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जानें 300 साल पुराना अलवर में स्थित शिव मंदिर क्यों था खास?

अलवर के राजगढ़ में स्थित 300 साल पुराने भगवान शिव के मंदिर के बारे में जानें कुछ रोचक बातें। 
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  • Hema Pant
  • Editorial
Published -23 Apr 2022, 13:30 ISTUpdated -25 Apr 2022, 16:58 IST
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राजस्थान का नाम सुनते हैं वहां की मिट्टी, तपती हुई धूप और बड़े-बड़े किले नजर आने लगते हैं। इस शहर का अपना एक अलग इतिहास रहा है। यही कारण है कि जो भी यहां जाता है, वह यहीं का हो जाता है। राजस्थान में उदयपुर, जैसलमेर , जयपुर और अलवर सबसे प्रसिद्ध शहरों में से एक है। लेकिन राजस्थान में बसा अलवर शहर बेहद खास है। यह राजस्थान के उत्तर पूर्व में अलवर की पहाड़ियों पर बसा हुआ एक खूबसूरत शहर है।

अलवर शहर राजस्थान के सबसे पुराने शहर में से एक है। यह शहर राजपूतों का प्रतिनिधित्व करता है। इस शहर की परंपराओं का पता विराटनगर के क्षेत्र में लगाया जा सकता है, जो लगभग 1500 ईसा पूर्व पुराना है। अलवर में आपको कई प्रसिद्ध किले देखने को मिलेंगे।

इसके अलावा यहां हजारों की संख्या में मंदिर भी मौजूद हैं। बता दें कि हाल ही में अलवर के राजगढ़ में स्थित भगवान शिव के मंदिर के ढांचे को गिराया जा चुका है। यह मंदिर करीब 300 साल पुराना था। आज इस आर्टिकल में हम आपको अलवर के राजगढ़ में स्थित 300 साल पुराने शिव मंदिर के बारे में कुछ खास बातें बताएंगे। इस मंदिर का महत्व और इतिहास जानने के लिए हमने कीर्ति पाल सिंहर पारमार से बात की है, जो कि एक हिस्टॉरियन हैं। चलिए जानते हैं क्या खास है इस मंदिर में।

300 साल पुराना था मंदिर

shiv temple history

अलवर के राजगढ़ में भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर था। बता दें कि राजगढ़ में स्थित यह शिव मंदिर करीब 300 साल पुराना था। यह मंदिर प्रताप सिंह और भक्तावर सिंह के समय में बनाया गया था। इस मंदिर ने समय और इतिहास की मार सही है। लेकिन आज भी यह मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है। इसके अलावा पुरात्तव के लिहाज से भी यह मंदिर खास रहा है। 

शिव भगवान के परिवार को समर्पित था मंदिर

बता दें कि यह मंदिर भगवान शिव के परिवार को समर्पित था। इस मंदिर में मां पार्वती, कार्तिके और गणेश जी की मूर्ति स्थापित थीं। जिसके कारण यह मंदिर राजगढ़ के लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध था। लेकिन मंदिर का ढांचा गिराने से पहले ही मंदिर के पुजारी द्वारा यहां की मूर्तियों को हटाया जा चुका था। 

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स्थानीय लोग इस मंदिर में जाकर करते थे पूजा

इस मंदिर में स्थानीय लोग पूजा करने जाते थे। सावन के महीने में इस मंदिर में अलग रौनक देखने को मिलती थी। ऐसा इसलिए क्योंकि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इसलिए इस महीने को बेहद खास माना जाता है।(शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का तरीका)

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चूना पत्थर से बनाया गया था मंदिर

history of shiv temple

बता दें कि शिव भगवान का यह मंदिर चूना पत्थर से बना था। पहले के समय में ज्यादातर मंदिर चूना पत्थर से ही बनाए जाते थे। इसका कारण यह है कि ये सबसे टिकाऊ विकल्प है। यही कारण है कि भारत में मंदिर 100 साल पुराने होते हैं। बता दें कि इस मंदिर से हटाई गई मूर्तियों को राजगढ़ नगर पालिका द्वारा किसी अन्य जगह पर स्थापित किया जा रहा है। (शिवलिंग का 7 अलग धाराओं से करें अभिषेक)

मंदिर को आस्था का प्रतीक माना जाता है। लेकिन भक्ति और आस्था का वास भक्त के मन और दिल में होना चाहिए। तभी तो कहा जाता है हर इंसना में भगवान बसे हैं। 

उम्मीद है कि आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा। इसी तरह के अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए हमें कमेंट कर जरूर बताएं और जुडे रहें हमारी वेबसाइट हरजिंदगी के साथ।

Image Credit: Pallav Paliwal & Freepik

 

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