowry Prohibition Act, 1961)

    dowry prohibition act

    दहेज की प्रथा को रोकने और खत्म करने के मकसद से ही इस अधिनियम को लाया गया था। इस अधिनियम के तहत 2 सेक्शन हैं। सेक्शन 3 और 4। सेक्शन 3 के तहत दहेज लेना और देना दोनों अपराध है और 15 हजार तक के जुर्माने और 5 साल की सजा सुनाई जा सकती है। वहीं सेक्शन 4 कहता है कि दहेज की मांग करने पर 6 महीने से 2 साल तक की सजा हो सकती हैं।

    डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट 

    इन सभी एक्ट के बाद महिलाएं डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट के तहत भी दहेज के खिलाफ आवाज उठा सकती हैं। किसी भी तरह की प्रताड़ना होने पर यह एक्ट मदद करता है। 

    तलाक के बाद महिलाएं कैसे ले सकती हैं मदद? 

    सुप्रीम कोर्ट में वकील विशाल मिश्रा बताते हैं कि तलाक लेने के बाद कोर्ट क्या फैसला लेगा यह परिस्थिति पर निर्भर करता है। अगर कोई कपल अपनी मर्जी से तलाक ले रहा है और वहीं कोई महिला दहेज के लिए मारपीट का आरोप लगाकर तलाक ले रही है तो दोनों परिस्थियों में कोर्ट का फैसला अलग होगा। 

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    तो ये थी दहेज के कानून से जुड़ी सारी जानकारी। अगर आप इसके अलावा किसी और कानून के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं तो इस आर्टिकल के कमेंट सेक्शन में सवाल जरूर करें। 

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    Photo Credit: Jagran 

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