हमारे देश में महिलाओं को लेकर कई तरह की हिंसा होती है। किसी न किसी तरह से उन्हें प्रताड़ित किया जाता है और सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि महिलाओं को ये मालूम ही नहीं होता कि उनके साथ क्या हो रहा है। वो इसे अपनी जिंदगी मानकर आगे बढ़ती रहती हैं। एक्ट्रेस एकावली खन्ना से इस बारे में हमने बात की। फिल्म 'अंग्रेजी में कहते हैं,' 'जेड प्लस' और ऑस्कर के लिए नामांकित नॉर्वीजन फिल्म 'What people will say' में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकीं एकावली स्वभाव से बहुत शांत और सरल हैं, लेकिन घरेलू हिंसा के मामले में उन्होंने काफी कुछ कहा। 

एकावली खन्ना जो खुद घरेलू हिंसा को बहुत करीब से देख चुकी हैं वो इसके बारे में एक तय सोच रखती हैं। महिलाओं और उनके साथ हो रही किसी भी तरह की हिंसा के मामले में एकावली ने ये कहा-  

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हमारे देश में हिंसा की कोई परिभाषा नहीं है-  

एकावली ने घरेलू हिंसा या महिलाओं के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा को लेकर एक बहुत ही वाजिब बात कही है जिसे शायद हम सब अपने आस-पास देख सकती है। उनका मानना है कि, 'हमारे देश में घरेलू हिंसा की कोई तय परिभाषा नहीं है। किसी को भी ठीक से इस लफ्ज़ का मतलब नहीं है। हिंसा सिर्फ लोगों को मारना, लोगों को फिजिकली परेशान करना ही नहीं है। हिंसा का मतलब कई तरह से निकाला जा सकता है और हमारे देश में महिलाओं को किसी न किसी तरह की घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा है।' 

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हां, ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें मार-धाड़ बर्दाश्त करनी पड़ रही है, फिजिकल एब्यूज झेल रही हैं। लेकिन इसके अलावा भी बहुत कुछ है।  

किसी को गाली देना, मानसिक प्रताड़ना देना भी तो घरेलू हिंसा-  

एकावली ने इस बारे में कहा कि, 'किसी को गाली देना, मानसिक तौर पर परेशान करना, रोज़ाना किसी का मज़ाक बनाना भी एक तरह की हिंसा है जिसे कोई बड़ा जुर्म नहीं माना जाता है। वो किसी फिजिकल हिंसा से कम नहीं। भारतीय परिवारों में तो ये जरूरी नहीं कि सिर्फ पति ही हिंसा करे। सबसे अफसोस की बात ये है कि औरतें भी किसी औरत के साथ इस तरह का काम करती हैं। सास, ननंद आदि भी इस तरह का काम करती हैं।' 

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किसी का दिल दुखाना उतना ही बुरा है जितना किसी को मारना-  

एकावली अपनी सोच में समाज के उन पहलुओं को भी रखती हैं जिन्हें शायद अधिकतर लोग नजरअंदाज़ कर देते हैं, जहां एक ओर सेलेब्स को कम भावुक समझा जाता है वहीं एकावली इस मामले में काफी आगे हैं। वो आगे कहती हैं, 'किसी का दिल दुखाना भी उतना ही बुरा है जितना किसी को मारना। और बहुत बुरी बात है कि इसे हमारे देश में आम माना जाता है। महिला सशक्तिकरण यहां किसी को दिखाई नहीं देता।' 

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हिंसा का कोई जस्टिफिकेशन नहीं हो सकता-  

घरेलू हिंसा को हमारे देश में ऐसे देखा जाता है कि जैसे ये बहुत आम हो। खुद ही सोच लीजिए कि आपके आस-पास घरेलू हिंसा को कितना जस्टिफाई किया जा रहा है। इस मामले में एकावली कहती हैं, 'घरेलू हिंसा को या किसी भी तरह की हिंसा को कभी जस्टिफाई नहीं किया जा सकता है। आजकल लोग बड़ी आसानी से कह देते हैं कि, 'लड़की ने ही कुछ किया होगा, या गुस्सा दिलाया होगा' ये सबसे गलत बात है। हिंसा का कोई जस्टिफिकेशन हो ही नहीं सकता है। कोई हिंसा कर रहा है तो वो गलत कर रहा है। महिलाओं के सम्मान में अगर कुछ नहीं किया जा सकता है तो कम से कम अगर उनपर हो रही हिंसा को ऐसे जस्टिफाई न किया जाए तो ही सही होगा। हिंसा के प्रति कैजुअल व्यवहार और उसका जस्टिफिकेशन बिलकुल गलत है।'

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24 साल की उम्र में तलाक और दो बच्चों की जिम्मेदारी के बाद भी जिंदगी को समझा खुशहाल- 

एकावली खन्ना उन सेलेब्स में से एक हैं जिन्होंने बहुत करीब से अपनी जिंदगी में बहुत कड़वाहट देखी है फिर भी वो कभी हारी नहीं। उन्होंने खुलकर जीना कभी नहीं छोड़ा। एकावली अपने पिछले वक्त के बारे में बात नहीं करना चाहतीं, वो आगे बढ़ना चाहती हैं और आगे देखना चाहती हैं। एकावली की खूबसूरती सिर्फ उनकी सूरत या आवाज़ में नहीं बल्कि खूबसूरत व्यक्तित्व में भी है। उनका कहना है कि वो अपने दो छोटे बच्चों के साथ हमेशा आगे बढ़ने के बारे में सोचती थीं।  

एक बच्चे को गोद लिए और दूसरे का हाथ थामें जिंदगी जी रही थीं। उन्हें घूमने का शौख था तो वो कई टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर गईं और अपनी जिंदगी में कभी पीछे पलटकर नहीं देखा। ये है उनकी हिम्मत। वो यही प्रेरणा देती हैं बाकी महिलाओं को भी।