जब विभिन्न स्वभाव के लोग एक साथ काम करते हैं तो उनके विचारों का भिन्न होना स्वाभाविक है। कई बार ऐसा होता है कि किसी प्रोजेक्ट को लेकर ऑफिस कर्मचारियों के बीच बहस हो जाती है और अगर उस argument का जल्द समाधान न ढूंढा जाए तो इसका असर टीमवर्क पर भी दिखाई देता है। कई बार लोग तर्क-वितर्क को पर्सनली भी ले लेते हैं और इस स्थिति में समस्या और भी अधिक गंभीर हो जाती है। आप भी अगर ऑफिस में काम करती हैं तो आपकी भी कभी न कभी अपने सहकर्मी से किसी बात या प्रोजेक्ट को लेकर बहस जरूर हुई होगी।

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बहस के बाद आमतौर पर दोनों लोग बातचीत बंद कर देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी इसका समाधान ढूंढने की कोशिश की है। शायद नहीं। दरअसल, ऑफिस एक ऐसी जगह है, जहां पर अपने दिन का एक लंबा समय बिताती हैं और अगर ऑफिस का माहौल खुशनुमा व सहकर्मियों से रिश्ते हेल्दी ना हो तो इसका असर आपके स्वभाव व सेहत पर दिखाई देता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि किसी भी argument के बाद आप अपनी प्रोफेशनल इमेज को बरकरार रखते हुए स्थिति को सामान्य करने का प्रयास करें। तो चलिए आज हम आपको ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में बता रहे हैं, जिसे अपनाने से आप अपने कलीग्स से बहस के बाद चीजों को आसानी से सामान्य कर सकती हैं-

न बढ़ाएं बात

how to resolve arguements with work colleagues 

Argument से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप बहस को और अधिक न बढ़ाएं। आप उस संबंध में जितना अधिक बात करेंगे, सामने वाला व्यक्ति आपसे उतना ही अधिक बहस करेगा। इसलिए बेहतर होगा कि आप कुछ देर के लिए शांत हो जाएं या फिर अगर किसी प्रोजेक्ट को लेकर बहस हो रही है तो आप एक ही बात पर अड़ी रहने की बजाय सामने वाले व्यक्ति के सामने कुछ विकल्प पेश करें। इससे यकीनन आपकी बातचीत एक सकारात्मक दिशा में आगे बढे़गी। कोशिश करें कि आप अनावश्यक आरोपों और विस्तार से बचें।

भावनाओं पर करें नियंत्रण 

how to resolve arguements with work colleagues () 

कई बार ऐसा भी होता है कि जब किसी प्रोजेक्ट या बात को लेकर बहस चल रही होती है तो लोग अपना आपा खो देते हैं या फिर उस बहस को काफी पर्सनली ले लेते हैं। ऐसे में स्थिति काफी बिगड़ जाती है। इसलिए जहां तक हो सके, शांत रहने की कोशिश करें।

अगर आप भावुक हुए बिना अपना मैसेज सामने वाले व्यक्ति के सामने रखेंगी तो इसका असर भी गहरा होगा। साथ ही आपको यह भी समझने की जरूरत है कि ऑफिस में सभी लोगों की सोच एक जैसी नहीं होती और इसलिए अगर ऑफिस में किसी बात को लेकर बहस होती है तो खुद को डिस्टर्ब न करें।

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ईगो को रखें दूर

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अगर बहस के दौरान व्यक्ति अपने ईगो को सामने ले आए तो फिर समस्या का हल नहीं ढूंढा जा सकता। ‘मैं हमेशा सही हूं’ या ‘मैं आपसे बेहतर हूं’वाला रवैया बात को काफी बढ़ा देता है। इसलिए सिर्फ अपनी ही कहने की बजाय सहकर्मी की भी सुनें। अगर आपको लगता है कि आप सही हैं तो बहस करने की बजाय तथ्यों के साथ उसकी बातों का मुकाबला करने का प्रयास करें। अगर आपके तथ्य सटीक होंगे तो यकीनन आपके सहकर्मी आपकी बात को मानेंगे। वहीं अगर आप दोनो ंही सही हैं तो बहस करने की बजाय कोई बीच का रास्ता निकालने का प्रयास करें।