दुनिया में शायद ही कोई ऐसा हो, जिसे अपनी तारीफ सुनना अच्छा न लगे। ऑफिस में आप भी अपने सहकर्मियों की तारीफ करते होंगे या बॉस आपको अच्छे काम के लिए कॉम्प्लिमेंटस देते होंगे। क्या आपने महसूस किया है। तारीफ तभी अच्छी लगती है जब उसकी टाइमिंग और शब्द बेहतर हों। इसलिए तारीफ के लिए किन शब्दों का इस्तेमाल किया जाए और किस समय  तारीफ की जाए ये आपको पता होना चाहिए।

तारीफ का मतलब है दूसरे की खासियतों को उसके सामने या दूसरों के सामने प्रकट करना, उसे खास महसूस कराना। यह एक ह्यूमेन नेचर  है कि हम सभी दूसरों से तारीफ पाना चाहते हैं। तारीफ के दो बोल रिश्तों को भी मधुर बनाते हैं। चाहे आपका पार्टनर हो, परिवार के सदस्य हों, ऑफिस के कुलीग्स हों या नाते-रिश्तेदार हों, सभी की समय-समय पर तारीफ कीजिए। इससे उनको खुशी का अहसास होगा।  क्योंकि तारीफ करने से रिश्तों को संवारने में मदद मिलती है, लेकिन तारीफ करते वक्त इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि सामने वाले को आपकी तारीफ सच्ची लगे।

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टाइमिंग हो बेस्ट

तारीफ का सबसे अच्छा समय अच्छे काम के तुरंत बाद होता है। अगर किसी व्यक्ति ने कोई सक्सेस पाई है, तो आपको बिना समय वेस्ट किये उसकी प्रशंसा करनी चाहिए। परफेक्ट समय पर की गई तारीफ अपना अलग ही असर दिखाती है।

इनडाइरेक्ट करें

किसी भी व्यक्ति की तारीफ डायरेक्ट न करके जब आप इनडाइरेक्ट करते है तो वह ज्यादा असर छोड़ती है। किसी की पीठ पीछे उनके गुणों को भी सराहें। जब उन तक यह बात पहुंचेगी तो रिश्तों में अपनापन और बढ़ेगा। जिसकी आप तारीफ कर रहे हैं, इससे उस व्यक्ति को अहसास होगा कि आप तारीफ दिल से करते हैं।

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सिर्फ काम की ही करें

अक्सर देखा गया है कि जब लोग किसी की तारीफ करते है तो जिस काम की प्रशंसा की जाए वो नही करते  बल्कि उसमे दूसरी बातों को शामिल कर देते है। अगर आपके सहकर्मी ने वाकई कोई बेस्ट काम किया है, तो आपको सीधे सरल शब्दों में सिर्फ उसके काम की ही तारीफ करनी चाहिए। इसमे दूसरी बातों को जोड़ने से तारीफ की इम्पोर्टेंस कम हो जाती है।

तारीफ में हो ईमानदारी 

किसी की भी तारीफ न ज्यादा हो और न ही बहुत कम जब भी किसी की तारीफ करें, तो पूरी ईमानदारी से करें। तारीफ हमेशा दूसरों से हटकर होनी चाहिए। सामने वाला भी जब तारीफ सुने तो उसे अपनी अहमियत का अहसास हो। यकीन मानिए, अलग अंदाज में की गई तारीफ, सामने वाले को ताउम्र याद रहेगी। इसलिए, तारीफ सही बात की ही करें।

बोलने से पहले विचार जरूर करें

अगर आप आफिस में अपने सहकर्मी की तारीफ करने जा रहे है, तो सोच ले की किन शब्दों में तारीफ करनी है। आपको खास शब्दों को सरलता से बोलना चाहिए। जिस इंसान की तरफ कर रहे है उसके नेचर के बारे में पता होना चाहिए की उसे क्या सुन कर अच्छा लगेगा और क्या सुन कर वो  शरमा जाएगा।

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काबलियत देख कर करें 

तारीफ उसी की करें, जो सचमुच उसके योग्य हो। किसी से फायदा लेने के लिए उसकी बार-बार तारीफ न करे कई बार, बार-बार की तारीफ से लोगों को अपनी तारीफ सुनने की आदत हो जाती है और अगर उनकी तारीफ करना भूल जाएं तो वे परेशान हो जाते हैं और आपको भी परेशान करने लगते हैं।

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 मतलब के लिए न करें 

अगर आप किसी से अपना काम निकलवाने के लिए तारीफ कर रहे है तो ऐसा कभी न करें। ऐसे में आपकी इमेज मतलबी की हो जाएगी और लोग आपकी तारीफ की कोई वैल्यू नही करेंगे। किसी की प्रशंसा के बाद तुरंत कोई ऐसी बात या इच्छा प्रकट न करें, जिससे लगे कि आप उसकी तारीफ अपना किसी काम निकलवाने के लिए कर रहे हैं। इससे आपके जरिए की गई सराहना भले ही कितनी सही हो, चापलूसी और मक्खनबाजी लगने लगती है।  

पर्सनल होने से बचें

कई बार तारीफ करते समय कुछ लोग ज्यादा पर्सनल हो जाते हैं और ऐसी बातें बोल देते हैं, जो अच्छी नही लगती। पर्सनल और प्रोफेशनल बातों की सीमा होनी चाहिए

खुद की करें

क्या आपने कभी अपने काम की तारीफ की, अगर नही करी तो अब कीजिये। अपनी तारीफ  करने के लिए सुबह उठकर आईना देखकर खुद के बारे में अच्छी बातें कहें। इसके अलावा जब भी कोई बड़ा काम करें तो खुद को सराहें। अपनी पीठ खुद थपथपाएं ऐसा करने से आपका सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और आप हैप्पी फील करेंगे।

 

तारीफ को बांटे भी

आप एक टीम में काम करते हैं और किसी खास सक्सेस के लिए सिर्फ आपका नाम लिया जा रहा है, तो आपको अपनी तारीफ को बांट देंना चाहिए की इसमे पूरी टीम का हाथ है मेरा अकेले की मेहनत नही।

तारीफ को हमेशा एक गिफ्ट के रूप के लेना चाहिए। इसको रिजेक्ट करने का मतलब है की आपको खुद पर विश्वास नही है। अगर कोई आपकी तारीफ करता है, तो उसे धन्यवाद जरूर बोले।