भारत की टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपने खेल के जरिए लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाई है। एक बार फिर उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर भारत का सिर गर्व से ऊंचा किया है। टोक्यो ओलंपिक 2021 के शुरू होने में अब तीन दिन ही बचे हैं। ऐसे में एक-एक कर भारतीय खिलाड़ी टोक्यो के लिए उड़ान भर रहे हैं। इस लिस्ट में भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा का नाम भी जुड़ा है और लगातार चौथी बार ओलंपिक में हिस्सा लेकर उन्होंने एक रिकॉर्ड बनाया है।

कम उम्र में ही सफलता के झंडे का गाड़ने वाली सानिया ने अपनी करियर की शुरुआत साल 1999 में की थी। तब से लेकर अब तक उनके नाम न जाने कितने सम्मान, कितने रिकॉर्ड बन चुके हैं। रियो 2016 ओलंपिक में सेमीफाइनल तक का सफर तय करने वाली सानिया मिर्ज़ा के नाम पर 42 WTA युगल खिताब हैं। वो अभी तक की सबसे सफल सक्रिय युगल खिलाड़ी भी हैं। वो WTA की सिंगल्स रैंकिंग के शीर्ष 30 में जगह बनाने वाली एकमात्र भारतीय हैं। सानिया मिर्ज़ा ने डबल्स में ज्यादा सफलता हासिल की है। टोक्यो में वह अंकिता रैना के साथ जुगलबंदी करती दिखेंगी। टेनिस की सनसनी कही जाने वाली सानिया के अब तक के करियर पर डालते हैं एक नजर।

छह साल से खेल रही हैं टेनिस

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सानिया को कामयाब बनाने में उनके पिता इमरान का अहम योगदान है। वह पेशे से एक खेल रिपोर्टर थे, उन्होंने ही सानिया को आगे बढ़ने का हौसला दिया। सानिया ने छ्ह साल की उम्र से टेनिस खेलना शुरू किया था। वह हैदराबाद के निजाम क्लब में खेलने लगीं। सानिया ने अपनी शुरुआती ट्रेनिंग महेश भूपति के पिता और भारत के सफल टेनिस प्लेयर सीके भूपति से ली थी। हैदराबाद से शुरुआत करने के बाद वह अमेरिका की टेनिस एकेडमी गईं।

कम उम्र में विंबलडन चैंपियन बनीं

सानिया की अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत 1999 में हुई थी, जब उन्होंने विश्व जूनियर टेनिस चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था। इस दौरान वह महज 14 साल की थीं। उसके बाद उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मैचों में शिरकत की और सफलता भी पाई। वर्ष 2003 में भारत की तरफ से वाइल्ड कार्ड एंट्री करने के बाद, उन्होंने विंबलडन में डबल्स के दौरान जीत हासिल की थी। जल्द ही वो 2005 में यूएस ओपन में एक ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के चौथे दौर में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला थीं और फिर उसी वर्ष WTA खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

सानिया ने 2009 में महेश भूपति के साथ अपना पहला ग्रैंड स्लैम, ऑस्ट्रेलियन ओपन में मिश्रित युगल खिताब जीता। इस जोड़ी ने 2012 के फ्रेंच ओपन में दूसरा खिताब जीता और फिर उन्होंने 2014 के यूएस ओपन में ब्राजील के ब्रूनो सोरेस के साथ मिलकर खिताब अपने नाम किया। ये वही सानिया मिर्जा थीं जो छह बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन रह चुकी थीं, जो कि डबल्स में पूर्व वर्ल्ड नंबर एक और तीन बार का ओलंपिक तक का सफर तय कर चुकी हैं।

