सफलता उन्हीं को ही मिलती है, जो किसी भी काम को करने के लिए हमेशा आगे रहते हैं। कुछ इसी तरह का उदहारण प्रस्तुत किया है मुख्य रूप से पुणे की रहने वाली पूजा बदामीकर ने। सड़कों पर फेंके पुराने प्लास्टिक और टायरों से जूते-चप्पल बनाने का काम करती हैं। इस काम के लिए पूजा को हालांकि कई साल लग गए, लेकिन आज वो लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत के काबिल बन गई हैं। इस काम के पीछे ऐसे कई कारण है, जो आगे चल कर पूजा को ये काम करने का प्रोत्साहन मिला। तो चलिए इस लेख में जानते हैं कि वो क्या वजह रही होंगी, जिसके चलते एक कदम से आज वो लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।

पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए 

pooja badamikar upcycles scrap tyres to make footwear inside

पूजा बदामीकर एक मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'आजकल भारत में प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। उनका मानना है कि पुराने टायर से भी पर्यावरण को कई नुकसान पहुंचतें हैं। इसलिए पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ये ध्यान आया कि क्यों न पुराने टायरों को किसी अच्छे कामों में इस्तेमाल किया जाएं। इससे प्रदूषण में कमी भी होगी और एक बेहतर रोजगार भी मिल जाएगी।

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पुराने और बेकार टायरों से जूता-चप्पल 

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महाराष्ट्र की रहने वाली पूजा बदामीकर पिछले दो वर्षों से इस काम में लगी हुई हैं। पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरुक करने के साथ-साथ एक से एक बेहतरीन जूते और चप्पलों को बनाती है। पूजा बदामीकर ने अपने फुटवियर ब्रांड का नाम 'निमिटल' रखा है। उनका मानना है कि आज एक साथ दो-दो काम हो रहे हैं। एक साइड लोगों को फुटवियर उपलब्ध करना और दूसरे साइड पर्यावरण को बचाना।

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पूजा बदामीकर का करियर 

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कहा जा रहा है कि इंटरप्रेन्योर पूजा बदामीकर पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उसके बारे में यह भी कहा जा रहा की साल 2018 में उन्होंने एक आईटी कंपनी की जॉब छोड़कर इस काम को करने लगी। इस काम के लिए उन्हें पुरस्कार भी मिले हैं।

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सोशल मीडिया पर तारीफ 

 

ANI ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए लिखा है कि महाराष्ट्र की पूजा बदामीकर पुराने टायरों से फुटवियर बना रही हैं। आगे इस ट्वीट में लिखा है कि पूजा का कहना है कि हर साल दुनिया भर में तकरीबन एक बिलियन टायर कबाड़ में फेंक दिए जाते हैं, जिसकी वजह से प्रदूषण पर गंभीर असर पड़ते हैं। इस ट्वीट के बाद कई लोगों ने इस अच्छे काम के लिए बदामीकर को शुभकामनाएं भी दी और पोस्ट में बहुत सारे कमेंट्स भी किए हैं।

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