बड़ी से बड़ी मुसीबतों को पार करके जो हमेशा आगे बढ़ता है निश्चय ही सफलता उसके कदम चूमती है। हमारे देश में न जानें कितनी महिलाएं हैं जो लगातार संघर्ष और कड़ी मेहनत से अपना एक अलग मुकाम हासिल करती हैं और दुनिया के लिए एक उदाहरण बन जाती हैं।

ऐसी ही महिलाओं को सामान देने के लिए हाल ही में पद्मा अवॉर्ड का आयोजन हुआ जिसमें 29 महिलाएं शामिल थीं। उन महिलाओं में से एक हैं 91 साल की जसवंती बेन पोपट जिन्हें लिज्जत पापड़ की शुरुआत करके उसे भारत का सबसे बड़ा पापड़ बॉन्ड बनाने के लिए पद्मा श्री सम्मान से नवाज़ा गया है। आइए जानें कौन हैं जसवंतीबेन और क्या है उनके संघर्ष की कहानी। 

कब की थी लिज्जत पापड़ की शुरुआत 

lijjat papad start

जब भी खाने के साथ कुरकुरे पापड़ की बात आती है तब लिज्जत पापड़ का नाम सबसे पहले याद आता है। लेकिन इसकी शुरुआत की बात की जाए तो ये जसवंतीबेन के लिए एक संघर्ष भरा समय था। 15 मार्च, 1959 को, जसवंतीबेन अपने छह साथियों के साथ गिरगाम, महाराष्ट्र में एक छोटी सी जगह पर इसकी शुरुआत की। यकीनन ये आज एक सबसे बड़ा पापड़ ब्रांड है लेकिन उस समय इसे शुरू करने के लिए जसवंतीबेन को 80 रूपए भी उधार लेने पड़े थे। उधार में मिले 80 रुपये का उपयोग करके उन्होंने पापड़ बनाना शुरू किया। यह धनराशि उन्होंने एक सामाजिक कार्यकर्ता छगनलाल करमशी पारेख से उधार ली थी। अगर आपको 90 के दशक के दौरान टेलीविजन में आने वाला वो जिंगल याद है तो आप लिज्जत पापड़ को अच्छी तरह से पहचानते होंगे। लेकिन वास्तव में इसकी शुरुआत आसान नहीं थी। 

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सात महिलाओं ने जसवंतीबेन का दिया साथ 

व्यवसाय शुरू में मुंबई के गिरगांव इलाके में स्थापित किया गया था। जसवंतीबेन को व्यवसाय शुरू करने में मदद करने वाली सात अन्य महिलाओं में पार्वतीबेन रामदास थोडानी, उजाम्बेन नारंदास कुंडलिया, बानुबेन तन्ना, लगुबेन अमृतलाल गोकानी और जयबेन विठलानी शामिल हैं। धीरे-धीरे सात की संख्या सैकड़ों हो गयी और वर्तमान में इस विशाल उद्योग में हजारों महिलाएं काम कर रही हैं। इस सफल यात्रा के साथ, उन्होंने वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए अपने अधीन कई महिलाओं को प्रशिक्षित और समर्थन किया। लिज्जत पापड़ की संस्थापक जसवंतीबेन जमनादास पोपट की उल्लेखनीय कहानी कई उद्यमियों को प्रेरित करती है। (भारत की सबसे मजबूत महिला पॉलिटिशियन)

पद्म श्री अवॉर्ड से हुईं सम्मानित 

padma award  jasvantiben

91 वर्षीय जसवंतीबेन जमनादास पोपट को इस साल देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में से एक पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।  हाल ही में उन्हें राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उन्हें व्यापार और उद्योग श्रेणी में उनके विशिष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। लिज्जत पापड़ ब्रांड की शुरुआत करने वाली सात महिलाओं में से अब एकमात्र जीवित सदस्य हैं। रोजगार के अवसरों के माध्यम से महिलाओं का समर्थन करने वाली दुनिया की सबसे पुरानी सहकारी समितियों में से एक होने के नाते उन्हें पद्म श्री से सम्मानित करना वास्तव में पूरे देश के लिए सम्मान की बात है। 

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संघर्ष भरी थी पापड़ बनाने की शुरुआत 

पापड़ बनाना और बेचना पोपट की पारिवारिक आय में योगदान करने के लिए एक हताशा भरा कदम था। जसवंतीबेन समेत सभी महिलाएं अपने घर की छत पर पापड़ बनाती थीं। उन्होंने शुरुआत में एक व्यापारी को पापड़ के केवल चार पैकेट बेचे थे। लेकिन मांग बढ़ गई और उन्होंने बाद में देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर आपूर्ति करना शुरू कर दिया। पोपट ने वर्षों में एक छोटे से घरेलू व्यवसाय को एक बड़े कुटीर उद्योग में बदल दिया। 

लिज्जत पापड़ है देश का सबसे बड़ा पापड़ ब्रांड 

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एक समय था जब जसवंतीबेन पोपट का पूंजी निवेश सिर्फ 80 रुपये था। व्यवसाय शुरू में 7 महिलाओं के साथ मुंबई के गिरगांव इलाके में स्थापित किया गया था। धीरे-धीरे सात सैकड़ों हो गए और वर्तमान में इस विशाल उद्योग में हजारों महिलाएं काम कर रही हैं। इस सफल यात्रा के साथ, पोपट ने वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए अपने अधीन कई महिलाओं को प्रशिक्षित और समर्थन किया। आज लिज्जत पापड़ की 60 से अधिक शाखाएं हैं। आज इस पापड़ ब्रांड को लिज्जत पापड़ कहा जाता है और यह 81 शाखाओं के साथ ₹1,600 करोड़ का व्यवसाय बन गया है और देश भर में 45,000 से अधिक महिलाओं को रोजगार देता है, जिनमें से सभी को उद्यम में सह-मालिक माना जाता है।(लिज्जत पापड़ की संघर्ष से लेकर सफलता की कहानी)

जसवंतीबेन जमनादास पोपट और उनके लिज्जत पापड़ की कहानी भारत में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाली कहानियों में से एक है जो हम सभी को हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। 

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