जन्माष्टमी के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां भगवान श्री कृष्ण हो सकते हैं नाराज

जन्माष्टमी यानी श्री कृष्ण का जन्म दिन...भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, जब भगवान विष्ण ने श्री कृष्ण रूप में अवतार लिया था। जन्माष्टमी के दिन भक्त पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते हैं, उन्हें 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया जाता है, लड्डू गोपाल को स्नान कराया जाता है, उनके सुंदर रूप को भक्त सजाते हैं और उनसे अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दिन पूजा और व्रत के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं, किन बातों से भगवान श्री कृष्ण की कृपा मिल सकती है और किन गलतियों से वह नाराज हो सकते हैं, इस बारे में हमने अपने एस्ट्रो एक्सपर्ट शिवम पाठक से पूछा। चलिए आप भी विस्तार से जान लीजिए।
जन्माष्टमी के दिन क्या करें

- जन्माष्टमी के दिन व्रत रखे हो या नहीं सुबह जल्दी स्नान करके लड्डू गोपाल की पूजा जरूर करें।
- भगवान श्री कृष्ण के लिए उनके प्रिय चीजों का भोग तैयार करें।
- तुलसी की माला बनाएं, लेकिन सूई धागा से छेद कर नहीं।
- कान्हा का सुंदर श्रृंगार करें और उन्हें झूला झुलाएं।
- गरीबों को दान दें, प्रसाद बनाकर बच्चों को भोग बांटे।
- पूजा से पहले मंदिर की साफ-सफाई करें और गंगाजल से शुद्ध करें।
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जन्माष्टमी के दिन क्या नहीं करें

- जन्माष्टमी पर यदि व्रत रखते हैं, तो उसका पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि आप व्रत कर रहे हैं, तो उसके नियमों का पालन पूरी तरह से करें।
- जन्माष्टमी की रात को भोजन करना या सोना गलत माना जाता है। विशेष रूप से रात्रि 12 बजे के बाद भोजन करने से बचें।
- जन्माष्टमी के दिन मांसाहार, तामसिक और राजसिक भोजन का सेवन न करें, इसके अलावा यदि आप कोई नशा करते हैं, तो वह भी करने से बचें। इस दिन केवल सात्विक भोजन और फलाहार का सेवन करें।
- जन्माष्टमी के इस पावन दिन पर किसी भी प्रकार का झगड़ा या विवाद नहीं करना चाहिए, शांति और सौहार्द बनाए रखें।
- मंदिर या घर की स्वच्छता बनाए रखें, गंदगी और अशुद्धता से बचें। पूजा-पाठ के दौरान शुद्ध कपड़े पहने और पूजा के लिए भी शुद्ध और पवित्र चीजों का इस्तेमाल करें।
- बच्चों पर हाथ ना उठाएं और बड़ों का अपमान न करें, इससे भगवान नाराज होते हैं और व्रत पर इसका गलत प्रभाव पड़ता है।
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