हर महिला ममता से भरपूर होने के साथ धैर्य और साहस का भी प्रतीक होती है। हर परिस्थिति को अपने अनुसार ढालकर वह हमेशा अपने साहस का परिचय देती है। वर्तमान में महिला शक्ति का फैलाव इतना ज्‍यादा हो गया है कि कोई भी क्षेत्र उनके संपर्क से अछूता नहीं है। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, साहित्य, सेना, पुलिस, चिकित्‍सा, व्यापार, समाज सुधार, पत्रकारिता, मीडिया एवं कला का आज महिला हर क्षेत्र में सुशिक्षित, सक्षम और सफल है। महिला की उपस्थिति, योग्यता और उपलब्धियां खुद अपना परिचय प्रस्तुत कर रही है। 

दोहरी जिम्‍मेदारियों को निभाते हुए महिलाओं ने अपनी दोगुनी शक्ति का प्रदर्शन कर सिद्ध कर दिया है कि समाज की उन्नति आज केवल पुरूषों के कंधे पर नहीं, अपितु वह खुद से ऊंचाईयों की ओर अग्रसर है। लेकिन महिलाओं के पैरों में बेड़ियां डालने वाली सोच आज भी खत्‍म नहीं हुई है। कभी उन्‍हें खूबसूरती के पैमाने पर आंकने की कोशिश की जाती है तो कभी पीरियड्स के नाम पर कमजोर महसूस कराने षडयंत्र रचा जाता है।

लेकिन कहते है कि महिला अगर कुछ ठान लें तो उसे करके ही दिखाती है। उसे अपनी पहचान बनाने के लिए किसी के साथ की जरूरत नहीं होती है। इस महिला दिवस पर हरजिंदगी महिलाओं के आपसी तालमेल और महिला सशक्तिकरण का जश्न मना रही है। इसे सेलिब्रेट करने के लिए Shespeaks Dialogues का आयोजन किया। 'SheSpeaks' महिलाओं के महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत करने की एक पहल है। 'Women In Leadership Achieving An Equal Future' थीम के अंतर्गत हरजिदंगी फेमस वूमेन अचीवर्स और इन्फ्लुएंसर की आवाज के माध्‍यम से उन मुद्दों और विषयों पर चर्चा करेगी, जिनके बारे में आज की भारतीय महिलाएं दृढ़ता महसूस करती हैं। Shespeaks Dialogues को 5 अलग-अलग सेशन्‍स में बांटा गया और इसमें अलग-अलग मुद्दों पर कई वुमन अचीवर्स ने अपने पक्ष को रखा-

सेशन- 1

तोड़ेंगे खूबसूरती के गलत पैमाने

Double Beauty Standards hindi

हर जिंदगी के खास Shespeaks Dialogues सेशन में बॉडी पॉजिटिविटी और डब ब्यूटी स्टैंडर्ड्स पर दो सशक्त महिलाओं से बात की जिन्हें समाज की बंदिशें नहीं रोक पाईं और न ही उन्होंने अपने इरादों को समाज के तानों या फेक ब्यूटी स्टैंडर्ड्स से कमजोर होने दिया। हमारे इस खास सेशन में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर, TedX स्पीकर और डबल गोल्डमेडलिस्ट डॉक्टर फाल्गुनी वसावड़ा शामिल हुईं। वह एक बेमिसाल महिला है जो दो दशकों से एडवर्टाइजिंग पढ़ा रही हैं। हमारी दूसरी स्पेशल गेस्ट प्लम्प इज प्रिटी ब्लॉग की नीलाक्षी सिंह हैं जो प्लस साइज मॉडल, कंटेंट क्रिएटर और ब्लॉगर हैं। वह पर्ल अकादमी में 4 साल से पढ़ा रही हैं।

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सेशन के दौरान इन दोनों ही महिलाओं से हरजिंदगी की चीफ सब-एडिटर श्रुति ने कुछ सवाल पूछे, लेकिन 'आपके हिसाब से खूबसूरती की परिभाषा क्या है?' इस सवाल का जवाब दोनों ने बेहद खूबसूरती से दिया। 

डॉक्टर फाल्गुनी ने इसका जवाब देते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि ब्यूटी वो है जो आप महसूस करते हैं। तो मैं हर किसी को खूबसूरत कहूंगी जो खुद को खूबसूरत महसूस करता है, अपने शरीर और अपने सफर को इज्जत देता है। खुद को पहचानना एक सुपरपावर है। आपको किसी और के जैसा लगने की जरूरत नहीं है।'

इसी सवाल के जवाब में नीलाक्षी ने भी ये कहा कि, 'अगर आपमें बात करने की तमीज नहीं तो आप खूबसूरत नहीं हो सकते हैं। आप खूबसूरत अपनी तरह से हो सकते हैं जैसे आप बोलते हैं, जैसे आप महसूस करते हैं।'

सेशन- 2

सपनों की अनोखी उड़ान

Disruptors hindi

मेरी दुनिया, मेरे नियम, मेरी परिभाषा, इस असाधारण सोच से महिला आगे बढ़ी हैं और खुद के लिए एक नया आसमान बनाया है। हमारे इस सेशन के पैनल में डॉक्टर चिन्ना दुआ (रेडियोलॉजिस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर), मिस रिचा महेश्वरी (अवॉर्ड-विनिंग फैशन फोटोग्राफर जिनका नाम लिमका और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है), सुचेता पाल (महिलाओं की वेलनेस कोच और जुंबा इंडिया की अम्बेसेडर), मिसेज आभा गोडियाल कक्कड़ (इंस्टा आंटी, टीचर और सोशल मीडिया सेंसेशन) और स्नेहिल दीक्षित ( B.C.Aunty, कंटेंट क्रिएटर और इन्फ्लुएंसर) हमसे जुड़ीं। इस सेशन के लिए हरजिंदगी की सब-एडिटर पूर्णिमा पांडे ने वूमेन अचीवर्स से बातचीत की।

