दिवाली रोशनी का त्‍योहार है, जहां दीयों की रोशनी दिलों को रोशन करती है। दिवाली एक ऐसा त्‍योहार है जिसे हर प्रांत में बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है। ये खुशियों का त्‍योहार है और लोग इसे जोश के साथ मनाते हैं। पटाखों और दीयों की चमक से पूरा माहौल जगमगा उठता है, लेकिन हमें इस त्‍योहार को मानते हुए इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए कि इससे हमारे पर्यावरण को कोई नुकसान ना पहुंचे। अब लोग पटाखों से हो रहे नुकसान से वाकीफ हो चुके हैं और इसलिए वो पर्यावरण को किसी भी तरह का हानि नहीं पहुंचाना चाहते। हर साल दीवाली पर पटाखे, केमिकल युक्त चीजें, प्लास्टिक इत्‍यादि ज्‍यादा इस्‍तेमाल कर हम पर्यावरण के लिए खतरा पैदा कर चुके है जिसकी वजह से हर साल इस दौरान वायु और ध्‍वनि प्रदूषण का स्‍तर बढ़ जाता है।

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इसलिए पर्यावरण और सेहत को ध्‍यान में रखते हुए हमें प्रदुषण रहित दिवाली मनानी चाहिए और ईको-फ्रैंडली दिवाली की ओर कदम बढ़ाना चाहिए। हमारे द्वारा की गई इस छोटी सी पहल से हम वातावरण को बचा पाएंगे। तो आइए जानते है ईको-फ्रैंडली दिवाली मनाने के लिए आपको किस तरह की पहल करनी होगी।

मिट्टी के दीयों का करें इस्तेमाल

इस दिवाली इलेक्ट्रिक लाइट्स के इस्तेमाल से करें तौबा और इसकी जगह मिट्टी के दीयों से रोशन करें अपना घर। मिट्टी के दीयों से जहां कुंहार और छोटे व्‍यापारियों को आर्थिक मदद मिलती है, वहीं, इससे पर्यावरण को भी किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता। साथ ही, मिट्टी के दीयों से इलेक्ट्रिसिटी की भी बचत होती है। इस बार ईको-फ्रैंडली दिवाली का दें साथ और मिट्टी के दीयों से करें अपने घर को रोशन।

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ईको फ्रैंडली मूर्तियों को लेकर आए घर

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए और देशहित और पर्यावरण हित में ईको फ्रैंडली मूर्तियों की ही पूजा करें। दिवाली पर मिट्टी की ईको फ्रैंडली मूर्तियों को दें अपने घर पर स्‍थान। वहीं, प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों से दूरी बनाएं। लक्ष्मी पूजन के लिए बाजार में लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की ईको फ्रैंडली मूर्तियां आसानी से मिल जाती हैं।

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पटाखों को कहे ना

जी हां, सबसे पहले तो पटाखों को कहे ना और बनाएं इनसे दूरी। पटाखें आपको थोड़ी देर का मजा तो दे सकते हैं लेकिन पर्यावरण के लिहाज से यह बेहद हानिकारक है। दीवाली के दिन छोड़े गए पटाखों से वायु और ध्‍वनि प्रदुषण भयावह स्‍तर पर पहुंच जाता है, जिसे अपनी सही स्थिति में आने में लंबा समय लग जाता है। इसलिए वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण की मार से बचने के लिए इस दिवाली पटाखों से बनाएं दूरी और अपनी दिवाली को रखें ईको-फ्रैंडली। आपकी ईको-फ्रैंडली दिवाली की पहल से बुजुर्गों और बच्चों की सेहत सही बनी रहेगी।

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केमिकल रंगोली का ना करें इस्‍तेमाल

दिवाली के दौरान आमतौर पर मार्केट में केमिकल युक्त रंगोली के रंग बेचे जाते है, जो आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक होते है। इसलिए इस दिवाली ऐसे रंगों से दूरी बनाएं और इसकी जगह नैचुरल कलर्स खरीदकर उससे रंगोली बनाएं। नैचुरल कलर्स थोड़े महंगे जरूर होते है पर आपकी सेहत और पर्यावरण से बढ़कर नहीं। तो इस बार नैचुरल कलर्स से सजाएं रंगोली और ईको-फ्रैंडली दिवाली को कहे हां।

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गाय के गोबर से बने दीयों का करें इस्‍तेमाल

दिवाली पर इस बार गाय के गोबर से बने दीयों से रोशन करें अपना घर। इस तरह के दीये गोबर में घी और इसेंशियल ऑइल डालकर बनाए जाते है, जिसमें लेमन ग्रास और मिंट जैसे उत्पादों का भी मिश्रण होता है। धनतेरस पर अंक के अनुसार करेंगी शॉपिंग तो घर में नहीं होगी पैसे की कमी। 

इको फ्रेंडली मोमबत्तियां

बाजार में इको-फ्रेंडली मोमबत्तियां भी उपलब्‍ध है जिससे पर्यावरण को किसी भी तरह की हानि से बचाया जा सकता है। तो इस बार दिवाली में अपने घर के हर कोने को इको-फ्रेंडली मोमबत्तियों से जगमगाने दें। दिवाली को यादगार मनाने के लिए इन 4 जगहों की रौनक जरूर देखें।