अच्छा! अगर आपसे यह सवाल किया जाए कि भारत की असल पहचान किस चीज में देखी जा सकती हैं, तो फिर आपका जवाब क्या हो सकता है? शायद, आप ये बोलें कि भारतीय सांस्कृतिक नृत्य भारत की असल पहचान में से एक है। जी हां, नृत्य भारत में एक प्राचीन और प्रसिद्ध सांस्कृतिक परंपरा है जो प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है। कथल कली, कथक, मणिपुरी, कुचिपुड़ी आदि कई शास्त्रीय नृत्य हैं जो आज भी शादी, पार्टीज, त्योहारों, फिल्मों और टीवी शो में देख सकते हैं। इन्हीं शास्त्रीय नृत्य में से एक है भरतनाट्यम। आज इस लेख में हम आपको भरतनाट्यम नृत्य के बारे में करीब से बताने जा रहे हैं, तो आइए जानते हैं।

भारतनाट्यम का इतिहास 

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भरतनाट्यम भारत के सबसे प्राचीन नृत्यों में से एक है। इसकी उत्पत्ति कब हुई इसका कोई प्रमाण नहीं है लेकिन, कई लोगों का मानना है कि यह हज़ार से लेकर दो हज़ार साल प्राचीन नृत्य है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस नृत्य को देवताओं से भी जोड़कर देखा जाता है। कई लोगों का यह भी मानना है कि इस नृत्य को सामवेद से लिया गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चार वेदों में से एक सामवेद को संगीत और मंत्र के लिए जाना जाता है।

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पौराणिक मान्यता 

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हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार देवताओं में ब्रह्मा से आग्रह किया कि एक ऐसे वेद का निर्माण किया जाये जिसके उल्लेख हो कि यह नृत्य देवताओं के लिए होगा और जब भी देवताओं को संगीत और नृत्य का लुत्फ़ उठाना हो तो भरतनाट्यम ही देखा करेंगे। कहा जाता है कि स्वर्ग में अप्सराओं के समूहों के साथ मिलकर सभी देवता भरतनाट्यम ही करते थे। धीरे-धीरे इस नृत्य का प्रसार मंदिरों में भी होने लगा और जब भी किसी देवता को खुश करना होता था तो इसी नृत्य का सहारा लिया जाता था। (भारत के 9 विचित्र रीति-रिवाज)

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दक्षिण भारत में भरतनाट्यम का महत्व 

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भरतनाट्यम भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्य में से एक है जो दक्षिण भारत में बेहद ही प्रसिद्ध है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में इस नृत्य बेहद ही पसंद किया जाता है। शादी, पूजा-पाठ आदि खास मौके पर भरतनाट्यम को बेहद पसंद किया जाता है। यह शास्त्रीय नृत्य नर्तकी के श्रृंगार, और इशारों के लिए भी जाना जाता है। इसमें महिलाएं विशेष रूप से तैयार होकर नृत्य प्रस्तुत करती हैं।

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भरतनाट्यम नृत्य का अर्थ 

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चलते-चलते आपको भरतनाट्यम नृत्य का अर्थ भी बताते चलते हैं।

  • भाव-जिसका अर्थ होता है भ्वानाएं।
  • रा- जिसका अर्थ होता है संगीतमय नोट्स 
  • ता- जिसका अर्थ होता है ताल।
  • नाट्यम- जिसका अर्थ होता है नाटक से के लिए संस्कृत शब्द

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