चाहें किसी ब्रांड के स्टोर पर जाओ या फिर ऑनलाइन शॉपिंग करो कई बार हमें बहुत अच्छा डिस्काउंट ऑफर दिया जाता है। कई बार ये समझ नहीं आता कि इतना डिस्काउंट आखिर कंपनियां देती कैसे हैं? ये कैशबैक, डिस्काउंट, नो कॉस्ट ईएमआई का लॉजिक काफी अजीब लगता है कि आखिर क्यों कस्टमर को इतने कम दाम में सामान मिल रहा है। इसका गणित समझना यूजर्स को जरूरी है। 

कई बार इसे बिना समझे हम शॉपिंग कर लेते हैं और डिस्काउंट और स्कीम का पूरा फायदा नहीं उठा पाते। ऑनलाइन शॉपिंग हो या किसी स्टोर में जाकर कुछ खरीदना हो। इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। 

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कैसे मिलता है इतना डिस्काउंट- 

1. किसी एक प्रोडक्ट पर नहीं तय होता मुनाफा-

सेल के समय किसी एक प्रोडक्ट पर मुनाफा नहीं तय होता। इसे ऐसा समझिए कि एक प्रोडक्ट पर डिस्काउंट देकर कस्टमर बेस बनाया गया और फिर दूसरे प्रोडक्ट पर प्रॉफिट मार्जिन बढ़ा दिया। यही होता है जब Upto 70% डिस्काउंट लिखा जाता है। यानी किसी एक या दो प्रोडक्ट पर इतना डिस्काउंट होगा और दूसरे पर नहीं। इसे कस्टमर पैसे बचाने का तरीका मानते हैं और कंपनियां प्रोडक्ट बेस का। 

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2. कई बार घाटे में जाती हैं कंपनियां- 

कई बार कंपनियां घाटे में जाती हैं और सेल में डिस्काउंट देती हैं। लेकिन ये घाटा किसी एक के लिए नहीं होता। उदाहरण के तौर पर मैं किसी ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट से कुछ खरीद रही हूं वो पहले ही डिस्काउंट में है, लेकिन पेटीएम पर और डिस्काउंट मिल रहा है। ऐसे में पेटीएम का डिस्काउंट मिलाकर ऑनलाइन साइट और पेटीएम दोनों थोड़ा घाटा लेंगी, लेकिन पेटीएम का कैशबैक उसी वॉलेट में आएगा जो अन्य रिटेलर्स पर इस्तेमाल होगा। ऐसे में पेटीएम एक जगह से घाटा उठाकर दूसरी जगह फायदा लेगा और ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट को एक लॉयल कस्टमर मिल जाएगा। 

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3. कभी भी बदल सकती है कीमत- 

यहां बात उन टर्म्स एंड कंडीशन की हो रही है जिन्हें कोई नहीं पढ़ता। अधिकतर ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स में ये लिखा होता है कि प्रोडक्ट्स की कीमत कभी भी ऊपर नीचे हो सकती है। ये बदलाव कभी भी हो सकता है। इसी के साथ, अगर टेक्निकल एरर, सेल टाइम, डिस्काउंट, टाइपिंग की गलती या बेचने वाले के द्वारा दी गई गलत जानकारी के कारण कुछ बदलाव आते हैं तो भी ऑर्डर किया हुआ सामान कैंसिल किया जा सकता है। 

4. नो कॉस्ट ईएमआई-

वैसे नो कॉस्ट ईएमआई अब कम ही जगह उपलब्ध है, लेकिन इसका अपना गणित है। मुनाफा डाउनपेमेंट में नहीं बल्कि ब्याज में कमाया जाता है। जितना ब्याज होता है अक्सर उतना ही शॉपिंग डिस्काउंट दे दिया जाता है। ऐसे में यूजर को लगता है कि उसने कम कीमत पर सामान खरीदा लेकिन ऐसा होता नहीं है। हां, कई बार वाकई इसमें यूजर को फायदा मिलता है, लेकिन उस समय डिस्काउंट देने वाली कंपनियां किसी और थर्ड पार्टी के जरिए नो-कॉस्ट ईएमआई देती हैं। 


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क्या करें शॉपिंग करते समय-

1. पेमेंट के तरीके का ध्यान रखें। कई बार किसी एक तरह के पेमेंट मोड पर ज्यादा डिस्काउंट मिल रहा होता है। उसे देखें।

2. एक्सचेंज ऑफर का ध्यान रखें। कई बार उसमें यूजर्स को नया प्रोडक्ट खरीदने से ज्यादा फायदा होता है। 

3. एक्सक्लूसिव कोड का ध्यान रखें। बिगबाजार से लेकर फ्लिपकार्ट तक सभी इसे फॉलो करते हैं। अपने कार्ड पर प्वाइंट्स चेक करें डिस्काउंट ज्यादा मिलेगा। 

4. ज्यादा डिस्काउंट के चक्कर में ओवर शॉप न करें। जितना जरूरी है उतना ही खरीदें। 

5. देखते ही तुरंत खरीदने से बचें। डिस्काउंट कई बार छलावा हो सकता है। इसलिए ऊपर दिए गए गणित लगाने के बाद ही देखें। 

किसी भी सेल के आने से पहले लिस्ट बना लें ताकि डिस्काउंट के बहाव में बह न जाएं आप। ऐसे में ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स आदि पर डिस्काउंट तो मिलेगा ही साथ ही एक्स्ट्रा सामान खरीदने से भी बचेंगे। ऐसे में गिफ्ट आदि के लिए भी सामान खरीदा जा सकता है।