मेनोपॉज के दौरान, एक महिला के शरीर में होने वाले बड़े पैमाने पर हार्मोनल बदलाव के कारण कई तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं। इसके लक्षणों में वेजाइना में ड्राईनेस, दांतों की समस्याएं, हॉट फ्लैशेस, मूड स्विंग, रात में पसीना आना आदि शामिल हैं। साथ ही मेनोपॉज में त्वचा की समस्याओं में मुंहासों से लेकर ड्राई स्किन और उम्र के साथ होने वाले धब्बे शामिल हैं। पेरीमेनोपॉज़ पीरियड के दौरान त्वचा में खुजली की समस्‍या को 'प्रुरिटस' के रूप में भी जाना जाता है।

मेनोपॉज के दौरान त्‍वचा में ड्राईनेस और खुजली होने के कारण?

मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण एस्ट्रोजन के लेवल में भारी गिरावट आती है। एस्ट्रोजन कोलेजन के उत्पादन के लिए जिम्मेदार है, जो त्वचा को कोमल और टाइट बनाता है। इसके अलावा, यह त्वचा के लिए प्राकृतिक तेलों का उत्पादन करता है जो इसे मॉइश्‍चराइज करने में मदद करता है। कोलेजन और प्राकृतिक तेल उत्पादन की अपर्याप्त मात्रा से त्वचा में खुजली और ड्राईनेस की समस्‍या होती है। पेरिमेनोपॉज के आसपास एस्ट्रोजन का उत्पादन कम हो जाता है, लेकिन एण्ड्रोजन का उत्पादन वैसा ही रहता है। त्वचा में अन्य बदलावों में प्राकृतिक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया शामिल है।

शरीर के सबसे ज्‍यादा ड्राई और खुजली वाले ये हिस्‍से हैं:

  • लिम्बस
  • चेस्‍ट 
  • गर्दन 
  • पीठ  
  • चेहरा 
  • कोहनी- त्वचा का परतदार होना। 
  • चेहरे का टी-ज़ोन

ड्राई और खुजली वाली त्वचा के कारण मरीज एक्जिमा से पीड़ित हो सकते हैं। मेनोपॉज के दौरान, न केवल शरीर आवश्यक तेलों को उत्पन्न करने की क्षमता खो देता है, बल्कि यह नमी बनाए रखने की भी क्षमता खो देता है, जिससे त्‍वचा बहुत ज्‍यादा ड्राई और खुजली वाली हो जाती है।

खुजली वाली त्वचा के अलावा, मेनोपॉज में महिलाओं को अन्य त्वचा संबंधी समस्‍याओं जैसे चकत्ते, मुंहासे, झाइयों और झुर्रियों का भी सामना करना पड़ सकता है। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, त्वचा लटकने लगती है क्योंकि आपकी त्वचा को चमक देने वाली मैट्रिक्स कम होने लगता है। इसके अलावा, नाखून कमजोर हो जाते हैं और एंड्रोजेनिक एलोपेसिया के कारण बाल पतले हो जाते हैं।

skin problem during menopause INSIDE

मेनोपॉज के दौरान त्‍वचा पर खुजली और ड्राईनेस से कैसे निपटें?

