Diabetes आज एक महामारी का रूप ले चुकी है। जी हां Diabetes एक जानलेवा बीमारी है जो धीमे जहर की तरह काम करती है और हमारे शरीर को अंदर से खोखला कर देती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ज्‍यादातर diabetes के मरीजों को पता ही नहीं होता कि वह इसका शिकार बन चुके हैं। और जाने-अनजाने वह अपनी डाइट और आदतों से खुद को ही और नुकसान पहुंचाते रहते हैं।

यह बीमारी बड़ों में तो देखने को मिलती हैं लेकिन आजकल के बच्‍चे भी इस बीमारी का शिकार होते नजर आ रहे हैं। अगर आपके बच्‍चे को जल्‍दी-जल्‍दी प्‍यास लगती है या फिर बार-बार पेशाब करने की इच्‍छा होती है या फिर उसकी भूख बढ गई है, तो इसे normal ना समझे। यह Diabetes का लक्षण हो सकता है। बच्‍चों में Diabetes इतना घातक हो सकता है कि इससे बच्‍चों की आंखें और किडनियों पर भी बुरा असर पड सकता है।

टाइप-1-मुख्यतः बच्चों में पाया जाता है इस बीमारी में pancreas gland के बीटा सेल्स का पूरी तरह से नाश हो जाता है जिसके कारण body में insulin की कमी हो जाती है। ऐसा किसी आटोइम्युनिटी या अन्य कारणों से होता है।

Juvenile diabetes क्‍या है?

मुम्बई में ग्लोबल हॉस्पिटल्स के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट Dr. Sneha Kothari के अनुसार, Type-1 Diabetes को Juvenile-Onset या Insulin-Dependent Diabetes कहा जाता है। Diabetes के सभी मामलों में से केवल 5% -10% टाइप-1 डायबिटीज में mellitus का रिकार्ड रखा जाता है जो कि सबसे कॉमन pediatric endocrine illnesses बीमारियों में से एक है। अनुमान है कि लगभग 1 लाख बच्चे भारत में टी 1 डीएम से परेशान हैं। टी 1 डीएम की घटनाएं दुनियाभर में बढ़ रही हैं, और इसमें serious short-term और long-term प्रभाव पड़ता है जहां बॉडी की इम्‍यूनिटी बीटा सेल्‍स को नष्ट कर देती है जो इंसुलिन जारी करती हैं, जिसके कारण बॉडी में इंसुलिन उत्पादन में कमी आ जाती है।

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Juvenile Diabetes के लक्षण

वजन कम होना- Diabetes से पीडित बच्‍चे चाहे जितना खा लें, लेकिन उनका weight बढ़ता ही नहीं हैं। Diabetes का बच्‍चों में यह सबसे आम लक्षण है। 
प्‍यास लगना- जब बच्‍चों में शुगर लेवल बढ जाता है तो उन्‍हें प्‍यास ज्‍यादा लगने लगती है और उनकी इच्‍छा पानी पीने के अलावा sweet cold drink पीने की भी होती है।
बार-बार यूरीन आना- जब ज्‍यादा प्‍यास लगेगी तो जाहिर सी बात है कि यूरीन भी बार-बार आएगा।
भूख लगना- Diabetes होने पर बच्‍चे बहुत भूखे रहते हैं और उनमें energy की कमी होने लगती है।

Type-1 diabetes के साथ अपने बच्‍चे की केयर कैसे करें

  • Dr. Sneha Kothari के अनुसार, Type-1 Diabetes एक life threatening condition है जिसमें पूरी लाइफ इंसुलिन इंजेक्‍शन के माध्‍यम से इंसुलिन replacement को मैनेज किया जाता है। इसमें नियमित रूप से बच्‍चे के ब्‍लड शुगर लेवल की (लगभग रोजाना 6 बार या डॉक्टर की सलाह से) निगरानी की आवश्‍यकता होती है।
  • इसमें strict healthy diet और eating plan की जरूरत होती है जिसमें लो फैट वाले small frequent meals विशेष रूप से saturated fat शामिल होते हैं।  
  • बच्‍चे के लिए रेगलुर एक्‍सरसाइज करना भी जरूरी होता है क्‍योंकि इससे इंसुलिन की efficiency बढ़ाने के लिए ब्‍लड ग्‍लूकोज को कम करने में हेल्प मिलती है, weight और स्‍ट्रेस कम होता है।
  • लेकिन ध्‍यान रहें कि अगर ब्‍लड शुगर में fluctuating हो या fasting glucose 250mg/dl और urine में ketones present हो तो बच्‍चे को एक्‍सरसाइज करने से बचना चाहिए। क्‍योंकि ऐसे में एक्‍सरसाइज करने से वास्‍तव में ब्‍लड ग्‍लूकोज और ketone का उत्‍पादन बढ़ सकता है

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