मां की अहमियत का न ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है न ही उसे शब्दों में बयां किया जा सकता है। इस मदर्स डे हर जिंदगी की तरफ से एक खास मुहिम चलाई जा रही है जिसका नाम है 'मां और मैं' (Maa & Me), इस मुहिम में मां से जुड़ाव को एक अलग अंदाज़ में पेश किया जा रहा है। इसी कड़ी में हम आपको मां और बेटी की कुछ ऐसी जोड़ियों से मिलवा रहे हैं जो अनोखी हैं और जिनकी बॉन्डिंग कुछ खास है। इसी कड़ी में Herzindagi की कंटेंट एडिटर मेघा मामगेन से बात की है मिसमालिनी की संस्थापक, सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर और ब्लॉगर मालिनी अग्रवाल और मंजुलिका अग्रवाल ने। आपको बता दें कि 10 साल पहले अपने लैपटॉप को ही अपनी कंपनी की शक्ल देने वाली मालिनी आज 40 हज़ार से ज्यादा लोगों से जुड़ी हुई हैं और अपने कंटेंट से लाखों लोगों तक पहुंचती हैं।

मालिनी अग्रवाल के बचपन के बारे में बात करते हुए उनकी मां का कहना था कि मालिनी बचपन से ही काफी एक्टिव थीं और अगर किसी पार्टी में जाना होता था तो उन्हें सबसे पहले जाने का मन करता था, यही नहीं वो सभी के वापस आने के बाद वहां से वापस आती थीं। तो बचपन से ही ये अहसास हो गया था कि लोगों से जुड़ने की कुछ तो बात उनमें है।

जहां तक मालिनी का सवाल है तो वो बचपन से ही सारी फिल्में देखा करती थीं। उन्हें मां से 'बॉलीवुड का शौख' विरासत में मिला है। मालिनी का कहना था, 'मेरी मां बहुत बड़ी बॉलीवुड फैन है और उन्होंने ही मुझे इस फील्ड में जाने के लिए इंस्पायर किया। डिप्लोमैटिक सर्विस होने के कारण हम कई देशों में रहे, हमारे पास बॉलीवुड फिल्मों का एक्सेस नहीं था, लेकिन हम सभी फिल्मों को VHS टेप में देखते थे। इसी से मैं बॉलीवुड को लेकर जागरुक हुई और मेरा इंट्रस्ट बना।'

miss malini and her mother

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करियर को लेकर बचपन से रहा है मां का सपोर्ट-

मालिनी ने बातों -बातों में ये बता दिया कि उनकी मां बहुत मोटिवेटिंग हैं और अब भी वो कई वीडियो करती हैं जिससे लोगों को मोटिवेशन मिल सके। इसी के साथ, मंजुलिका अग्रवाल ने ये बताया कि उन्होंने बचपन से ही अपने बच्चों का सपोर्ट किया है। जो फ्रीडम उन्हें मिली थी वही फ्रीडम वो अपनी बेटियों को भी देना चाहती थीं। वो 80 साल की हैं, लेकिन सोच में काफी लिबरल, अपनी बेटी को मारुति चलाकर 40 किलोमीटर दूर छोड़ने जाती थीं ताकि करियर के मामले में कोई रुकावट न हो।

'जो भी करो दिल से करो'-

मंजुलिका अग्रवाल ने बच्चों से सिर्फ यही कहा था कि जो भी करो दिल से करो। उन्हें लगता था कि बच्चे जो भी करें सीरियसली करें। मां का ऐसा सपोर्ट ही बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

बातों ही बातों में मालिनी ने बता दिया कि उनकी मां 80 साल की हैं, लेकिन अभी भी जिंदगी से भरी हुई हैं। वो मालिनी के हर तरह के अचीवमेंट को रिकॉर्ड करना चाहती हैं चाहें वो उनका डांस शो रहा हो, उनके इंटरव्यू रहे हों, मैग्जीन में कोई कटिंग रही हो या कुछ भी। यही तो होता है एक मां का सपोर्ट जो अपने बच्चों के लिए उम्र की परवाह नहीं करता और मां हर मुमकिन कोशिश करती है कि उनके बच्चे आगे बढ़ें।

ये है मां का मूल मंत्र-

मंजुलिका अग्रवाल के अनुसार आपस में अंडरस्टैंडिंग तभी होती है जब मां ये न सोचे कि 'लोग क्या सोचेंगे'। जो वो सोच रहे हैं, बोल रहे हैं उन्हें बोलने दो। उन्होंने ये भी बताया कि कैसे रिश्तेदारों की और समाज की बातें न सुनकर उन्होंने अपनी बच्ची पर भरोसा किया। जनरेशन गैप के बावजूद एक दूसरे को समझने का ये बेहतरीन उदाहरण है।

malini agarwal childhood

ट्रोल्स को भी ट्रोल करने वाली मां-

मंजुलिका जी की हाजिरजवाबी देखिए, बेटी को ट्रोल करने वालों को ही ट्रोल कर दिया। मालिनी को लेकर किसी ट्रोल ने कमेंट किया था कि वो दिन प्रति दिन बूढ़ी हो रही हैं, इसपर उनकी मां ने ही जवाब दे दिया कि, 'उम्र के साथ तो सभी बढ़ते हैं, क्या तुम कम हो रही हो और एक दिन बच्ची बन जाओगी?'



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मां की इंडिपेंडेंस पर होता है गर्व-

मिसमालिनी को अपनी मां की इंडिपेंडेंस पर बहुत गर्व है। इस उम्र में भी अपना खाना खुद बनाने से लेकर अपने वीडियो खुद शूट करने तक की काबिलियत है उनमें। अगर मां इतनी टैलेंटेड है तो बेटी तो प्रेरित होगी ही।

यहीं मंजुलिका अग्रवाल को लगता है कि उनकी बेटी सबका तो बहुत खयाल रख लेती है, लेकिन खुद का खयाल भी उसे रखना चाहिए।

मां को दोस्त बनाने की ओर कदम-

मालिनी का कहना है कि अगर लोग बचपन से ही ये तय कर लें कि बच्चों से सच बोलना है और बच्चों को सच बोलने की आजादी हो और ये बात हो कि बच्चों को ये लगे कि वो कुछ भी शेयर कर सकते हैं तो मां के दोस्त बनने की ओर कदम उठाएं।

मालिनी की मां उनकी सबसे बड़ी फैन हैं और मालिनी को लगता है कि ऐसा ही हर किसी की मां को होना चाहिए जो अपने बच्चों की फैन बन सके, दोस्त बन सके और उनसे बातें कर सके।

यकीनन हर मां और बच्चे के लिए ये बहुत जरूरी है कि उनकी बॉन्डिंग बहुत अच्छी हो। तभी तो और भी ज्यादा प्यारा हो सकता है मां-बच्चे का रिश्ता।

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