अपनी त्वचा को जवां और मॉइश्‍चराइज रखने के लिए कुछ आसान टिप्स को फॉलो करें।

  • सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें: बाहर जाने से पहले सनस्क्रीन लगाना न भूलें। एसपीएफ 30 या इससे ज्‍यादा के सनस्क्रीन का इस्‍तेमाल करें। मेनोपॉज के आसपास होने वाले अस्थिर झाइयां 'उम्र के धब्बे' के रूप में दिखाई देने लगती है। ये सूर्य की क्षति के कारण होते हैं। इनसे बचाव के लिए कम उम्र में सन प्रोटेक्शन फैक्टर सनस्क्रीन (हर 2 घंटे के बाद) का इस्‍तेमाल करना जरूरी है। त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाली यूवी किरणें बादलों और कोहरे के माध्यम से भी ठंड के दिनों में फैल सकती हैं। 
  • त्‍वचा को खुजाने से बचें, हालांकि ऐसा करना अच्‍छा लगता है। लेकिन इससे त्‍वचा को नुकसान हो सकता है। किसी ठंडे कम्प्रेस के साथ एरिया को कवर रखें और नाखूनों को ट्रिम करें।
  • अच्छी नींद लें और तनाव कम करें।
  • स्‍मोकिंग और अल्‍कोहल से बचें। रेगलुर एक्‍सरसाइज करें।
  • स्मार्ट फैट का सेवन करें: ओमेगा -3 फैटी एसिड से भरपूर डाइट शरीर को मॉइश्‍चराइज रखने में मदद करती है। ओमेगा -3 युक्त के कुछ फूड विकल्प है जिन्हें आसानी से अपनी डेली डाइट में शामिल किया जा सकता है। उनमें अखरोट, सालमन, अंडे, शैवाल तेल, अलसी, कुसुम तेल शामिल है। 
  • गर्म पानी से नहाना बंद करें: हॉट स्‍टीम लेनेे से आपको अच्छा महसूस होता है, लेकिन गर्म पानी त्वचा के लिए बेहद कठोर होता है, खासकर तब जब इसमें पहले से ही नमी की बहुत ज्‍यादा कमी हो। गर्म पानी से नहाना, सिर्फ त्‍वचा में खुजली और ड्राईनेस की समस्या को बढ़ाएगा; इसलिए, सबसे अच्छा रहेगी अगर इससे बचा जाए।
  • हल्के साबुन का इस्‍तेमाल करें: सुगंधित और सिंथेटिक साबुन त्वचा पर कठोर होते हैं और त्वचा से आवश्यक तेलों को खींच लेते हैं। इसलिए परेशानी को और ज्‍यादा खराब होने से बचाने के लिए हल्के, बिना सुगंधित साबुन का विकल्प चुनें।
  • मॉइश्‍चराइज करना न भूलें: जैसे ही आप शॉवर लेकर बाहर निकलें, त्वचा पर हल्‍के हाथों से मॉइश्‍चराइजर लगा लें। नेचुरल मिनरल ऑयल और पेट्रोलियम जेली त्‍वचा पर अच्‍छी तरह लगते हैं।
  • हाइड्रोकार्टिसोन क्रीम खुजली वाली त्वचा को सूदिंग प्रभाव देने में मदद करती है।
  • हालांकि, सबसे अच्छा हाइड्रेशन अंदर से सुनिश्चित किया जाता है।
  • विटामिन ए और सी युक्त टॉपिकल क्रीम त्वचा को कंडीशन करती हैं। ड्राई त्वचा और चेहरे पर खुजली से बचने के लिए, त्वचा विशेषज्ञ व्यापक रूप से ग्रीन टी, विटामिन सी, शीया बटर, लैक्टिक एसिड और हाइलूरोनिक एसिड के उपयोग की सलाह देते हैं।
  • फाइटोएस्ट्रोजेन जैसे हर्बल सप्लीमेंट का उपयोग किया जा सकता है।
  • हाइड्रोकार्टिसोन क्रीम खुजली वाली त्वचा को सूदिंग प्रभाव देने में मदद करती है।
  • त्वचा को एक्सफोलिएट करने और देखभाल करने से इसकी ताजगी, कोमलता और चमक बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

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मेनोपॉज में त्वचा की अन्य समस्याएं

हाइपोथायरायडिज्म, फंगल संक्रमण और विटामिन की कमी के कारण भी त्वचा की समस्याएं हो सकती हैं।

पेरिमेनोपॉज़ल मुहांसों के लिए, एंटीबायोटिक्स की तुलना में एंटी-एंड्रोजन बेहतर तरीके से काम कर सकता हैं। आप चाहें तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेे सकते हैं। लेजर पील भी आपकी मदद कर सकता हैं।

डर्मल फिलर और कोलेजन-निर्माण भी सैगिंग और झुर्रियों के लिए मदद करता है।

एक और सौम्य निशान जो पेरीमेनोपॉज़ में दिखाई देते है, उन्‍हें सेबोरिक केरेटोसिस कहते है। इनकी शुरुआत छोटे, खुरदुरे उभारों के रूप में होती है, ये समय के साथ गाढ़े होकर मस्से की तरह दिखाई देने लगते हैं। इसे मिडिल एज वार्ट्स के रूप में जाना जाता है, ये हानिरहित त्‍वचा की ग्रोथ हैं जो त्‍वचा पर गुलाबी से भूरे और काले रंग में दिखाई दे सकते हैं। इन्‍हें ऐसे ही छोड़ा जा सकता है या फ्रिजिंग या स्क्रैपिंग द्वारा हटाया जा सकता है।

एक्‍सपर्ट की सलाह के लिए डॉक्‍टर प्रीति देशपांडे एम.एस. (OBGY), FICOG, एंडोस्कोपी ट्रेनिंग IRCAD (फ्रांस) के लिए विशेष धन्यवाद।

Source, Reference and Recommended Reading:

https://www.webmd.com/beauty/features/menopause-dry-skin-hormone-connection#2

https://www.healthline.com/health/menopause/menopause-itching#seek-help

http;//www.beingeve.net/symptoms/how-does-menopause-affect-your-skin