भारत के टॉप रईसों की लिस्ट में गौतम अडानी भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति माने जाते हैं। पहले नंबर पर मुकेश अंबानी हैं, जिसके बाद गौतम अडानी का नाम आता है, एक सफल बिजनेसमैन बनने के इस सफर में गौतम अडानी को कई बार मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। 24 जून 1962 को अहमदाबाद के गुजराती जैन परिवार में जन्मे गौतम अडानी का करोबार दुनिया भर में फैला हुआ है।

आपको बता दें कि साल के शुरुआत में अंबानी परिवार को जान से मारने की धमकी मिली थी, लेकिन क्या आपको पता है गौतम अडानी को भी एक बार नहीं बल्कि दो बार इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। यही नहीं एक बार वह हमले से बाल-बाल बचे थे। उनकी जान बचाने वाले उन हीरोज को वह आज भी नहीं भूले।

जब गौतम अडानी को किया गया था किडनैप

gautam adani

साल 1998 में गौतम अडानी को फज़ल-उर-रहमान (फज़लू रहमान) और भोगीलाल दर्जी नाम के दो गैंगस्टरों ने उनकी दौलत हड़पने के लिए उन्हें किडनैप कर लिया था। उस वक्त गौतम अडानी टॉप रईसों की लिस्ट में शामिल नहीं हुए थे। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार गैंगस्टरों ने उन्हें तब किडनैप किया था जब वो और शांतीलाल पटेल कर्णावती क्लब से निकलकर अपनी कार से मोहम्मदपुरा रोड जा रहे थे। उसी वक्त दोनों को बदूंक की नोक पर अगवा कर लिया गया था। उस वक्त एक स्कूटर ने उन्हें कार रोकने पर मजबूर किया, इसके बाद कुछ लोग एक वैन में आए थे।

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गौतम अडानी को छोड़ने के लिए किडनैपरों ने मांगी थी इतनी रकम

gautam adani profile

किडनैप के बाद मोटी फिरौती दिए जाने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था। हालांकि चार्जशीट में इस बात का कहीं भी जिक्र नहीं गया था कि अडानी और पटेल को किडनैप किए जाने के बाद कहां ले जाया गया, और उनके गायब रहने के दौरान उनके साथ क्या-क्या हुआ था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार किडनैपरों ने अडानी को रिलीज करने के लिए मोटी रकम की मांग की थी। जिसके अनुसार उन्हें छोड़ने के लिए अडानी परिवार से 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर वसूल किए गए थे। इस बारे में गौतम अडानी बोलना पसंद नहीं करते, लेकिन लंदन फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार उनके जीवन की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में से यह भी एक है।

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मुंबई आतंकी हमले में बाल-बाल बचे

gautam adani and ambani

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार 26 नंवबर 2008 को अडानी मुंबई के मशहूर होटल ताज पैलेस में दुबई पोर्ट के सीईओ मोहम्मद शराफ के साथ डिनर कर थे, तभी आतंकियों ने हमला कर दिया था। गौतम अडानी की टेबल ऊपर थी, ऐसे में वह देख पा रहे थे कि कैसे आतंकवादी स्विमिंग पूल के रास्ते से गोलियां चला रहे थे। होटल के कर्मचारियों ने उन्हें और अन्य गेस्ट्स को ऊपरी मंजिल पर एक हॉल में ट्रांसफर करने के लिए गुप्त तरीके से भागने में मदद की। जहां उन्होंने छुपकर रात बिताई। उस वक्त वहां 100 से ज्यादा लोग थे, जो अपनी जिंदगी बचाने के लिए प्रार्थना कर रहे थे। अगली सुबह 8:45 मिनट पर उन सभी लोगों को बचा लिया गया था। पुलिस की मदद से इन सभी लोगों को घटनास्थल से दूर ले जाया गया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार जब गौतम अडानी निजी विमान से अहमदाबाद एयरपोर्ट पर उतरे तो उन्होंने कहा- ‘मैंने सिर्फ 15 फीट की दूरी से मौत देखी।’

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जान बचाने वाले हीरो का इस तरह किया धन्यवाद

gautam with wife

घटना के एक दशक बाद अडानी ने द इंडियन एक्सप्रेस के लिए आतंकी हमले के बारे में लेख लिखा। उन्होंने यह लेख उन हीरोज की याद में लिखा था, जिन्होंने उस दिन उन्हें और अन्य मेहमानों को बचाया था। इस लेख में उन्होंने लिखा- ''मैं कभी नहीं भूलूंगा वह निस्वार्थ व्यक्तियों के बलिदान को जिन्होंने लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जिंदगी की बाजी लगा दी। वे कभी नहीं जानते थे, उस रात उन्होंने जिन लोगों की जान बचाई थी उनमें से एक मेरी भी जान थीं।''

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