हैदराबाद पुलिस ने महिला सुरक्षा के लिए 14 प्वाइंट्स की एडवाइजरी जारी की है। पहली नजर में यह एडवाइजरी कम फरमान ज्यादा नजर आ रहा है। साथ में इसमें गुनहगारों के लिए क्या कदम उठाए गए हैं या उनके साथ क्या सलूक किया जाएगा नहीं बताया गया है बल्कि महिलाओं को क्या करना चाहिए इस पर ज्यादा फोकस है।

हैदराबाद, निर्भया जैसे हादसों ने सरकारों को कई बार झकझकोरा है, संसद में भी कई बार इन मुद्दों को उठाया गया है। संसद, विधानसभाओं में जब भी नेता लोग इस बारे में बोलते हैं लगता है नारी सम्मान जितना मेरे देश में होता है उतना तो खुदा के घर में भी नहीं होता होगा। लेकिन क्या सरकारों ने कुछ सबक लिया, ऐसा नहीं लगता। सारे नियम कानून बनाते समय संविधान की धाराएं आड़े आ जाती हैं, मानवाधिकार जैसे कानून खड़े हो जाते हैं।

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जांच में अब तक क्या हुआ इस पर कुछ बताने के बजाय पुलिस एडवाइजरी जारी करती है। क्या पुलिस की यह जांच को भटकाने की कोई साजिश तो नहीं है। हैदराबाद पुलिस ने जो एडवाइजरी जारी की है उसमें ऐसा लग रहा है कि दोष महिला का था। क्या पुलिस को पता है कि महिला ने परिवार को ऑफिस जाने और आने का टाइम नहीं बताया। पुलिस की यह एडवाइजरी आखिर किस और इशारा कर रही है। शायद पुलिस भूल गई कि अपनी करतूत के कारण ही अपने ही महकमें के पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर चुकी है।

एडवाइजरी में महिलाओं को लोकेशन शेयर करने के लिए तो कहा जा रहा है लेकिन पुलिस को क्या करना इस पर चुप है। पुलिस ने लोकेशन शेयर करने वाले कितने लोगों की मदद की, नहीं बताया। पुलिस ने यह नहीं बताया कि वो गुनहगारों से कैसे निपटेगी।

hyderabad police advisory after gangrape () 

एडवाइजरी में सफर करते समय टैक्सी, ऑटो का नंबर शेयर करने को कहा जा रहा है जबकि इनके ड्राइवरों के लिए कोई गाइड-लाइन जारी नहीं की हैं। पुलिस की नजर में तो महिलायें ही दोषी हैं जो टैक्सी, ऑटो में सफर करती हैं। क्या पुलिस कोई ऐसी व्यवस्था नहीं बना सकती कि बीच-बीच में ट्रैक्सी, ऑटो को रोककर उसमें सफर करने वाले लोगों से पूछ सके।

पुलिस एडवाजरी में पेट्रोलिंग कार की मदद मांगने को कहा गया है जबकि हैदराबाद पुलिस से तो पीड़िता के परिवार ने मदद मांगी थी। पीड़िता के परिवार ने तो अपना फर्ज निभाया था। पुलिस के पास शिकायत दर्ज करने परिवार पहुंचा था। पुलिस ने पीड़िता के परिवार की किस तरह मदद की सबसे सामने है।

एक तरफ हमारा समाज महिला बराबरी की बात करता है दूसरी तरफ सुरक्षा देने के नाम पर सिर्फ और सिर्फ एडवाइजरी।

धन्य हो हैदराबाद पुलिस।

सुनसान रास्तों, अंजान जगहों में महिलाओं को जाने से बचने को कहा गया है जबकि पुलिस ऐसे जगहों के बारे में क्या सुरक्षा उपाय करती है और करेगी, नहीं बताया गया है। मतलब कल को फिर से कोई हादसा हो तो पुलिस को दोष ना दिया जाए। पुलिस ने तो अपने बचाव में ऐसी जगहों के लिए पहले ही एजवाइजरी निकाल दी।

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पुलिस अपनी एडवाइजरी में कहती है कि बदमाशों के बारे में बताएं। हम मिलकर क्राइम को रोकेंगे। पुलिस अपनी नाकामियों को छुपाती रहती है। बदमाशों के बारे में पुलिस को सब पता होता है। पुलिस बताए तो सही वह इस बदमाशों का क्या करती है, आखिर ये बदमाश समाज के बीच में कैसे खुलेआम धूमते हैं। क्या पुलिस इनका खुलासा करेगी कि आखिर इन बदमाशों को किनकी शह मिली होती है।

भगवान करे किसी पुलिसकर्मी के घर की महिलाओं के साथ कोई दुर्व्यवहार ना हो। लेकिन एडवाइजरी जारी करने से पहले एक बार भी पुलिस ने सोच लिया होता कि अगर उनके परिवार के किसी महिला के साथ भी यही हादसा होता तो क्या तब भी एडवाइजरी ही निकालती।

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एडवाइजरी में गुनहगारों के लिए कोई सबक नहीं है। पुलिस की खामियों नहीं गिनाई गई हैं। महिलाओं के प्रति यह एडवाइजरी हमारे समाज द्वारा महिलाओं के असंवेदनशीलता ही दर्शाता है। अंत में, दोष भी महिला के ऊपर ही मढ़ दिया। 

ऐसे में पुलिस से इस केस के परिणाम की उम्मीद करना बेकार है।