टोक्यो ओलंपिक्स 2020 जिसे टोक्यो ओलंपिक्स 2021 भी कहा जा रहा है वो कई मायनों में अनोखा है। कई सालों के रिकॉर्ड इन गेम्स में टूट रहे हैं और महिला खिलाड़ी इन गेम्स में इतिहास भी बना रही हैं। जहां एक ओर गुजरात की अंकिता रैना ने ओलंपिक्स में आकर 100 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया था वहीं वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने पहले ही दिन सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। 

टोक्यो ओलंपिक्स में कुछ ऐसा एक रिकॉर्ड दिल्ली की मनिका बत्रा ने भी बना दिया है। मनिका ने टेबल टेनिस का पहला राउंड जीतकर ही लोगों को खुश कर दिया था क्योंकि बहुत समय बाद किसी टेबल टेनिस प्लेयर ने इस तरह का प्रदर्शन दिखाया था। 

आज हम टेबल टेनिस गेम्स के इतिहास के बारे में कुछ बात करते हैं और साथ ही साथ भारत का इस खेल में प्रदर्शन कैसा रहा है इसके बारे में भी बात करेंगे। 

1992 के बाद टेबल टेनिस में पहली जीत-

टोक्यो ओलंपिक्स में भारत की मनिका बत्रा ने इतिहास रच दिया था क्योंकि 1992 के बाद से भारत के किसी भी खिलाड़ी ने टेबल टेनिस में एक भी मैच नहीं जीता है।

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भारत की टेबल टेनिस वर्ल्ड रैंकिंग-

टेबल टेनिस की वर्ल्ड रैंकिंग प्वाइंट्स के हिसाब से तय की जाती है। भारत में महिला सिंगल्स की बात करें तो टेबल टेनिस प्लेयर अर्चना गिरीश कामथ के 136 प्वाइंट्स हैं और मनिका बत्रा के 129 प्वाइंट्स हैं। इनके अलावा बाकी सभी भारतीय महिला खिलाड़ी वर्ल्ड रैंकिंग में काफी नीचे आते हैं। 

olympics doubles manika batra

नोट: ये डेटा ittf.com (International Table Tennis Federation) की आधिकारिक वेबसाइट से लिया गया है। 

ओलंपिक्स में टेबल टेनिस की भारतीय टीम- 

इस साल टेबल टेनिस में शरथ कमल, जी साथियान, सुतीर्था मुखर्जी और मनिका बत्रा गए थे जिसमें से सिर्फ मनिका बत्रा ही दूसरे राउंड में जीतकर तीसरे राउंड में पहुंची थीं। हालांकि, मनिका 26 जुलाई को हुए मैच में हार गई थीं और प्रतियोगिता से बाहर हो गई थीं, लेकिन ये तो मानना पड़ेगा कि भारत को एक जीत की आस लगी हुई थी जो 1992 के बाद मनिका के मैच के बाद पूरी हुई। 

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मनिका के अलावा सुतीर्था मुखर्जी ने भी अपनी जगह दूसरे राउंड में बना ली थी, पर वो भी आगे नहीं बढ़ पाईं। 

इसके पहले टेबल टेनिस में कब मिली थी भारत को जीत? 

अगर आप सोच रहे हैं कि इसके पहले भारत को टेबल टेनिस में ओलंपिक्स में पदक मिला है तो ये गलत है। अभी तक टेबल टेनिस गेम में भारत को एक भी पदक नहीं मिला है। पर इससे पहले नियती रॉय शाह ने समर ओलंपिक्स 1992 में एक मैच जरूर जीता था। जी हां, इसके अलावा टेबल टेनिस महिला गेम्स में अभी तक कोई मैच भी नहीं जीता गया है। नियती रॉय शाह का ये दूसरा ओलंपिक गेम था इसके पहले वो 1988 समर ओलंपिक्स में भी हिस्सा ले चुकी थीं।  

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आगे भी कई चुनौतियां हैं बाकी- 

इस बार तो भारत के हाथ हार लगी, लेकिन जिस तरह का प्रदर्शन भारतीय खिलाड़ियों ने ओलंपिक्स में किया है उसे देखकर लगता है कि जल्द ही टेबल टेनिस के लिए भी भारत पदक लेकर आएगा।   

हम ओलंपिक गेम्स में खेलने वाले सभी खिलाड़ियों को हरजिंदगी की तरफ से शुभकामनाएं। टेबल टेनिस के अलावा, पीवी सिंधु ने बैडमिंटन में पदक जीतकर और लोवलीना ने बॉक्सिंग में ब्रॉन्ज जीलतक हमें खुश कर दिया है। इसी के साथ, मीराबाई चानू की सिल्वर जीत को देश कभी भुला नहीं पाएगा। 

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