हर महिला चाहती है कि उसके घर में खुशियों का वास हो, घर-परिवार के लोग हेल्दी और एनर्जेटिक रहें। बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी के बीच अच्छी बॉन्डिंग हो। लेकिन कई बार देखने में आता है कि घर की हर तरह से देख-रेख करने के बावजूद किसी ना किसी वजह से घर में अशांति छाई रहती है, बच्चे फोकस्ड नहीं रह पाते, घर में रहने वालों में छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव हो जाता है।

अगर ऐसी स्थिति आपके घर में भी हो रही है तो आपको अपने बाथरूम के वास्तु पर ध्यान देने की जरूरत है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आपके घर का बाथरूम वास्तु सम्मत नहीं है तो उसमें नेगेटिव एनर्जी का वास हो सकती है। जिससे घर में रहने वाले लोग उससे नेगेटिव तरीके से प्रभावित हो सकती हैं।

वास्तु एक्सपर्ट डॉ. शुभ्रा गुप्ता कहती हैं, 'बाथरूम वास्तु के अनुसार बाथरूम घर के उत्तर या उत्तर-पश्चिम भाग में होना चाहिए। यदि बाथरूम गलत दिशा में स्थित है, तो यह स्वास्थ्य और वित्तीय समस्याओं का कारण बन सकता है। बाथरूम दक्षिण, दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं होना चाहिए। दक्षिण तरफा बाथरूम महिला सदस्यों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।'

वास्तु दोष दूर करने के लिए ध्यान रखें ये टिप्स

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शौचालय वास्तु के अनुसार शौचालय पश्चिम या उत्तर पश्चिम दिशा में होना चाहिए। घर के मध्य और पूर्व, उत्तर-पूर्व में शौचालय का निर्माण करने से बचें। शौचालय की सीट को इस तरह से रखा जाना चाहिए कि बैठे व्यक्ति का मुख उत्तर या दक्षिण की ओर हो। अब जगह की कमी के कारण बाथरूम के साथ संयुक्त शौचालय लोकप्रिय हो रहा है। संयुक्त बाथरूम और शौचालय उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। यह पूजा कक्ष, रसोई घर और सीढ़ियों के नीचे नहीं होना चाहिए। बेड रूम से संयुक्त बाथ रूम या टॉयलेट का निर्माण नहीं कराना चाहिए। ऐसा करने से शयन कक्ष में सोने वाले व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से मानसिक एवं हृदय रोग होने की आशंका रहती है। अगर ऐसा करना ही है तो बेड रूम और स्नान घर के दरवाजे अलग-अलग बनवाने चाहिए।

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गीजर और इलेक्ट्रिक अप्लाइंसेस के लिए हो ये दिशा

बाथरूम के दक्षिण-पूर्व कोने में गीजर और अन्य विद्युत उपकरण जैसे हीटर और स्विचबोर्ड स्थापित किए जाने चाहिए। उत्तर दिशा में नल और शॉवर लगाए जाने चाहिए। बाथ टब को पूर्व, पश्चिम या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना अच्छा होता है। वॉश बेसिन और शॉवर या तो उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व दिशा में हो सकते हैं। वैनिटी मिरर के लिए उत्तर दिशा एक अच्छी दिशा है। शौचालय के पश्चिम और दक्षिण दिशा में वॉटर क्लॉजेट होनी चाहिए। क्लॉजेट को खिड़की या बाहरी दीवार के पास रखना चाहिए। बाथरूम के फर्श का ढलान यानि पानी का निकास पूर्व या उत्तर दिशा में होना उचित रहता है।

बाथरूम में हो लकड़ी के दरवाजे

लकड़ी के दरवाजे धातु के दरवाजों या अन्य सामग्रियों से बने बाथरूम की तुलना में बाथरूम के लिए बेहतर काम करते हैं। बाथरूम वास्तु सिद्धांतों के अनुसार, धातु के दरवाजे सकारात्मक स्थान में नकारात्मकता को बढ़ावा देते हैं। सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है। उपयोग में न होने पर भी, बाथरूम का दरवाजा बंद रखना चाहिए क्योंकि यह किसी भी छिपी हुई नकारात्मक ऊर्जा को आपके घर के बाकी हिस्सों में प्रवेश करने से रोकता है।

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कैसा हो बाथरूम का रंग

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बाथरूम के वास्तु सिद्धांतों के अनुसार, बाथरूम के अंदरूनी हिस्से को बेज, क्रीम और ब्राउन में रंगना सबसे अच्छा माना जाता है। अर्थी शेड्स बहुत अच्छी तरह से काम करते हैं। गहरे रंगों, विशेष रूप से काले, से दूर रहना सबसे अच्छा है। ये न केवल नकारात्मक ऊर्जा की बढ़ावा देते हैं, बल्कि वे एक कॉम्पैक्ट जगह और छोटा और अधिक तंग दिखाता है।

अगर घर की समस्याओं से लंबे समय तक जूझने के बाद आप इन वास्तु टिप्स को अपनाएंगी तो कुछ ही दिनों में आप पाएंगी कि घर में बेवजह की कलह नहीं होगी और बाथ रूम से आने वाली नेगेटिव एनर्जी खत्म हो जाने से पूरे घर में पॉजिटिविटी बनी रहेगी। इससे घर के लोग खुशहाल जिंदगी जिएंगे और आप रहेंगी हैप्पी। 

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