चेक बाउंस का सिबिल स्कोर पर क्या पड़ता है असर? जानें

आजकल लोग अपने पास कैश नहीं रखते। हाथों में मोबाइल ही काफी है। एक बटन दबाया और सारे पेमेंट मिनटों में हो जाते हैं, लेकिन बिजनेस में बड़े लेनदेन डिजिटल की जगह लोग कैश में करते हैं, क्योंकि कैश उनके पास नहीं होता है। ऐसे में चेक के माध्यम से कैश को निकाला जाता है, लेकिन सवाल यह है कि अगर चेक बाउंस हो जाए तो इसका कितना प्रभाव आपके सिविल स्कूल पर पड़ेगा? लोग चेक बाउंस को हल्के में लेते हैं, जबकि, इसके कारण उन्हें फ्यूचर में कानूनी कार्रवाई से भी गुजरना पड़ सकता है। ऐसे में चेक बाउंस का सिबिल स्कोर पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसके बारे में हम इस लेख में बताने जा रहे हैं। जानते हैं आगे...
चेक बाउंस का सिबिल स्कोर पर प्रभाव
चेक बाउंस का सिबिल स्कोर पर कुछ परिस्थितियों में असर पड़ता है। हर परिस्थिति में सिबिल स्कोर प्रभावित नहीं होता। ये परिस्थितियां निम्न प्रकार है-

- जब बिजनेस लेनदेन के लिए चेक दिया जाता है और वह बाउंस हो जाता है तो इस कारण सिबिल स्कोर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। ऐसे मामलों में बाउंस होने की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को देना अनिवार्य नहीं होता है। बता दें कि क्रेडिट ब्यूरो का काम लोन या क्रेडिट कार्ड भुगतान से संबंधित होता है। ऐसे में लेनदेन के बाउंस से उनका कोई लेना देना नहीं होता इसलिए सिबिल स्कोर पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- अगर कोई चेक क्रेडिट कार्ड का बिल या किसी EMI को भरने के लिए दिया गया है और वह बाउंस हो जाता है तो इसकी जानकारी बैंक सीधे क्रेडिट ब्यूरो को दे देता है। ऐसे में चेक बाउंस के चलते आपका स्कोर एकदम खराब हो सकता है। जब बार-बार ऐसी खबर क्रेडिट ब्यूरो को मिलती है तो बैंक आपको गैर जिम्मेदार समझ सकती है और आपको जीवन में कभी भी लोन ना मिले, ऐसी कैटेगरी में डाल देती है।
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वहीं, अगर मामला थोड़ा सा गंभीर हो जाए और कोर्ट में चला जाता है तो इसके कारण भविष्य में होने वाली वित्तीय डील्स और लोन एप्लीकेशंस भी रिजेक्ट हो सकती हैं।
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कुछ जरूरी बातें
- अगर आप किसी को चेक दे रही हैं तो उसमें केवल उतना ही अमाउंट भरें जितना आपके बैंक में है या आपके पास आने वाला है।
- यदि आप चेक से ईएमआई या बिल चुका रही हैं तो इसमें देरी न करें।
- एक बार चेक बाउंस होने पर स्थिति संभाली जा सकती है, लेकिन बार-बार ऐसी स्थिति बैंक के साथ आपके संबंधों को खराब कर सकती है।
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