जब भी हाई क्वालिटी चाय की बात होती है तो दार्जिलिंग चाय और असम चाय की बात की जाती है। यकीनन इन दोनों जगहों पर बहुत ही हाई क्वालिटी की चाय उगती है और ऐसे में अगर आप देखें तो इन्हें विदेशों में भी एक्सपोर्ट किया जाता है। इन दोनों चाय में से दार्जिलिंग चाय को बहुत ज्यादा महंगा बेचा जाता है क्योंकि ये कम मात्रा में उगाई जाती है और इसकी खेती का तरीका इसे विशेष खुशबू और स्वाद देता है, लेकिन असम चाय भी पीछे नहीं है। असम चाय में एक अलग तरह का स्वाद आता है जो सीजन के हिसाब से बदलता है यानि गर्मी में उगने वाली चाय की पत्तियों और बसंत में उगने वाली चाय की पत्तियों में बहुत अलग स्वाद होता है। 

आज जब हम असम चाय की बात कर रहे हैं तो इसकी क्वालिटी से लेकर इसके स्वाद और बनाने के तरीके तक आपको इसके बारे में कई चीजों से अवगत करवाएंगे। तो चलिए जानते हैं भारत की असम चाय के बारे में। 

असम चाय से जुड़े कुछ खास फैक्ट्स-

  • भारत में उगाई जाने वाली चाय का 50% हिस्सा असम से ही आता है। 
  • असम चाय की खेती 200 साल पहले ही शुरू हुई थी। 
  • असम में करीब 50000 चाय प्रोड्यूसर हैं जो हर साल 49000 किलोग्राम चाय का उत्पादन करते हैं। 
  • इससे पहले असम चाय हमेशा टी-बैग्स में मिला करती थी, लेकिन धीरे-धीरे लूज टी का उत्पादन बढ़ा और असम चाय की लोकप्रियता भी बढ़ती गई। 
assam chai manufacturing

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किस तरह की चाय मिलती है असम में?

असम अपनी ब्लैक टी के लिए फेमस है, लेकिन इसके अलावा, असम में ऊलांग या ग्रीन टी, व्हाइट हर्बल टी भी मिलती है। 

असम में साल में चार बार चाय की खेती होती है और इसमें पहला और दूसरा हार्वेस्ट सबसे अच्छा माना जाता है। असम में दो तरह की काली चाय मुख्यतः मिलती है जिसमें ऑर्थोडॉक्स और सीटीसी चाय होती है। ऑर्थोडॉक्स वो जो पारंपरिक तरीके से बनाई जाती है और इसकी खुशबू और क्वालिटी अलग होती है जिसके कारण ये ज्यादा महंगी होती है। 

assam chai quality

सीटीसी यानि कर्ल टू लीफ कट चाय जो हमारे घरों में आती है जिसमें चाय की पत्तियां छोटे-छोटे दानेदार पैलेट्स की शक्ल ले लेती हैं। 

अलग-अलग फ्लेवर में मिलती है असम चाय-

असम चाय की खासियत ये है कि मिट्टी, पानी, मौसम और बनाने के तरीके के हिसाब से इसका फ्लेवर भी बदल जाता है। उदाहरण के तौर पर सभी असम काली चाय का फ्लेवर थोड़ा स्मोकी और स्ट्रांग लगता है, लेकिन इसमें अलग-अलग स्वीट और स्पाइस नोट्स जोड़े जा सकते हैं। 

ये कड़क चाय होती है इसलिए इसे ज्यादा पसंद भी किया जाता है। इस चाय का कैफ़ीन कंटेंट भी अन्य घरेलू चाय के मुकाबले ज्यादा होता है। 

कैसे बनाई जाएगी असम ब्लैक टी? 

इसे बनाने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं और सबसे अच्छा तरीका ये है कि आप पहले पानी में इसे घोलें और उबालें। अगर आप दूध के साथ बना रहे हैं तो स्टेप्स अलग होंगे और अगर काली चाय बना रहे हैं तो तरीके अलग होंगे।  

assam chai making

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काली चाय बनाने का तरीका- 

  • सबसे पहले पानी को थोड़ा सा गर्म करके उसमें 1 छोटा चम्मच असम टी डालें (अगर लूज टी ली है जिसमें पत्तियां टूटी नहीं हैं तो ज्यादा मात्रा लग सकती है, छोटा चम्मच सीटीसी चाय के लिए है।)
  • क्योंकि ये चाय ज्यादा हार्ट होती है और कड़वी भी होती है इसलिए इससे ज्यादा इस्तेमाल ना करें। 
  • अब आप चाय को थोड़ा उबलने दें। इसके बाद इसमें दो पत्ती पुदीना डालें और अगर आपको शक्कर चाहिए तो थोड़ी सी शक्कर मिलाएं। 
  • इसके बाद आप इसमें थोड़ा सा नींबू का रस डालकर गैस बंद कर दें। 
  • आपकी काली चाय तैयार है जिसे बनाने में आपको 5-7 मिनट ही लगेंगे। 
  • इसमें लौंग और काली मिर्च का इस्तेमाल या तो ना करें या कम करें क्योंकि ये चाय पहले से ही थोड़ी कड़वी होती है।  

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दूध वाली चाय बनाने की विधि- 

  • दूध वाली चाय में आप चाहें तो दालचीनी और काली मिर्च दोनों का ही इस्तेमाल कर सकते हैं। 
  • सबसे पहले पानी में आप चाय को उबालें और उसके बाद इसमें चीनी मिला दें। 1 मिनट तक इसे ऐसे ही उबलने दें। 
  • अब इसमें दूध डालें। अगर पहले चाय पानी में उबल जाएगी तो उसका फ्लेवर काफी अच्छा आएगा क्योंकि ये चाय खुशबू और स्वाद के लिए ही जानी जाती है। 
  • दूध उबल जाए तो आप इसमें अदरक, दालचीनी आदि मिला सकते हैं। आप चाय में मिलाने वाले इंग्रीडिएंट्स में से कोई भी इसमें मिला सकते हैं। 
  • इसे 1 बार अच्छे से उबाल लें। कच्ची ना छोड़ें क्योंकि इसका फ्लेवर तभी निखर कर आएगा। 
  • यहां भी अगर आप सीटीसी चाय का उपयोग कर रहे हैं तो पत्ती का इस्तेमाल कम होगा।  

अगर आपने अभी तक असम ब्लैक टी का स्वाद नहीं चखा है तो एक बार इसे जरूर चखें। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।