2006 से 2009 का करियर

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सानिया को 2006 के ऑस्ट्रेलियन ओपन (ग्रैंड स्लैम इवेंट में वरीयता प्राप्त करने वाली पहली महिला भारतीय) में वरीयता दी गई थी, जो वह माइकला क्रेजिसेक से हार गई थीं। इसके बाद वह बैंगलोर ओपन में केमिली पिन से हार गई थीं, लेकिन उन्होंने ह्यूबर के साथ युगल खिताब जीता। वह दुबई टेनिस चैंपियनशिप में खेली लेकिन मार्टिना हिंगिस से हार गईं। इंडियन वेल्स मास्टर्स में, वह तीसरे दौर में पहुंच गई लेकिन ऐलेना डिमेंतिवा से हार गई। वह फ्रेंच ओपन ग्रैंड स्लैम के पहले दौर में अनास्तासिया मायस्किना से भी हार गईं। दिसंबर में, मिर्जा ने दोहा एशियाई खेलों में तीन पदक जीते- स्वर्ण, मिश्रित युगल में और महिला एकल में रजत जीता था।

साल 2006 में सानिया मिर्जा ने स्वेतलाना कुजनेत्सोवा, नादिया पेत्रोवा और मार्टिना हिंगिस के खिलाफ तीन टॉप-टेन जीतें दर्ज कीं थीं।

सानिया ने 2007 की शुरुआत जोरदार तरीके से की। उन्होंने होबार्ट के सेमीफाइनल, ऑस्ट्रेलियन ओपन के दूसरे दौर, पटाया में सेमीफाइनल और बैंगलोर में क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। 2007 के समर हार्डकोर्ट सीज़न के दौरान मिर्जा के करियर के बेस्ट रिजल्ट आए। साल 2007 यूएस ओपन सीरीज़ स्टैंडिंग में आठवें स्थान पर रही और दुनिया की 27 वें नंबर की अपनी सर्वोच्च एकल रैंकिंग पर पहुंचीं।

मिर्जा ने बीजिंग में 2008 के समर ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दाहिने कलाई की चोट के कारण इवेता बेनेसोवा के खिलाफ मैच में से उन्हें एकल से हटा दिया गया था। युगल के लिए, उन्हें सुनीता राव के साथ पहले दौर में वॉकओवर मिला, लेकिन दूसरे दौर में रूस से हार गईं।

2009 ऑस्ट्रेलियन ओपन में, उन्होंने मार्टा डोमचोस्का के खिलाफ अपना पहला दौर मैच जीता था। डबल्स में वह वानिया किंग के साथ पहले दौर में हार गईं। लेकिन मिश्रित युगल में मिर्जा ने अपना पहला ऑस्ट्रेलियन ओपन ग्रैंड स्लैम खिताब नाम किया। महेश भूपति के साथ साझेदारी करते हुए, उन्होंने फाइनल में नथाली डेची और एंडी राम को हराया।

2013-2014 : टॉप 5 डबल्स सफलता हाथ लगी

मिर्जा ने अपने 2013 सीजन की शुरुआत पहले टूर्नामेंट में ही बेथानी माटेक-सैंड्स के साथ ब्रिस्बेन में खिताब से की थी। यह जोड़ी तब अप्रत्याशित रूप से ऑस्ट्रेलियन ओपन के पहले दौर में हार गई, मिर्जा हालांकि बॉब ब्रायन के साथ 2013 ऑस्ट्रेलियन ओपन मिश्रित युगल के क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई। माटेक-सैंड्स और मिर्जा ने फिर फरवरी में दुबई चैंपियनशिप में युगल खिताब जीता। इसके बाद मिर्जा ने शेष सीज़न के लिए कारा ब्लैक के साथ भागीदारी की और इस जोड़ी ने टोक्यो में अपनी पहली आउटिंग में अपना पहला खिताब जीता

सानिया ने दक्षिण कोरिया के इंचियोन में 17वें एशियाई खेलों में स्वर्ण और कांस्य पदक जीता। उन्होंने साकेत माइनेनी के साथ जोड़ी बनाकर चीन की सीन यिन पेंग और चान हाओ-चिंग को हराकर मिश्रित युगल टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने महिला युगल टूर्नामेंट में कांस्य पदक भी जीता, जहां उन्होंने प्रार्थना थोम्बरे के साथ जोड़ी बनाई।

