tarpa tribal dance maharashtra

जानिए आखिर क्या है तारपा नृत्य? पालघर के आदिवासी समुदाय के बीच है लोकप्रिय

एक ऐसा नृत्य जिसे करके न सिर्फ आप अंदर से अच्छा महसूस करते हैं, बल्कि भगवान का शुक्रिया भी अदा करते हैं। एक पॉपुलर ट्राइबल डांस जिसे तारपा कहा जाता है, अपने आप में बेहद खास है। <div>&nbsp;</div>
Editorial
Updated:- 2023-10-03, 15:57 IST

क्या आपने अपनी आंखों से संगीत से मेनिफेस्टेशन करते हुए किसी को देखा है? अगर नहीं, तो मेरी राय है कि आपको एक बार महाराष्ट्र के पालघर के आदिवासी समुदाय का यह नृत्य जरूर देखना चाहिए। आपने भी शायद इसके बारे में सुना हो... मैं बात कर रही हूं तारपा नृत्य के बारे जो एक प्राचीन लोक नृत्य है। तारपा एक ऐसी कला है जिसमें प्राचीन लोक संगीत और धुन को एक अद्भुत तरीके से पेश किया जाता है। वरली ट्राइबल्स द्वारा इसे परफॉर्म किया जाता है। दादर-हवेली के साथ महाराष्ट्र के कई जिलों के आदिवासी समुदायों द्वारा इसे किया जाता है। 

आप सोच भी नहीं सकते, लेकिन यह समुदाय सूखे कद्दू, ताड़पत्री और बैंबू से इंस्ट्रूमेंट तैयार करते हैं। तारपा सुनने वाले लोगों को यह बैगपाइप की याद दिला सकता है जिसके धुन काफी हाई पिच्ड होती है। 

यह लोक संगीत और नृत्य अपने आप में काफी अद्भुत है। इसका जिक्र वरली पेंटिंग में भी देखने को मिलता है। यह नृत्य है फेस्टिविटीज का जश्न मनाने का और ग्रैटिट्यूड दिखाने का। महाराष्ट्र की चार दिन की ट्रिप के दौरान मुझे इस लोक नृत्य को देखने और सुनने का मौका मिला। इसके बारे में मैंने जो जाना, वो आपके साथ भी साझा कर रही हूं। 

हाथ से बना एक पारंपरिक और ट्राइबल इंस्ट्रूमेंट

tarpa instrument

तारपा एक इंस्ट्रूमेंट है और उसी से निकलकर आया तारपा लोक नृत्य। इसमें प्राकृतिक रूप से सूखी लौकी का उपयोग किया जाता है। उसे पूरी तरह सूख जाने के बाद उसे फिनिश दी जाती है। नीचे के हिस्से को बैम्बू सो जोड़ा जाता है और तारपा इंस्ट्रूमेंट तैयार किया जाता है। इसे बजाने वाला कलाकार बीच में रहता है जिसे तारपाकर कहते हैं और बाकी सारे कलाकार उसे घेरकर चेन में इस नृत्य को परफॉर्म करते हैं।

पालघर में जिन कलाकारों से हम मिलें, उन्होंने बताया कि वे खुद ही तारपा घर पर तैयार करते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि उसे बनाने में उन्हें 4-5 दिन लगते हैं। इस इंस्ट्रूमेंट के लिए इस्तेमाल की गई चीजें जैसे बांस, ताड़पत्र और कद्दू का अपना अलग महत्व है। बांस को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। वहीं ताड़पत्र के पत्ते या लकड़कियां लंबे समय तक चल सकती हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल होता है। ऐसा माना जाता है कि कद्दू बुरी नजर को दूर करता है।  

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दिवाली पर अन्न देव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है तारपा

क्या आपने किसी संगीत से मेनिफेस्टेशन होते देखा है? यह लोक नृत्य ऐसा ही है, जिसमें ग्रैटिट्यूड और मेनिफेस्टेशन नजर आएगा। इसे लेकर ऐसी मान्यता है कि अन्न देव को प्रसन्न करने के लिए इसे दिवाली पर खासतौर से किया जाता है। 

इतना ही नहीं, इन लोगों का कहना है कि खुशी के हर मौके पर ये लोग इस नृत्य को करते हैं और उस खास मौके का जश्न मनाते हैं। 

यह एक ऐसा नृत्य है, जिसमें सभी लोग भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं और आगे की फसल की बेहतरी के लिए ही फसल के आसपास इस नृत्य का प्रदर्शन किया जाता है। इतना ही नहीं, गैर समुदाय के लोग भी उन्हें बुलाकर तारपा का आयोजन करवाते हैं। इसे आम भाषा में 'हार्वेस्ट डांस' भी कहा जाता है। 

यह फेस्टिविटीज हर साल बड़े शोरो-जोरों से की जाती हैं। समुदाय के कई लोगों का यह भी मानना है कि इस संगीत की हीलिंग पावर भी होती हैं। भगवान का शुक्रिया अदा करने के साथ ही यह व्यक्ति के मन को शांति पहुंचाता है। 

खास परिधान पहनकर होते हैं लोग शामिल

tribal dance tarpa

लूंगी और बनियान पहने पुरुष कलाकारों की कमर पर आम के पत्ते बंधे थे। वहीं महिलाएं साड़ी पहनकर महाराष्ट्रीयन स्टाइल (नऊवारी साड़ी के बारे में जानें रोचक तथ्य) में तैयार थीं। इनके लीडर के हाथ में एक लाठी होती है, जिसपर घुंघरू बंधे होते हैं और वह तारपा की धुन के साथ मेल खाते हुए संगीत को और भी आनंदमयी बनाता है। 

इस नृत्य के बारे में आपको एक और चीज बता दें कि यह कोई 20-25 मिनट की परफॉर्मेंस नहीं होती, बल्कि सभी कलाकार 3-4 घंटे पूरे जोश के साथ तारपा की धुन में चेन बनाकर नाचते रहते हैं। म्यूजिक और डांस पहले से तय नहीं होता। इस नृत्य की खास बात यह है कि ग्रुप का लीडर इसे लीड करता है और कोई भी नृत्य के दौरान चेन नहीं तोड़ सकता है। लीडर धुन बदलता है, तो ताल भी बदलती है और अलग फॉर्म में सभी लोग जमकर नाचने लगते हैं।

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समुदाय को इसकी उत्पत्ति के बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन यह नृत्य समुदाय के लिए बहुत खास है, क्योंकि यह उन्हें भगवान और उनके पूर्वजों से जोड़ता है। वे लोग इस पारंपरिक नृत्य को देखते हुए और उसका हिस्सा बनकर बड़े हुए हैं और चाहते हैं कि अगली पीढ़ी भी तारपा का प्रदर्शन जारी रखे। वे भले ही यह नहीं जानते कि यह लोक नृत्य कब और कैसे शुरू हुआ, लेकिन इससे उनके बीच इसके प्रति सम्मान और जोश कम नहीं हुआ। 

 

अब बताइए इस लोक नृत्य या कहिए लोक संस्कृति के बारे में जानकर आपको कैसा लगा? अगर यह जानकारी पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करें। ऐसे ही लेख पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ।

Image Credit: Freepik

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