दिवाली का त्योहार दिवाली का पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस साल कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि 4 नवम्बर, गुरूवार को पड़ेगी और इसी दिन यह त्यौहार विधि विधान से मनाया जाएगा। यह त्यौहार हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन मुख्य रूप से माता लक्ष्मी का पूजन करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति दिवाली के दिन माता लक्ष्मी का पूरे विधि विधान और श्रद्धा भाव से पूजन करता है उस पर सदैव माता लक्ष्मी की कृपा दृष्टि बनी रहती है और धन की वर्षा होती है।

वहीं ऐसा भी माना जाता है कि सही ढंग से पूजन न करने पर  पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। दिवाली की तैयारी के साथ ही लोग लक्ष्मी पूजन की तैयारी भी शुरू कर देते हैं और माता लक्ष्मी से घर की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। ऐसे में भक्तों को लक्ष्मी पूजन का सही विधान जरूर जान लेना चाहिए जिससे घर धन धान्य से भरा रहे। आइए जाने माने ज्योतिर्विद पं रमेश भोजराज द्विवेदी जी से जानें दिवाली पर लक्ष्मी पूजन  करने की सही  विधि क्या है।

लक्ष्मी पूजा की सामग्री

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लक्ष्मी जी की पूजा के लिए मुख्य रूप से रोली, अक्षत, पान- सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, घी, सरसों का तेल,गंगाजल, फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, पंचामृत, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला, शंख, लक्ष्मी व गणेश जी की मूर्ति, थाली, चांदी का सिक्का, दीये आदि।

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दिवाली में इस विधि से करें लक्ष्मी पूजन

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दिवाली के दिन माता लक्ष्मी का पूजन करने का विशेष महत्त्व है। इस दिन माता का पूजन करते समय आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए और पूरे विधि विधान से पूजन करना चाहिए।

  • सबसे पहले दिवाली के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि से मुक्त होकर साफ़ वस्त्र धारण करें और घर के मंदिर की सफाई करें।
  • सभी भगवानों को स्नान कराएं और नए वस्त्रों से सुसज्जित करें। मुख्य रूप से माता लक्ष्मी और गणेश जी को स्नान कराएं और नए वस्त्र पहनाएं।
  • ऐसी मान्यता है कि दिवाली के दिन माता लक्ष्मी का पूजन गणपति पूजन के बिना अधूरा माना जाता है।
  • माता लक्ष्मी के पूजन के लिए एक साफ़ चौकी में लाल कपड़ा बिछाएं और माता की मूर्ति स्थापित करें।
  • माता लक्ष्मी को लाल, पीले या नारंगी रंग के वस्त्रों से सुसज्जित करें और ध्यान रखें कि मूर्ति या तस्वीर का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें।
  • लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की मूर्ति भी रखें और ध्यान रखें कि लक्ष्मी जी की मूर्ति (माता लक्ष्मी की ऐसी मूर्ति न रखें)भगवान् गणपति के दाहिनी तरफ होनी चाहिए।
  • पूजनकर्ता और भक्त जन मूर्तियों के सामने की तरफ बैठें और मूर्ति के साथ कलश की स्थापना करें।
  • कलश स्थापित करते समय जमीन पर थोड़े अक्षत रखें और उसके ऊपर जल से भरा कलश रखें। कलश को ढककर रखें और उसके ऊपर दीप प्रज्ज्वलित करें।
  • माता लक्ष्मी के सामने घी के 5 या 7 दीपक प्रज्ज्वलित करें और एक बड़ा दीपक सरसों के तेल का प्रज्ज्वलित करें।
  • माता लक्ष्मी को फूलों की माला पहनाएं और कमल का पुष्प अर्पित करें। माता की मूर्ति के सामने धूप प्रज्ज्वलित करें और कल्याण की प्रार्थना करें।
  • समस्त परिवार के साथ मिलकर माता लक्ष्मी की आरती करें और भोग के रूप में खीर जरूर रखें। ऐस माना जाता है कि माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने से उनकी कृपा दृष्टि पूरे साल भक्तों पर बनी रहती है।

माता लक्ष्मी को लगाएं खीर का भोग

ऐसी मान्यता है कि दूध और चावल से बनी खीर माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है। दिवाली में मुख्य रूप से खीर का भोग लगाकर ही पूजन संपन्न माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खीर का भोग लगाने से व्यक्ति को रोग दोष से मुक्ति मिलने के साथ घर भी धन और धान्य से परिपूर्ण होता है। माता लक्ष्मी को खीर का भोग दिवाली वाले दिन अवश्य लगाएं। ऐसा करना विशेष रूप से फलदायी होगा और इस खीर का सेवन प्रसाद स्वरुप करने से रोगों से मुक्ति मिलेगी।

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माता लक्ष्मी को चढ़ाएं कमल का फूल

शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी का एक नाम कमला और कमलासना भी है, जिसका तात्पर्य होता है कमल पर विराजने वाली। ऐसा माना जाता है कमल पुष्प (माता लक्ष्मी को क्यों चढ़ाया जाता है कमल का फूल)कीचड़ में उत्पन्न होकर भी कीचड़ में विलुप्त नहीं होता है और पवित्र बना रहता है। इसलिए कमल के फूल को सबसे पवित्र माना जाता है। लक्ष्मी पूजन के दौरान कमल का फूल अर्पित करने से व्यक्ति को धन-धान्य की प्राप्ति होती है  सुख समृद्धि भी आती है भी आती है।

इस प्रकार दिवाली के दिन माता लक्ष्मी का पूजन उपर्युक्त विधि से करने से  घर में धन धान्य आता है और कई पापों से मुक्ति भी मिलती है।

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