अगर आपसे कहा जाए कि चुस्ती फुर्ती से खेला जाने वाला खेल मार्शल आर्ट किसी उम्र का मोहताज़ नहीं है तो भला आप क्या कहेंगे? निश्चय ही आपमें से ज्यदातर लोग यही मानते होंगे कि ढलती उम्र के साथ जब शरीर साथ देना बंद कर देता है उस उम्र में भला कौन मार्शल आर्ट के खेल को अपनी दिनचर्या में बनाए रख सकता है। तो हम आपको बताने जा रहे हैं केरल की 78 वर्षीय एक ऐसी महिला के बारे में जिन्होंने इस उम्र में भी मार्शल आर्ट को जीवित रखा है और दूसरों के सामने एक उदाहरण हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं केरल की मीनाक्षी अम्मा की जो कई सालों से प्राचीन मार्शल आर्ट कलारीपयट्टू युद्ध कौशल का हुनर तो दिखा ही रही हैं और दूसरों को भी इस कला से अवगत करा रही हैं। 

78 साल की उम्र में जब लोगों के लिए ठीक से चलना भी काफी मुश्किल हो जाता है, उस उम्र में मीनाक्षी अम्मा, देश की अगली पीढ़ी को मार्शल आर्ट के गुण सिखा रही हैं। भारत के सबसे पुराने कलारीपयट्टू युद्ध कौशल को आगे ले जाने और बच्चों को नि:शुल्क इस कला को सिखाने के उन्हें साल 2017 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित भी किया था। आइए जानें कौन हैं मीनाक्षी अम्मा -

78 साल में खेलती हैं मार्शल आर्ट 

martial art

मीनाक्षी अम्मा ने कलारी में अपने कौशल के साथ अपने 78 साल पूरे कर लिए हैं जिसे भारत की सबसे पुरानी मार्शल आर्ट माना जाता है। केरल, दक्षिणी भारत में परदादी, कलारीपयट्टू के पुनरुद्धार में एक प्रेरक शक्ति रही है। मीनाक्षी अम्मा  प्राचीन प्रथा को आगे बढ़ाने और लड़कियों को इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। 1949 में अपने दिवंगत पति द्वारा स्थापित कदथनाद कलारी संघम स्कूल की कुलमाता ने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया, "मैंने सात साल की उम्र में कलारी शुरू की थी। अब मैं 78 साल की हूं। मैं अभी भी अभ्यास कर रही हूं, सीख रही हूं और दूसरों को पढ़ा रही हूं।"  मीनाक्षी बताती हैं कि "जब आप अखबार खोलते हैं, तो आप केवल महिलाओं के खिलाफ हिंसा की खबरें देखते हैं," लेकिन "जब महिलाएं इस मार्शल आर्ट को सीखती हैं, तो वे शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत महसूस करती हैं और यह उन्हें काम करने और अकेले यात्रा करने के लिए आश्वस्त करती है।"

इसे जरूर पढ़ें:हादसे में रोशन जवाद ने गवाएं थे दोनों पैर, चुनौतियों के बावजूद ऐसे पूरा किया डॉक्टर बनने का सपना

Recommended Video

क्या है कलारीपयट्टू मार्शल आर्ट्स 

martial art training

दक्षिणी राज्य केरल से उत्पन्न भारत की एक युद्ध कला है। यह संभवतः सबसे पुरानी अस्तित्ववान युद्ध पद्धतियों में से एक है, जिसका अर्थ है सभी युद्ध कलाओं की माता। ये केरल में और तमिलनाडु व कर्नाटक से सटे भागों में साथ ही पूर्वोत्तर श्रीलंका और मलेशिया के मलयाली समुदाय के बीच प्रचलित है। इसका अभ्यास मुख्य रूप से केरल की योद्धा जातियों जैसे नायर। कलारी, जिसमें नृत्य और योग के तत्व शामिल हैं, में तलवार, ढाल जैसे हथियार शामिल हो सकते हैं। प्रतिष्ठित रूप से यह 3,000 वर्ष पुराना है और इसका प्राचीन हिंदू शास्त्रों में उल्लेख किया गया है।  यह वर्तमान समय में भी धर्म से प्रभावित है। भारत के ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों ने 1804 में इस प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन यह 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में और 1947 में स्वतंत्रता के बाद पुनरुद्धार से पहले भूमिगत रह गया। हाल के दशकों में यह कई गुना बढ़ गया है, जिसका श्रेय मीनाक्षी को जाता है। अपने इस हुनर के लिए 2017 में मीनाक्षी ने राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता था। अब इसे एक खेल के रूप में मान्यता प्राप्त है और पूरे भारत में इसका अभ्यास किया जाता है।

इसे जरूर पढ़ें:जापान की 107 साल की जुड़वा बहनों ने अपने नाम किया गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, जानें पूरी खबर

लड़कियों की आत्मरक्षा में सहायक 

कलारीपयट्टू मार्शल आर्ट एक कला है जो मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करती है, एकाग्रता, गति और धैर्य में सुधार करती है, शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को पुन: उत्पन्न करती है। जब मानसिक और शारीरिक रूप से कलारी से पूरी तरह से जुड़ जाता है, तो विरोधी गायब हो जाता है। वास्तव में लड़कियों को ये हुनर अपनी रक्षा के लिए जरूर सीखना चाहिए। 

78 साल की मीनाक्षी अम्मा वास्तव में हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और वो इस बात को दिखाती हैं कि किसी भी हुनर के लिए उम्र किसी तरह की बाधा नहीं बन सकती है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: freepik