13 अगस्त को नागपंचमी का त्योहार है। यह त्योहार खास इसलिए होता है क्योंकि इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करके आप अपने घर में सुख-समृद्धि के साथ-साथ कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष से भी मुक्ति पा सकते हैं। 

भोपाल के ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखार्विंद विशेषज्ञ शास्त्री विनोद सोनी पोद्दार कहते हैं, 'इस पर्व पर विशेष रूप से कुंडली में यदि कालसर्प दोष, अंगारक योग, चांडाल योग से जुड़े दोष होते हैं, तो उनकी शांति के लिए पूजा कराई जाती है।'

इतना ही नहीं पंडित जी यह भी बताते हैं, 'शनि और मंगल दोष के बाद मनुष्य के जीवन को सबसे ज्यादा राहु और केतु के दोष प्रभावित करते हैं। कालसर्प दोष भी कुंडली में राहु और केतु की स्थिति पर निर्भर करता है। वैसे तो भाद्रपद मास की अमावस्या के दिन कालसर्प दोष के निवारण हेतु किए गए उपाय सबसे ज्यादा सकारात्मक फल देते। मगर इस दोष के निवारण के उपाय और पूजा नागपंचमी के दिन भी की जा सकती है।'

पंडित जी ने हमें यह भी बताया कि कालसर्प दोष क्या होता है और इसके लक्षण एवं उपाय क्‍या हो सकते हैं?

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क्या होता है कालसर्प दोष? 

कुंडली में कालसर्प दोष तब बनता है, जब राहु-केतु एक और और अन्‍य सात ग्रह एक ओर हो जाएं। यदि ऐसी स्थिति है तो कालसर्प योग बनता है। यह भी एक तरह का दोष है, जिससे जीवन में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।  

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कालसर्प दोष के लक्षण 

अगर आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है, तो आपको इसके लक्षण रोजमर्रा की जीवनशैली में नजर आने लगेंगे। पंडित जी कुछ मुख्‍य लक्षण हमें बताते हैं- 

  • नींद में अगर काला नाग नजर आए, तो इसे कालसर्प दोष का एक बड़ा लक्षण माना जा सकता है। 
  • अगर आप आवश्यक कार्यों में सही निर्णय न ले पाएं और आपका हर काम बिगड़ जाए तो यह भी एक लक्षण हैं। 
  • अगर आपको मानसिक तनाव (मानसिक तनाव दूर करने के 2 योगासन) हो रहा हो, तो आपकी कुंडली में कालसर्प दोष हो सकता है। 
  • परिवार या जीवनसाथी के साथ विचार न मिलना और कलह होना भी इसका एक लक्षण हैं। 
  • कार्यक्षेत्र में आपके विरोधियों का प्रबल होना और गुप्त शत्रु बनना भी कालसर्प दोष का लक्षण है। 
  • अगर आप बहुत अधिक परिश्रम कर रहे हैं, मगर फल उसके मुताबिक नहीं मिल पा रहा है तो हो सकता है कि कुंडली में कालसर्प दोष हो। 
 

कालसर्प दोष के निवारण के उपाय 

  1. आपको नियमित सुबह-शाम ॐ नम: शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। इतना ही नहीं, नागपंचमी के दिन आपको शिवलिंग का दूध से रुद्राभिषेक करना चाहिए। 
  2. आपको कालसर्प दोष के निवारण के लिए नागपंचमी के दिन राहु की शांति के उपाय और इसके बीज मंत्र का जाप करना चाहिए। आप किसी शिव मंदिर में राहुकाल में इसकी पूजा भी करवा सकते हैं। 
  3. नागपंचमी के दिन अगर आप श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करेंगे, तो भी आपको फायदा होगा। इसके साथ ही आप अपने घर में मोर पंख जरूर रखें। 
  4. किसी नाग मंदिर में आपको चांदी के नाग और नागिन के जोड़े का दान करना चाहिए। इससे भी कालसर्प दोष से हो रही कठिनाइयां कम हो जाती हैं। 
  5. नागपंचमी के दिन आपको शिव तांडव के स्‍तोत्र का पाठ करना चाहिए। 

नोट- पंडित जी कहते हैं, 'जरूरी नहीं कि आप नाग के प्रत्यक्ष रूप की पूजा करें। किसी भी जीव को परेशान करने से आपको लाभ की जगह हानि ही होगी। नाग की पूजा के लिए आप उसकी तस्वीर का प्रयोग भी कर सकते हैं। आपकी आस्था सच्ची होनी चाहिए बस।' 

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