भारत में कोरोना अब अपने पैर पसार रहा है और पूरा देश इस वक्त लॉकडाउन की स्तिथि में जा रहा है। पहले जनता कर्फ्यू और उसके बाद कई शहरों को बंद कर दिया गया है। पीएम मोदी के जनता कर्फ्यू ने इतिहास तो रच दिया। वहीं इस दिन पैदा हुई एक नवजात भी अब चर्चा में आ गई है। जहां एक ओर जनता कर्फ्यू ने बताया कि कैसे पूरा देश एक साथ आ सकता है और कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ सकता है वहीं गोरखपुर जिले में एक नवजात का नाम ही कोरोना रख दिया गया है। इसके पीछे का कारण भी काफी अलग है।

दअरसल, ये कहानी है कोरोना त्रिपाठी की जो जनता कर्फ्यू के दिन पैदा हुई हैं। उनका ये नाम उनके चाचा ने रखा है जो यकीनन काफी दिलचस्प तरह से जिंदगी को देखते हैं। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उन्होंने अपने घर पैदा हुई बिटिया का नाम कोरोना त्रिपाठी रख दिया। कोरोना वायरस जो पूरी दुनिया में परेशानी बन गया है और जिससे हज़ारों लोगों की जान गई है उसपर घर की बिटिया का नाम रखना कुछ अलग है।

meet corona tripathi of gorakhpur

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क्यों रखा बच्ची का नाम कोरोना?

जब कोरोना त्रिपाठी के अंकल नितेश त्रिपाठी से पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया तो उनका लॉजिक भी काफी अच्छा था। उनका कहना था कि ये विकराल बीमारी जिसके कारण पूरी दुनिया परेशान है। उसने सभी को एक साथ करीब भी ला दिया है। इस बीमारी ने लोगों को प्रोत्साहित किया है साथ रहने के लिए। जिस तरह जनता कर्फ्यू के दिन पीएम नरेंद्र मोदी की बात मानकर लोगों ने घर पर रहकर उन लोगों के लिए तालियां बजाईं जो हमारे लिए बाहर जा रहे हैं उससे लोगों की एकता दिखती है।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के सोहगौरा गांव में बच्ची की मां रागिनी त्रिपाठी से पहले इसकी इजाजत ली गई कि क्या उनकी बिटिया का नाम कोरोना रख दिया जाए। इसपर रागिनी जी का कहना है कि, 'ये वायरस यकीनन काफी खतरनाक है, इसने कई लोगों को दुनिया से उठा लिया है, पर इसकी वजह से हमारे अंदर काफी अच्छी आदतें भी आ गई हैं। ये बच्ची लोगों की एकता का मिसाल बनेगी।'

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माना ये कहानी काफी अच्छी है और बुराई में अच्छाई की खोज करना और पॉजिटिव साइड देखना हम सभी को अच्छा लगता है, लेकिन फिर भी इस वक्त जो हालात है वो किसी को भी डरा सकते हैं और ऐसे मौके पर अच्छाई का सोचना थोड़ा अजीब लगता है। चीनी लोगों से लेकर नॉर्थ ईस्ट के भारतीय नागरिकों तक सभी को जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें गलत कहा जा रहा है। जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।

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ये वायरस इतना खतरनाक है कि स्वस्थ्य शरीर को भी बीमार बना सकता है और कई बार तो इसकी मौजूदगी का पता भी नहीं चलता। ये समय यकीनन एकता की मिसाल का है, लेकिन यहां हमें एकता दिखनी है सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए। जो हालात हैं उसमें एक दूसरे से अलग रहकर और वायरस के संक्रमण को रोककर ही हम कई जिंदगियां बचा सकते हैं।

स्वस्थ्य हाईजीन का पालन करें, अपने आस-पास के लोगों से ज्यादा संपर्क न करें, जब तक जरूरी न हो तब तक बाहर न निकलें और बार-बार हाथ धोएं। ये सब कुछ इस वक्त बहुत जरूरी है।