2015 से 2019 तक का करियर

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मिर्जा ने अपने 2015 सीज़न की शुरुआत युगल रैंकिंग में नंबर 6 पर की। कारा ब्लैक ने 2015 के सीमित सीज़न के लिए जाने का फैसला करने के बाद चीनी ताइपे से तत्कालीन विश्व नंबर 5 हसीह सु-वेई के साथ एक नई साझेदारी शुरू की। कुछ समय बाद हसीह सु-वेई के साथ पार्टनरशिप खत्म करने के बाद उन्होंने लेजेंड मार्टिन हिंगिस के साथ साझेदारी बनाई थी। मिर्जा और हिंगिस ने अप्रैल 2015 में केसी डेलाक्वा और दरिजा जुराक को हराकर फैमिली सर्कल कप का दोहरा खिताब जीता और खिताब जीतने के साथ ही मिर्जा डब्ल्यूटीए की युगल रैंकिंग में विश्व नंबर 1 स्थान पाने वाले पहले भारतीय बन गए।

मिर्जा और हिंगिस ने ब्रिस्बेन और सिडनी में टूर्नामेंट जीतकर ऑस्ट्रेलिया में अपने 2016 WTA टूर की शुरुआत की। ऑस्ट्रेलियन ओपन में उन्हें पहली वरीयता दी गई और उन्होंने डबल्स खिताब जीता जो कि मिर्जा का तीसरा ग्रैंड स्लैम खिताब है।

अगस्त 2016 में, मिर्जा और हिंगिस ने अपने पिछले कुछ अंडर-बराबर प्रदर्शनों का हवाला देते हुए एक टीम के रूप में विभाजित होने के अपने पारस्परिक निर्णय की घोषणा की, जिसमें सिंगापुर में 2016 का डब्ल्यूटीए फाइनल एक साथ उनका आखिरी कार्यक्रम था। मिर्जा ने 2016 के अंत में बारबोरा स्ट्राइकोवा के साथ भागीदारी की, जिसमें उन्होंने दो खिताब जीते। 2017 में, उनका एकमात्र खिताब ब्रिस्बेन में आया, जहां उन्होंने अपने दोस्त माटेक-सैंड्स के साथ खेला। सानिया ने आखिरी टूर्नामेंट चाइना ओपन खेला था, जिसमें वह हार गई थीं। 

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2018 में उन्होंने घोषणा की थी वह मां बनने वाली हैं और उसके बाद उन्होंने अपने बेटे के लिए एक ब्रेक लिया था। पिछले साल 2020 में उन्होंने फिर से वापसी की और होबार्ट इंटरनेशनल में अपने साथी नादिया किचेनोक के साथ टूर्नामेंट जीता था।

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टोक्यो ओलंपिक में अंकिता रैना के साथ बनी जोड़ी

टोक्यो ओलंपिक्स 2021  में टेनिस के महिला डबल्स में सानिया मिर्जा के साथ अंकिता रैना होंगी। सानिया का यह चौथा ओलंपिक है। वहीं, अंकिता पहली बार ओलंपिक में खेलेंगी। सानिया रिकॉर्ड चार ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली भारत की पहली महिला एथलीट होंगी। उन्होंने पहली बार 2008 के बीजिंग ओलंपिक में हिस्सा लिया था। इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा, '34 साल की उम्र में अपने चौथे ओलंपिक के लिए मुझे बेहद गर्व महसूस हो रहा है। अपने करियर की शुरुआत से ही मैं उसका सपना देखती थी। ओलंपिक में खेलना हर एथलीट का सपना होता है।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें किसी ने पिछले ओलंपिक में यह कहा होता कि उनके पास ओलंपिक में जाने का एक और मौका है, तो उन्हें बड़ी हंसी आती। लेकिन वह फिर एक बार ओलंपिक में अपना प्रदर्शन दिखाएंगी, जिसके लिए वह खुश हैं।

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भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा जितना अपने खेल को लेकर आश्वस्त हैं, उतना ही हम उन्हें लेकर आश्वस्त हैं। चौथी बार ओलंपिक का हिस्सा बनने के लिए हम उन्हें ढेरों बधाई देते हैं। आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर करें। टोक्यो ओलंपिक्स 2021 का हिस्सा बनीं अन्य महिला खिलाड़ियों के बारे में जानने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।

 

Image Credit : www.instagram.com/saniamirza