अगर आपसे एक सवाल पूछा जाए कि क्या आपने कभी किसी महिला को बिजली के खम्बों पर चढ़ बिजली की तार को ठीक करते हुए देखा है? तो शायद आपका जवाब होगा नहीं, लेकिन अगर मैं बोलू कि महाराष्ट्र में एक ऐसी महिला हैं जो देखते ही देखते बिना किसी सीढ़ी के सहारे बिजली के खम्बों पर चढ़ के आसानी से तार को सही कर देती हैं तो। जी हां, महाराष्ट्र में काम करने वाली एक ऐसी ही महिला हैं जो इस पुरुष प्रधान कार्य में एक अपवाद के साथ देश के लिए मिसाल हैं। वह सिर्फ ना बिजली के खम्बों पर चढ़ती हैं, बल्कि बहादुरी के साथ काम को पूरा कर देती हैं। तो चलिए इस वायर वुमन को और करीब से जानते हैं।

इस वायर वुमन का नाम है 'उषा जगदाले'। महाराष्ट्र के बीड जिले की रहने वाली उषा बिजली विभाग में काम करती हैं। उषा सभी लोगों को हर संभव बिजली पहुंचाना चाहती हैं। मौजूदा समय में कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते अमूमन लोग घरों में रह रहे हैं, ऐसे में वो चाहती हैं कि लाइट की दिक्कत किसी को ना हो।

usha jagdale inside

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उनके बारे में कहा जाता है कि उषा जगदाले ने ऑफिस काम के बजाय फिल्ड में जाकर काम करना पसंद किया ताकि इस महामारी के दैरान सभी को बिना किसी समस्या के बिजली की सुविधा आसानी से मिलती रहे। उषा महाराष्ट्र के स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में लाइन वुमन के तौर पर काम करती हैं। (पहली महिला एंबुलेंस ड्राइवर एम वीरलक्ष्मी)

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खो-खो खिलाडी भी रह चुकी हैं उषा 

 

उषा जगदाले के बारे में कहा जाता है कि वो एक खो-खो खिलाडी भी रही हैं। महाराष्ट्र स्टेट लेवल खो-खो की कैप्टन के साथ उन्होंने इस खेल में अभी तक 11 मेडल जीते हैं। (मिलिए इंग्लिश वाली दादी से) उषा के बारे में कहा जाता है कि उन्हें पहले ऑफिस काम का ऑफ़र दिया गया लेकिन, उन्होंने बाहर तार को ठीक करने का जिम्मा लिया।

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सोशल मीडिया पर वायरल

 

उनके इस काम को 'अल इंडिया रेडियो' ने ट्विटर पेज कर शेयर किया है, जिसे देखते ही देखते लाखों लोगों ने लाइक्स एंड कमेंट्स करना स्टार्ट कर दिया। इस ट्विट में देखा जा सकता है कि कैसे उषा बिना किसी सीढ़ी और सेफ्टी इक्विपमेंट के बिजली के खंभे पर चढ़ती और तार को ठीक कर देती हैं। इस पोस्ट में कुछ लोगों के कमेंट्स इस प्रकार है-स्त्री शक्ति..गज गामिनी.., नारी शक्ति जैसे कई कमेंट्स है, लेकिन एक तरफ कुछ लोग ये भी कॉमेंट्स कर रहे हैं कि बिना किसी सेफ्टी के ऐसे काम करना खतरनाक भी है। (मलिक और दीपा मलिक ने डिसेबिलिटी को बनाया अपनी ताकत)

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