बिहार का इतिहास इस युद्ध के बिना है अधूरा, जानें इसके बारे में

इस लेख में उस युद्ध के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जिसे बिहार के साथ भारत के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध माना जाता है।
Updated:- 2022-04-11, 17:56 IST
image

भारत की धरती एक नहीं बल्कि कई युद्ध की साक्षी है। प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल तक यहां ऐसे कई युद्ध हुए जिसे आज भी भारतीय इतिहास से जोड़कर देखा जाता है। तराइन का युद्ध, कलिंग की लड़ाई, तराइन का द्वितीय युद्ध, पानीपत का प्रथम युद्ध, खानवा का युद्ध, हल्दीघाटी का युद्ध और प्लासी का युद्ध आदि कई युद्ध शामिल हैं जो भारतीय इतिहास के पन्नों में आज भी मोटे-मोटे अक्षरों में दर्ज हैं। भारत में हुए हर युद्ध की अपनी एक अलग ही कहानी रही है।

आज जिस युद्ध के बारे में जिक्र करने से जा रहे हैं उसके बारे में कहा जाता है कि 'युद्ध ने बिहार के साथ-साथ भारत की दशा और दिशा को निर्धारित कर दिया'। जी हां, हम बात कर रहे हैं 'बक्सर युद्ध' के बारे में। इस लेख में हम आपको बक्सर युद्ध के बारे में कुछ रोचक जानकारी देने जा रहे हैं जिन्हें आप भी ज़रूर जानना चाहेंगे। आइए जानते हैं।

बक्सर युद्ध के कारण 

importance of  battle of buxar in indian history Inside

कहा जाता है कि बक्सर का युद्ध साल 1963 में ही आरंभ हो चुका था लेकिन मूल रूप से यह युद्ध 22 अक्टूबर 1964 में लड़ा गया। कहा जाता है कि प्लासी के युद्ध के बाद अंग्रेजों ने मीर कासिम को बंगाल का नवाब बना दिया। वो चाहते थे कि गद्दी पर कोई अयोग्य व्यक्ति बैठे ताकि सत्ता पर नियंत्रण रख सके। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ और मीर कासिम योग्य निकला और अंग्रेजों को लगान देने से मना कर दिया।

इसे भी पढ़ें: आजादी की लड़ाई से लेकर दर्जी से शादी करने तक, कुछ ऐसी रही एक्ट्रेस दीना पाठक की जिंदगी

मीर कासिम के द्वारा व्यापार पर नियंत्रण

history of buxar Inside

सत्ता पर बैठते ही मीर कासिम ने अवैध व्यापार को रोकने के लिए कई नियम लगा दिए जिसके चलते अंग्रेज काफी परेशान होने लगे। कई चौकियों पर दिन-रात जांच-पड़ताल होने लगी। कहा जाता है कि इससे कंपनी की भ्रष्ट आय रूक गई। कुछ समय बाद मीर कासिम को सत्ता से हटाने की मांग भी उठने लगी और अंत में अंग्रेजों ने मीर कासिम को हरा दिया और उनकी जगह मीर जाफर को नवाब बना दिया गया। (महानदी का इतिहास)

 

मीर कासिम और शुजाउद्दौला 

मीर कासिम हराने के बाद बिहार और अवध के नवाब शुजाउद्दौला के पास पहुंचे। इसी बीच मुगल सम्राट शाह आलम भी अवध में मौजूद थे। कहा जाता है कि तीनों में मिलकर अंग्रेजों से संघर्ष करने का निश्चय किया। वहीं दूसरी ओर अंग्रेज़ी सेना का नेतृत्व उनका कुशल सेनापति 'कैप्टन मुनरो' कर रहा था। दोनों सेना बिहार में बलिया से लगभग 40 किमी दूर 'बक्सर' नमक स्थान पर आमने-सामने आ पहुंची। (इन 5 महारानियों ने चटाई थी अंग्रेजों को धूल)

22 अक्टूबर 1964 के इस युद्ध में मीर कासिम,  शुजाउद्दौला और मुगल सम्राट शाह आलम की हार हो गई। कहा जाता है कि इस युद्ध से पहले ही अंग्रेजों ने अवध के नवाब की सेना से असद ख़ा, (रोहतास का सूबेदार) और जैनुल अबादीन को धन का लालच देकर अलग कर दिया था।

 

इसे भी पढ़ें: इन 10 प्रसिद्ध हिंदी उपन्यास में से आप किसे पढ़ना पसंद करेंगे

युद्ध का असर

about battle of buxar Inside

ऐसा माना जाता है कि इस हार के बाद मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय, मीर क़ासिम और नवाब शुजाउद्दौला, तीनों पूर्ण रूप से कठपुतली शासक हो गये थे। इस युद्ध की क्षतिपूर्ति मे बंगाल से 50 लाख रूपया वसूल किया गया था। ससे भारतीय शक्तियों की प्रतिष्ठा गिरी और क्रमशः पतनशील हो गई। कहा जाता है इस विजय के बाद अंग्रेजों का दबदबा और भी बढ़ गया। हालांकि, इस युद्ध में कितने लोग मरे इसका कोई अध्रिकारिक अकड़ा नहीं है। 

अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर जरूर शेयर करें और इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit:(@wiki,bihar)

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।