टोक्यो ओलंपिक के बाद अब खेल प्रेमियों की निगाहें पैरालंपिक गेम्स पर हैं। खासतौर पर टोक्यो ओलंपिक में महिला खिलाड़ियों के अच्‍छे प्रदर्शन और जीत के बाद भारतीय खेल प्रेमियों को पैरालंपिक गेम्स में शामिल हुई महिला खिलाड़ियों  से काफी उम्मीदें हैं। खेल प्रेमियों की उम्‍मीदों पर अब तक 2 महिला खिलाड़ी खरी भी उतर चुकी हैं। 

जी हां, हम बात कर रहे हैं भाविना पटेल और अवनि लेखरा की, जिन्होंने एक सिल्वर और एक गोल्ड मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया है। वैसे पैरालंपिक गेम्स में महिला खिलाड़ियों की जीत का कोई लंबा चौड़ा इतिहास नहीं रहा है, मगर हर बार जब किसी महिला खिलाड़ी ने पैरालंपिक में जीत हासिल की है, तो एक नया रिकॉर्ड बना है। 

चलिए आज हम आपको पैरालंपिक गेम्स में अब तक जीत हासिल कर चुकीं कुछ महिला खिलाड़ियों के बारे में बताते हैं। 

दीपा मलिक 

दीपा मलिक पैरालंपिक खेलों में भारत के लिए पदक जीतने वाली अभी तक इकलौती महिला खिलाड़ी थीं। वर्ष 2016 में रियो में हुए पैरालंपिक गेम्स में जब दीपा ने शॅट पुट F-53 इवेंट में 4.61 मीटर का थ्रो मार कर रजत पदक हासिल किया था, तब उनका नाम पैरालंपिक गेम्स के इतिहास में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी के तौर पर दर्ज कर लिया गया था। 

दीप से पहले और बाद में किसी भी महिला खिलाड़ी ने पैरालंपिक गेम्स में अब तक कोई जीत हासिल नहीं कि थी। हालांकि, अब दीपा खेल से संन्यास ले चुकी हैं और वर्ष 2020 में उन्हें भारतीय पैरालंपिक समिति का अध्यक्ष चुना गया है। 

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भाविना पटेल 

टोक्यो में चल रहे पैरालंपिक 2021 में टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविना पटेल ने भारत को पहली उपलब्धि हासिल कराई है और दीपा मलिक के बाद वह दूसरी पदक जीतने वाली भारतीय महिला खिलाड़ी बन चुकी हैं, उन्होंने महिला सिंगल्‍स क्लास 4 क्वार्टर फाइनल में दुनिया की 5वें नंबर की खिलाड़ी बोरिस्‍लावा पेरिच रांकोविच को हरा कर यह जीत हासिल की है। हालांकि, भाविना फाइनल में नंबर-3 वर्ल्‍ड रैंकिंग वाली चीन की खिलाड़ी झांग मियाओ से हार गई थीं, इसलिए उन्होंने सिल्‍वर मेडल जीता है, लेकिन आपको बता दें कि भविना भारत की पहली महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं, जो पैरालंपिक गेम्स में फाइनल तक पहुंच पाई और भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता। 

मेडल जीतने का यह सफर भाविना के लिए संघर्ष भरा रहा है। जब भाविना मात्र 1 वर्ष की थी और चलना सीख रही थीं, तब ही एक घटना के बाद उनकी कमर के नीचे का हिस्‍सा बेकार हो गया था। 12 साल की उम्र में पहली बार भाविना के अंदर टेबल टेनिस खेलने की चाहत पैदा हुई। इसके बाद भाविना ने इस खेल में आगे बढ़ने की इच्छा जाहिर की, घरवालों ने भी भाविना को सपोर्ट किया। खेल के साथ-साथ भाविना ने संस्कृत में ग्रेजुएशन भी किया है। 

भाविना को आगे बढ़ाने में उनके परिवार का सहयोग भी कम नहीं है। उनके पिता ने बेटी को आगे बढ़ाने के लिए गांव से अहमदाबाद शिफ्ट होने का फैसला लिया और अपनी दुकान बंद कर शहर में नया काम शुरू किया ताकि बेटी को ठीक से प्रशिक्षण मिल सके। वर्ष 2008 से भाविना कोच ललन दोशी के मार्गदर्शन में खेल रही हैं। 

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avni lekhra shooter

अवनि लेखरा

अवनि लेखरा का नाम आज हर ओर चर्चा में है। हो भी क्यों न, आखिर अवनि लेखरा भारत की पहली ऐसी खिलाड़ी बन चुकी हैं, उन्होंने भारत को पैरालंपिक खेल में गोल्ड मेडल जिताया है। यह इतिहास अवनि ने 30 अगस्त को टोक्यो पैरालंपिक गेम्स में निशानेबाजी प्रतियोगिता में महिलाओं के आर-2 10 मीटर एयर राइफल के क्‍लास एसएच-1 में जीत हासिल करके रचा है। 

अवनि से पहले पैरालंपिक गेम्स में किसी भी महिला खिलाड़ी ने गोल्ड मेडल नहीं जीता है। अवनि ने फाइनल में 249.6 अंक बनाएं और विश्व रिकार्ड की बराबरी की। फाइनल राउंड में अवनि ने चीन की निशानेबाज झांग कुइपिंग को हराया था। 

आपको बता दें कि जयपुर की अवनि ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए एक संघर्ष भरा सफर तय किया है। अवनि जब 11 वर्ष की थीं तब उन्‍हें एक कार दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी पर चोट आई थी। इसके बाद व्‍हील चेयर ही उनका सहारा बन गई। हालांकि, अवनि ने अपनी हिम्मत को टूटने नहीं दिया और पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने खेल-कूद में भी रुचि रखी। 

अवनि ने एक लीडिंग मीडिया हाउस को दिए पुराने इंटरव्यू में बताया था, 'निशानेबाज अभिनव बिंद्रा की बायोग्राफी पढ़ने के बाद मेरे अंदर शूटिंग के प्रति लगाव बढ़ा था।' इसके बाद अवनि ने इस खेल में खुद को आगे बढ़ाया। 2015 में अवनि ने ट्रेनिंग शुरू की और स्‍टेट लेवल की एक चैम्पियनशिप में गोल्‍ड मेडल भी जीता। वर्ष 2016 से लेकर वर्ष 2020 तक में अवनि ने नेशनल शूटिंग चैम्पियनशिप में 5 गोल्ड मेडल जीते हैं। 

तो कैसा लगा आपको भारत की इन होनहार महिला खिलाड़ियों से जुड़ी रोचक बातें जानकर। अगर आप महिला खिलाड़ियों से जुड़ी और भी बातें जानना चाहती हैं, तो पढ़ती रहें हरजिंदगी।