भारत में कैंसर से पीड़ित महिलाओं में सबसे ज्यादा संख्या सर्वाइकल कैंसर के मरीजों की है। दुनिया में सर्वाइकल कैंसर की वजह से मौत की शिकार होने वाली हर चार में से एक महिला भारतीय है। सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स में होता है। सर्विक्स यूट्रस का मुख होता है और यह यूट्रस को वेजाइना से जोड़ता है। जल्दी फिजिकल एक्टिविटीज की शुरुआत होने, High parity (20 हफ्ते के जेस्टेशन पीरियड वाली 5 से ज्यादा प्रेग्नेंसीज), एक से ज्यादा पार्टनर के साथ रिलेशन्स, ज्यादा तंबाकू खाने या स्मोकिंग करने, एचआईवी पीड़ित से संक्रमण के कारण महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। यह कैंसर दो तरह का होता है, एक तो स्क्वेमस सेल का और दूसरा adenocarcinoma का। यह  Human Papillomavirus (HPV) की वजह से होता है। इस बारे में हमने बात की डॉ. अश्वनी भालेराव-गांधी (MD, DGO, DFP, FCPS, DNB, FICOG) से और उन्होंने इस विषय में हमें अहम जानकारी दी।

HPV infection से संक्रमित होने का खतरा होता है ज्यादा

hpv vaccine for women

आज तक 100 तरह के HPV वायरस का पता लगाया जा चुका है। इनमें से 15 oncogenic (ट्यूमर फैलाने वाले) होते हैं, जिसका अर्थ ये है कि इनसे कैंसर हो सकता है। HPV के 16, 18, 31, 33 और 45 टाइप्स लगभग 90 फीसदी सर्वाइकल कैंसर के मामलों के लिए जिम्मेदार होते हैं। ये वायरस फिजिकल एक्विटिविटी के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जा सकते हैं। संक्रमित पार्टनर की त्वचा या फिर उनके genital (प्रजनन अंग) के संपर्क में आने पर HPV संक्रमण का खतरा होता है। एक पार्टनर से Cervical HPV infection होने का खतरा 46 फीसदी तक होता है। कंडोम का इस्तेमाल करने के बावजूद HPV infection से बचाव संभव नहीं है। इसीलिए हर महिला को अपने जीवनकाल में HPV virus से संक्रमित होने का खतरा 80 फीसदी तक होता है। कई बार HPV इन्फेक्शन का असर जल्दी खत्म हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में ठीक ना हो पाने और कई साल तक बने रहने पर यह सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकता है। HPV 6 और 11 जैसे वायरस से संक्रमित होने पर  Genital warts (Genital पर फोड़े जैसे उभार, जो फिटिकल इंटिमेसी के दौरान होते हैं) की आशंका हो सकती है। ये इन्फेक्शन गंभीर नहीं होते और इनसे ट्यूमर होने का खतरा नहीं होता। ये anogenital warts खतरनाक नहीं होते, लेकिन इनसे संक्रमण तेजी से फैलता है। 

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HPV infections से बचाव के लिए वैक्सीन अच्छा विकल्प

कुछ HPV infections से vaginal, vulvar, anal और oropharyngeal cancer होने की आशंका हो सकती है। कई पश्चिमी देशों में HPV vaccination नियमित रूप से ऑफर किये जाते हैं, ताकि भविष्य में सर्वाइकल कैंसर से बचाव किया जा सके। वैक्सिनेशन के बाद शरीर में HPV के खिलाफ हाई लेवल वाली एंटीबॉडीज बन जाती हैं। ये एंटी बॉडीज शरीर में प्रवेश करने वाले HPV वायरस से चिपक जाती हैं, ताकि वह होस्ट सेल में प्रवेश ना कर सकें। HPV वैक्सीन लेने की सही उम्र 9-14 साल के बीच है, यानी लड़की के सेक्शुअली एक्टिव होने की अवस्था से पहले। यह वैक्सीन जितनी जल्दी लग जाती है, शरीर में उतनी ही यंग एज में एंटी बॉडीज बनने लगती हैं। जिन्हें HPV वैक्सीन 9-14 साल की उम्र में दी जाती है, उन्हें यह दो चरणों में दी जाती है। लेकिन 15-26 के उम्र वर्ग वालों को यह 3 चरणों में दी जाती है। वैक्सीन की टाइप के आधार पर यह फैसला लिया जाता है कि उसका दूसरा डोज कब दिया जाए, आदर्श रूप में पहले चरण की वैक्सीन लगने के 1-2 महीने बाद दूसरे चरण की वैक्सीन लग जानी चाहिए। वहीं तीसरे चरण का डोज पहले चरण के डोज से 6 महीने के अंतर पर दिया जाता है।  

45 साल की उम्र तक लगवाई जा सकती है वैक्सीन

जो महिलाएं फिजिकली इंटिमेट होती हैं, उन्हें भी इस वैक्सीन से फायदा मिल सकता है, लेकिन इसका बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिल पाता। ऐसा इसलिए, क्योंकि जिन महिलाओं में HPV संक्रमण पहले ही हो चुका है, उनका वैक्सीन से इलाज संभव नहीं हो पाता। साथ ही वैक्सीन से सभी प्रकार के HPV इन्फेक्शन से भी सुरक्षा नहीं मिल पाती। यह सभी तरह के सर्वाइकल कैंसर से बचाव करने में सक्षम नहीं है। यह वैक्सीन 45 साल की उम्र तक लगवाई जा सकती है। 

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HPV वैक्सीन के साथ PAP smears टेस्ट भी है जरूरी

आमतौर पर HPV वैक्सीन सुरक्षित होती हैं और इन्हें लगवाने पर बहुत ज्यादा परेशानी नहीं होती। कुछ मामलों में बुखार, बेचैनी, इंजेक्शन वाली जगह लाल हो जाने या दर्द होने जैसी स्थितियां हो सकती हैं। HPV vaccines लगवाने का अर्थ ये नहीं है कि आपको नियमित रूप से कराये जाने वाले  PAP smears टेस्ट, जिससे सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती जांच संभव हो पाती है, की जरूरत नहीं है। अगर इसकी समय से जांच हो जाए, तो cervix cancer का असरदार तरीके से इलाज संभव है। लेकिन इलाज कराने की तुलना में सावधानी बरतना कहीं बेहतर है। इसीलिए HPV vaccination सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 

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