विश्वभर में भारत अपनी धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं की वजह से जाना जाता है। यहां की पावन धरती पर कई ऐसे मंदिर स्थित हैं, जिनके दर्शन करने भक्त दूर-दूर से आते हैं। आपने भी माता वैष्णों देवी, साईं मंदिर शिरडी, मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना जरूर की होगी। मंदिर में पूजा करने से मन को अपार शांति का अनुभव होता है। आज हम आपको एक ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां देवी-देवताओं के साथ ही काले कुत्ते की पूजा की जाती है। हमारी बात सुनकर आप चौंक गए होंगे लेकिन यह बात पूरी तरह से सच है। 

यह अनोखा मंदिर छत्तीसगढ़ में स्थित है और इसे कुकुरदेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर के साथ कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। चलिए आपको बताते हैं कि आखिर किस वजह से इस मंदिर में काले कुत्ते को पूजा जाता है। 

मंदिर से जुड़ी मान्यताएं

black dog

कुकुरदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के खपरी गांव में स्थित है। इस मंदिर के अंदर शिवलिंग के पास काले कुत्ते की मूर्ति स्थापित है। साथ ही मंदिर के प्रवेश द्वार पर भी कुत्ते की मूर्ति लगी हुई है। खासतौर से सावन के महीने में इस मंदिर में भक्तों का काफी जमावड़ा लगता है और लोग भोलेनाथ के साथ काले कुत्ते की पूजा भी करते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भी शख्स मंदिर में आकर काले कुत्ते की सच्चे मन से पूजा करता है उसे जीवन में कभी कुकुरखांसी नहीं होती है और कुत्ता भी नहीं काटता है।

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ऐसे बना था कुकुरदेव मंदिर 

सदियों पुरानी बात है एक बंजारा अपने परिवार और कुत्ते के साथ खपरी गांव में आया था। बंजारे का परिवार बहुत गरीब था और अकाल पड़ने की वजह से उसका परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया था। भूख से बिलखते बंजारे ने गांव के ही एक साहूकार से कर्ज ले लिया लेकिन बहुत दिन बीत जाने के बाद भी वह कर्ज वापस नहीं कर सका। एक दिन साहूकार ने बंजारे को जमकर भला बुरा कहा। इसके बाद उसने अपने कुत्ते को साहूकार के पास गिरवी रखने का फैसला किया।

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कुत्ते ने वफादारी की मिसाल की पेश

kukurdev temple

एक दिन की बात है चोरों ने साहूकार के घर के सारे कीमती सामान को चुराकर जमीन में गाड़ दिया. कुत्ता चोरों को देख रहा था। अगले दिन सुबह साहूकार को चोरी का पता चला तो उसके होश उड़ गए। वह बैठाकर रो रहा था तभी कुत्ता उसे उस जगह ले गया जहां चोरों ने उसका कीमती सामान गाड़ दिया था। साहूकार को चोरी हुआ सारा सामान मिल गया। कुत्ते की वफादारी से प्रसन्न होकर साहूकार ने उसे वापस बंजारे के पास भेजने का निश्चय किया।  

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बंजारे ने कुत्ते को मार डाला

साहूकार ने बंजारे के नाम एक चिट्ठी लिखी और उसे कुत्ते के गले में बांध दी। बंजारे ने जैसे ही कुत्ते को देखा वह आग बबूला हो गया। उसने गुस्से में कुत्ते को मारना शुरू कर दिया। उसने कुत्ते को तब तक मार, जब तक उसने प्राण नहीं छोड़ दिए। 

 

कुछ देर बाद बंजारे का क्रोध शांत हुआ। उसने कुत्ते के गले में बंधी चिट्ठी को देखा और उसे पढ़ने लगा। बंजारे को चिट्ठी पढ़कर अपनी गलती पर बहुत अफसोस हुआ। उसने उसी जगह पर कुत्ते को दफनाकर स्मारक बनवा दिया।। कुछ समय बाद लोगों ने स्मारक को मंदिर बना दिया। आज इसी मंदिर को कुकुरदेव मंदिर के नाम से जाना जाता है और लोग दूर-दूर से इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं। 

 
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