यह सेशन काफी दिलचस्‍प रहा, जिसमें डॉक्‍टर चिन्‍ना दुआ ने कहा, 'महिला को एक अद्भुत ताकत मिली है कि वह एक नई जिंदगी को जन्‍म दे सकती हैं।'  वहीं स्‍नेहिल मेहरा ने कहा कि लोगों का काम है जज करना और हमारा काम है उन्‍हें नजरअंदाज करना, देखा जाए तो स्‍नेहिल ने मुद्दे की बात की है। महिलाओं को हमेशा ही कभी उनके चरित्र को लेकर तो कभी उनकी काबलियत को लेकर जज किया जाता रहा है। मगर इससे सहम कर और डर कर पीछे हटने की जरूरत नहीं है। 

इसी बात पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सुचेता पाल ने कहा, 'महिलाओं को जिस चीज़ को असल में बदलने की जरूरत है वो उनका खुद का दिमाग और सोच है, आप ही खुद की सबसे बड़ी बंदिश बन सकती हैं।' इस सेशन में मिसेज आभा गोडियाल ने कहा, 'खुद को पहचान कर जब एक महिला खुद के लिए स्‍टैंड लेती है, तब वह पूर्ण हो पाती है।' 

सेशन- 3

पीरियड पाजिटिविटी

I Bleed hindi

इस सेशन के दौरान पीरियड्स से जुडी गलत मान्यताओं और भ्रांतियों के बारे में बात की गई क्‍योंकि पीरियड्स कोई बीमारी नहीं है। इस सेशन में डॉक्‍टर अरुणा कालरा (फेमस गायनेकोलॉजिस्ट), अनुज किश (UnTaboo, सेक्‍स एजुकेशन कंपनी के फाउंडर) और मीनल खरे (सुखीभावा फाउंडेशन की हेड) से हरजिंदगी की सब-एडिटर समृद्धि श्रीवास्‍तव ने इस बारे में बात की। 

डॉक्‍टर अरुणा कालरा ने कहा, 'पीरियड्स आना रिप्रोडक्टिव हेल्‍थ का साइन होता है जो बहुत अच्‍छी बात है।' वहीं अनुज किश ने कहा, 'अगर आपकी बेटी को ठीक से पीरियड्स होते हैं तो आपको खुशी मनानी चाहिए कि आपकी बेटी हेल्‍दी है।'

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सेशन-4

दिल से दिल तक 

Heart To Heart hindi

मां बनना किसी भी महिला के जीवन का एक सुखद अनुभव है और हर महिला इस अहसास से गुजरना चाहती है। लेकिन मां बनने के बाद आज भी बच्‍चे की पूरी जिम्‍मेदारी एक महिला को संभालनी पड़ती है। ऐसे में कुछ सेलिब्रिटी कपल्‍स इस बात का सबसे अच्‍छा उदाहरण है कि बच्‍चे की परवरिश कैसे मिलकर की जा सकती है। इन्‍हीं में से एक टीवी की फेमस एक्‍ट्रेस अनीता हसनंदानी और उनके पार्टनर रोहित रेड्डी है। इस सेशन के दौरान हरजिंदगी की सीनियर सब-एडिटर तान्‍या ने अनीता से उनके मदरहुड के अनोखे अनुभव शेयर करने के लिए कहा। यह बात तो आप जातनी ही हैं कि अनीता कुछ दिन पहले ही एक बेटे की मां बनी हैं।

अपने नए अनुभवों के बारे में बात करते हुए, अनीता हसनंदानी ने कहा, ''मां बनना एक अद्भुत और सुंदर अनुभव है। मैं कहूंगी कि यह दुनिया का सबसे अच्छा अहसास है। हालांकि, याद रखने वाली महत्वपूर्ण बात यह है कि बहुत अधिक तनाव न लें। खुश रहना महत्वपूर्ण होता है।'' 

जब हमने अनीता से पूछा कि क्‍या वह और उनके पार्टनर बच्‍चे का ध्‍यान कैसे रखते हैं। तो उनका जवाब था, 'हमने अपने काम बांट रखे हैं और कोई अपने काम के लिए 'न' नहीं कहता है। हम दोनों बराबरी से बच्‍चे की देखभाल करते हैं।'

सेशन-5

बातें होंगी सिस्टरहुड की

इस सेशन के दौरान हरजिंदगी की सीनियर सब-एडिटर संमविदा तिवारी सिस्टरहुड के बारे में बात की क्‍योंकि हाथ से हाथ मिला कर चलने का अंदाज़ कुछ ख़ास होता है। लेकिन आपने कई बार सुना होगा कि एक महिला ही दूसरी महिला की सबसे बड़ी दुश्‍मन होती है। मगर यह बात कितनी सच है यह जानने के लिए हमने मालिनी अग्रवाल ( डिजिटल इंफ्लूएंसर, टीवी होस्‍ट और missmalini.com की फाउंडर), शायरी चहल (Sheroes.com की फाउंडर), प्रीति राठी (financial website "LXME " की फाउंडर ) से बातचीत की और इस आपसी लड़ाई को सुलझाने की पूरी कोशिश की। 

वो कौन सी रूढ़ियां हैं जिनसे आप एक महिला होने के नाते तोड़ना चाहती हैं? हमारे साथ जरूर शेयर करें। HerZindagi पर हमारा महिला दिवस विशेष SheSpeaks सेशन देखना न भूलें। ऐसी ही और आर्टिकल पढ़ने के लिए के लिए जुड़ी रहिए हमारे साथ।