कभी न कभी किसी बात को लेकर सब लोग जीवन में झूठ का सहारा लेते हैं। कभी अपने ऑफिस में बॉस से छुट्टी लेते वक़्त तो कभी अपने दोस्त के कपड़ों की तारीफ़ करते वक़्त, जाने अंजाने झूठ हमारी ज़िन्दगी का हिस्सा बना जाता है। यही हकीकत है कि जीवन भर अपने बच्चों को सच का पाठ पढ़ाने वाले पेरेंट्स या बड़े लोग भी किसी न किसी बात को लेकर झूठ बोलते हैं।

आज हम आपको पेरेंट्स के जीवन से जुड़ी वो बातें बताएंगे जिनको लेकर उन्होंने अपने बच्चों को एक बार तो झूठ कहा ही होगा। यह बहुत मज़ेदार होगा, चलिए जानते हैं कि उन झूठ के बारे में जो पेरेंट्स अकसर बोलते हैं।

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सिंसियर स्टूडेंट होने का दावा 

सभी पेरेंट्स ने अपनी कॉलेज या स्कूल लाइफ में किसी न किसी वजह से क्लास जरूर बंक की होगी। कभी कैंटीन पार्टी के लिए तो कभी बोरिंग लेक्चर का बहाना करते हुए। लेकिन जब अपने बच्चों से स्कूल या कॉलेज की बात करते हैं तो हमेशा क्लास अटेंड करने का दावा करते हैं। उनको बताते हैं कि वो हमेशा एक सिंसियर स्टूडेंट थे। जबकि सच वो खुद अच्छे से जानते हैं।

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सैंटा गिफ्ट 

क्रिसमस आने के कुछ दिन पहले ही बच्चे प्लान कर लेते हैं कि उनको इस बार सैंटा से क्या चाहिए। पेरेंट्स बच्चों को लिस्ट बनाकर सॉक्स में हैंग करने को कहते हैं। उनका मन पसंद गिफ्ट नहीं खरीदते और बहाना बनाते हैं कि सैंटा उनकी बदतमीजियों से नाखुश हैं। इसलिए उनका मनपसंद गिफ्ट रिप्लेस कर दिया। बेचारा बच्चा समझ नहीं पाता कि यह सैंटा नहीं बल्कि उसके पेरेंट्स सैंटा उसकी बदतमीजियों से नाखुश हैं। इन छोटे-छोटे टिप्स को अपनाने के बाद पूरी तरह बदल जाएगा आपका फैमिली मीलटाइम

वापिस कर देंगे 

पेरेंट्स बच्चों की शैतानियों से परेशान होकर अक्सर कहते हैं कि तुमको हम जहां से लाए थे वहीं वापिस करके आएंगे। या फिर तुमको तो हम पार्क से लेकर आये थे। तुमको हमने डॉक्टर से खरीदा था, तुम कहना नहीं मानते हो। तुमको डॉक्टर के यहां से चेंज करके अच्छा वाला बेबी लाएंगे। यह सब बातें ज्यादातर पेरेंट्स अपने बच्चों से कहते हैं। फैमिली से तनाव का माहौल कम करने के लिए अपनाएं यह आसान टिप्स

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लेट हो गए जल्दी उठो 

बच्चे चाहें जितने बड़े हो जाएं यह एक ऐसा झूठ है जिसको सभी पेरेंट्स अपने बच्चों को जगाते वक़्त बोलते हैं। स्कूल जाना हो, या कहीं सेमिनार में ज्यादातर सभी मां अपने बच्चों को 30 मिनट आगे का टाइम बताकर ही उठाती हैं। 'जल्दी उठो लेट हो गए' ये वो शब्द हैं जिनका इस्तेमाल सभी महिलाएं अपने बच्चों को जगाने के लिए करती हैं। 

ये हम पेरेंट्स के जीवन से जुड़े वो झूठ हैं जिनको हम अकसर बोलते हैं लेकिन इनको झूठ मानते नहीं हैं। क्योंकि कहीं न कहीं इन झूठ को बोलने में पेरेंट्स की मंशा अपने बच्चों की भलाई और उन्हें कुछ सीख देने की होती है। परिवार के साथ डिनर करने से मिलते हैं इतने फायदे, जानकर दंग रह जाएंगी आप